
पटना। बिहार में रसोई में इस्तेमाल होने वाली हल्दी को लेकर चिंता बढ़ाने वाली जानकारी सामने आई है। खाद्य सुरक्षा से जुड़े जागरूकता अभियान में दावा किया गया है कि राज्य के करीब एक तिहाई घरों में इस्तेमाल की जा रही हल्दी गुणवत्ता जांच में असुरक्षित पाई गई है। पीली और चमकदार दिखने वाली हल्दी खरीदने वाले उपभोक्ता अनजाने में ऐसी हल्दी का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिसमें खतरनाक रसायन की मिलावट हो सकती है।
बिहार खाद्य सुरक्षा स्वास्थ्य अभियान 2026 के तहत चलाए जा रहे जागरूकता कार्यक्रम में बताया गया कि हल्दी को अधिक पीला और आकर्षक बनाने के लिए उसमें ‘लेड क्रोमेट’ यानी सीसा युक्त रसायन मिलाया जा रहा है। यह रसायन स्वास्थ्य के लिए बेहद नुकसानदायक माना जाता है।
अभियान के दौरान पटना के किराना दुकानदारों के बीच बांटे गए पर्चों में उपभोक्ताओं को मिलावटी हल्दी से सावधान रहने की अपील की गई है। इसमें बताया गया कि बाजार में कई जगह ऐसी हल्दी बेची जा रही है, जिसे स्थानीय भाषा में ‘प्यूरी’ के नाम से जाना जाता है। देखने में यह हल्दी अधिक पीली और चमकदार लगती है, लेकिन इसमें मिलाए गए रसायन शरीर के लिए हानिकारक हो सकते हैं।
जागरूकता अभियान के तहत किए गए परीक्षणों में सामने आया कि बिहार के विभिन्न घरों से लिए गए हल्दी के नमूनों में से लगभग 33 प्रतिशत नमूने जांच में असफल पाए गए। इन नमूनों में सीसा की मात्रा निर्धारित मानक से अधिक मिली। इससे खाद्य सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।
विशेषज्ञों के अनुसार, सीसा एक जहरीली धातु है, जिसका लंबे समय तक सेवन शरीर पर गंभीर प्रभाव डाल सकता है। खासकर बच्चों, गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों के लिए सीसा युक्त खाद्य पदार्थ अधिक नुकसानदायक हो सकते हैं। इसके लगातार सेवन से शरीर के कई महत्वपूर्ण अंग प्रभावित हो सकते हैं।
खाद्य सुरक्षा विभाग और स्वास्थ्य विभाग की ओर से लोगों को सलाह दी जा रही है कि वे हल्दी खरीदते समय सावधानी बरतें। बहुत ज्यादा चमकीली और असामान्य पीले रंग की हल्दी से बचने की अपील की जा रही है। उपभोक्ताओं को भरोसेमंद दुकानों से ही खाद्य सामग्री खरीदने की सलाह दी गई है।
किराना दुकानदारों को भी जागरूक किया जा रहा है कि वे बिना जांच और संदिग्ध गुणवत्ता वाले मसालों की बिक्री न करें। अधिकारियों का कहना है कि मिलावटी खाद्य पदार्थों की बिक्री रोकने के लिए लगातार निगरानी और जांच अभियान चलाया जा रहा है।
हल्दी भारतीय रसोई का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसका उपयोग लगभग हर घर में भोजन बनाने के साथ-साथ औषधीय रूप में भी किया जाता है। ऐसे में हल्दी में मिलावट की खबर ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है।
खाद्य सुरक्षा अभियान के तहत लोगों को यह भी बताया जा रहा है कि केवल रंग और चमक देखकर खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता तय नहीं करनी चाहिए। कई बार मिलावट करने वाले पदार्थों को आकर्षक दिखाने के लिए रसायनों का इस्तेमाल करते हैं, जो बाद में स्वास्थ्य के लिए खतरा बन सकते हैं।
अधिकारियों के मुताबिक, खाद्य पदार्थों में मिलावट के खिलाफ कार्रवाई लगातार जारी रहेगी। बाजारों में बिकने वाले मसालों और अन्य खाद्य सामग्री के नमूने लेकर जांच की जाएगी। यदि किसी व्यापारी के यहां मिलावट पाई जाती है तो नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल हल्दी में सीसा मिलावट को लेकर चलाया जा रहा जागरूकता अभियान लोगों को सतर्क करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों ने लोगों से अपील की है कि वे गुणवत्ता वाले मसालों का ही उपयोग करें और संदिग्ध खाद्य सामग्री की जानकारी संबंधित विभाग को दें।





