बिहार

उत्पादन बढ़ाने को सात राज्यों में एक फसली भूमि होगी विकसित

Admin Delhi 1
23 Jun 2023 9:52 AM GMT
उत्पादन बढ़ाने को सात राज्यों में एक फसली भूमि होगी विकसित
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पटना न्यूज़: एक फसली (धान परती) भूमि के उपयोग से फसलों का उत्पादन बढ़ाया जाएगा. आईसीएआर पूर्वी अनुसंधान परिषद देश के सात राज्यों में इसका अध्ययन कर रहा है. देश का करीब 77 फीसदी एक फसली भूमि इन्हीं राज्यों में है. यहां धान के बाद कोई फसल नहीं होती है. इन राज्यों में बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, असम, छत्तीसगढ़ और ओडिशा शामिल है.

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के पूर्वी अनुसंधान परिषद के निदेशक अनूप दास ने बताया कि बारिश के मौसम में धान लगाने के बाद किसान भूमि को आठ माह तक परती छोड़ देते हैं. इसका कारण यहां मिट्टी में नमी की कमी है. अन्य कारणों का भी अध्ययन किया जा रहा है. जलवायु परिवर्तन के चलते चावल का उत्पादन प्रभावित हो रहा है. ऐसे में अनाज की पूर्ति के लिए उपलब्ध भूमि पर ही उत्पादन बढ़ाना विकल्प है. अध्ययन में राज्य सरकारों और केवीके से भी सहयोग लिया जा रहा है. देश में 11.65 मिलियन हेक्टेयर एकफसली भूमि है. इसमें सात राज्यों में करीब नौ लाख मिलियन भूमि है. बिहार के किशनगंज, कटिहार, गया, औरंगाबाद, कटिहार, जमुई, नवादा, बांका, भागलपुर, शेखपुरा जिले में एकफसली भूमि अधिक हैं. झारखंड के रांची, पूर्वी और पश्चिमी सिंहभूम, हजारीबाग, गुमला, साहेबगंज, देवघर, पलामू, दुमका व धनबाद में ऐसी भूमि अधिक है.

सभी जगह अलग-अलग कारण सात राज्यों में एकफसली भूमि के अलग-अलग कारण हैं. बिहार के दक्षिण इलाकों और पूर्वी उत्तर प्रदेश में बारिश की कमी है. पठारी इलाका होने के चलते झारखंड में सिंचाई के इंतजाम मुश्किल हैं. झारखंड और ओडिशा में जानवरों द्वारा फसल नष्ट करना भी एक कारण है.

गया में अध्ययन शुरू

एक फसली भूमि का उपयोग बढ़ाने के लिए आईसीएआर फसल अनुसंधान प्रभाग के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. राकेश कुमार शोध कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि अभी तीन राज्यों में शोध शुरू है. छत्तीसगढ़ के जैसपुर के कंडोरा गांव, झारखंड के नामकुम प्रखंड के चेनी गांव और बिहार के गया जिले के टेकारी प्रखंड में अध्ययन किया जा रहा है. इससे पहले बक्सर में अध्ययन हुआ था.

राज्य एकफसली भूमि

छत्तीसगढ़ 2.72

झारखंड 1.46

पश्चिम बंगाल 1.72

ओडिशा 1.22

बिहार 0.52

असम 0.54

(आंकड़ा मिलियन हेक्टेयर में)

इन राज्यों में हो रहा अध्ययन

बिहार, झारखंड, ओडिशा, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल, पूर्वी उत्तर प्रदेश व असम

नमी बनाए रखने पर जोर

आईसीएआर के भूमि एवं जल प्रबंधन प्रभाग के प्रमुख डॉ. आशुतोष उपाध्याय ने बताया कि एकफसली भूमि का उपयोग बढ़ाने के लिए राज्य सरकार से सिंचाई साधन बढ़ाने में सहयोग लिया जाएगा. किसानों को सामूहिक खेती के लिए जागरूक किया जाएगा. नमी बढ़ाने को पानी व रसायन का छिड़काव भी कराया जाएगा.

बिहार में घट रही एकफसली भूमि

अध्ययन में यह भी सामने आया है कि बिहार में सिंचाई के साधन सभी इलाकों में विकसित हुए हैं. इससे एकफसली क्षेत्र घटे हैं. पांच साल पहले जहां 74 हजार हेक्टेयर भूमि एकफसली थी. वहीं, अब यह 52 हजार हेक्टेयर रह गई है.

दलहन-तिलहन की खेती है संभव

एकफसली भूमि में दलहन, तिलहन, मोटे अनाज की खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है. कम नमी वाली भूमि में छोटे दाने वाली फसलें ज्यादा उपयुक्त होती हैं, इसीलिए मसूर, चना, खेसारी, सरसों, अलसी, कुसुम (सफोला), तोरी आदि की खेती को बढ़ावा देने के लिए किसानों को प्रेरित किया जा रहा है.

दलहन का रकबा तीन मिलियन हेक्टेयर बढ़ेगा

एकफसली भूमि का उपयोग बढ़ने के बाद सात राज्यों में दलहन व तिलहन की खेती का रकबा बढ़ जाएगा. आईसीएआर का अनुमान है कि राज्य सरकारों के सहयोग और किसानों की इच्छाशक्ति से दलहन में ही 30 लाख हेक्टेयर रकबा बढ़ जाएगा.

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