बिहार

परियोजना बांध निर्माण कार्य में हो रहे विरोध को लेकर अधिकारियों ने किया ग्रामीणों के साथ बैठक

Admin Delhi 1
2 March 2023 5:26 AM GMT
परियोजना बांध निर्माण कार्य में हो रहे विरोध को लेकर अधिकारियों ने किया ग्रामीणों के साथ बैठक
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सासाराम: केंद्र और बिहार सरकार की महात्वाकांक्षी योजना में से एक बागमती परियोजना को लेकर जिले के गायघाट प्रखंड जमालपुर कोदई पंचायत के हरपुर स्कूल में बागमती परियोजना बांध के अधिकारियों ने ग्रामीणों के साथ बैठक किया।

इस दौरान राजस्व कर्मचारी मोहन प्रसाद के साथ कई अधिकारी मौके पर मौजूद रहे। जिला परिषद पति समेत कई लोगों ने अधिकारियों के साथ बैठक में शामिल हुए। वहां बैठक के दौरान लोगों ने बांध निर्माण कार्य को लेकर मनमानी के खिलाफ नाराजगी जताई। लोगों ने बांध निर्माण कार्य का जमकर विरोध करना अधिकारियों के सामने शुरू कर दी।

बिहार के मुजफ्फरपुर में बागमती नदी के किनारे रहने वाले वाशिंदे एक बार फिर से एकजुट होने लगे हैं। उन्होंने तय किया है कि वे किसी भी सूरत में अपने इलाके में बागमती नदी पर तटबंध नहीं बनने देंगे। इसके लिए मुजफ्फरपुर जिले के गायघाट और बेनीबाद इलाके में लगातार बैठकों का दौर चल रहा है। दूसरी तरफ सरकार कह रही है कि इस इलाके को बाढ़ से बचाने के लिए बागमती नदी के शेष बचे इलाके पर तटबंध बना लेना जरूरी हो गया है।

सालाना बाढ़ से प्रभावित होने वाले इस इलाके के लोग आखिर क्यों बाढ़ सुरक्षा के नाम पर बनाये जा रहे तटबंध के खिलाफ हैं, यह सवाल कई लोगों के लिए चकित कर देने वाला हो सकता है। मगर बागमती के इलाके के लोगों के लिए यह बहुत सरल मामला है।कल्याणी गांव के जगरनाथ पासवान ने हि.स. से बातचीत में कहा कि तटबंध बन जायेगा तो बाढ़ नहीं आयेगी। बाढ़ नहीं आयी तो उपजाऊ मिट्टी नहीं आयेगी। फिर हम सबकी खेती चौपट हो जायेगी। हमारा हाल भी वैसा ही हो जायेगा, जैसा उन इलाके के लोगों का हो गया है, जहां तटबंध बन गये हैं। हम बाढ़ की आपदा को सह सकते हैं, मगर खेती चौपट हो गयी तो हम कहीं के नहीं रहेंगे।इस तर्क से उन 109 गांव के ज्यादातर लोग सहमत हैं, जहां बागमती बाढ़ प्रबंधन योजना’ के फेज 3(बी) और फेज 5(ए) के तहत इस बार तटबंध बनने जा रहे हैं।

बिहार सरकार ने मुजफ्फरपुर के गायघाट से लेकर दरभंगा के हायाघाट तक के बीच बागमती नदी पर न सिर्फ तटबंध बनाने का फैसला कर लिया है, बल्कि मौजूदा बजट में इसके लिए करोड़ रुपये का प्रावधान भी कर लिया गया है। यह खबर इन इलाके के लोगों के वज्रपात जैसी है, क्योंकि वे 2012 से ही ऐसी किसी परियोजना का खुलकर विरोध कर रहे हैं।

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