
मुजफ्फरपुर। बिहार में फर्जी आधार कार्ड तैयार कर बांग्लादेशी समेत विदेशी नागरिकों के लिए भारतीय पासपोर्ट बनवाने वाले गिरोह की जांच का दायरा बढ़ता जा रहा है। मुजफ्फरपुर पुलिस अब इस मामले से जुड़ी जानकारी केंद्रीय जांच एजेंसियों के साथ साझा करने की तैयारी में है। गिरोह के कथित मास्टरमाइंड मोहम्मद एजाज कमर के नेटवर्क और विदेशी नागरिकों को भारतीय पहचान दस्तावेज उपलब्ध कराने के आरोपों को राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़कर देखा जा रहा है। इस मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की पड़ताल की संभावना भी जताई जा रही है। हालांकि, एनआईए द्वारा औपचारिक रूप से जांच अपने हाथ में लेने की पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस की अब तक की जांच में बिहार के कई जिलों सहित देश के 17 राज्यों में एजाज कमर से जुड़े आधार केंद्रों और ऑपरेटरों के नेटवर्क की जानकारी सामने आई है।
फर्जी आधार और पासपोर्ट गिरोह की जांच केंद्रीय एजेंसियों तक पहुंचेगी
मुजफ्फरपुर पुलिस ने फर्जी पहचान दस्तावेज तैयार करने वाले गिरोह के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी जुटाई है। जांच में सामने आया है कि गिरोह कथित तौर पर आधार केंद्रों के लिए अधिकृत मशीनों और ऑपरेटरों की लॉगिन आईडी का गलत इस्तेमाल कर रहा था।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह मामला केवल फर्जी आधार कार्ड बनाने तक सीमित नहीं है। विदेशी नागरिकों के लिए भारतीय पहचान दस्तावेज और पासपोर्ट तैयार कराए जाने के कारण इसके राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े पहलुओं की भी जांच जरूरी है।
इसी वजह से स्थानीय पुलिस मामले से संबंधित दस्तावेज और आरोपियों के नेटवर्क की जानकारी केंद्रीय एजेंसियों के साथ साझा करने की तैयारी में है।
जांच में यह पता लगाने का प्रयास किया जाएगा कि गिरोह ने कितने विदेशी नागरिकों को भारतीय दस्तावेज उपलब्ध कराए और इन दस्तावेजों का कहां-कहां इस्तेमाल हुआ।
पटना से गिरफ्तार हुआ था मास्टरमाइंड एजाज कमर
मुजफ्फरपुर पुलिस ने अक्टूबर के पहले सप्ताह में मोहम्मद एजाज कमर को पटना से गिरफ्तार किया था।
एजाज मूल रूप से भोजपुर जिले के आरा का रहने वाला बताया गया है। उसका परिवार लंबे समय से चंडीगढ़ में रह रहा है।
पुलिस की पूछताछ में पता चला कि एजाज एमटेक की पढ़ाई कर चुका है और आधार केंद्रों के लिए मशीन तथा कर्मचारी उपलब्ध कराने के काम से जुड़ा था।
पुलिस के मुताबिक, इसी व्यवसाय की आड़ में वह कथित तौर पर फर्जी दस्तावेज तैयार कराने का नेटवर्क संचालित कर रहा था।
गिरफ्तारी के बाद उसे न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया गया था। इस मामले में एजाज समेत चार आरोपियों की गिरफ्तारी की पुष्टि हुई थी।
17 राज्यों में नेटवर्क, 200 से अधिक ऑपरेटरों की भूमिका की जांच
इस मामले में पुलिस की आगे की पूछताछ में नेटवर्क के विस्तार को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है।
शुरुआती जांच में एजाज कमर का नेटवर्क 11 राज्यों में सक्रिय होने की बात सामने आई थी। बाद की रिपोर्टों में 17 राज्यों के विभिन्न बैंक आधारित आधार केंद्रों से उसके जुड़ाव का उल्लेख किया गया।
जांच में करीब 200 ऑपरेटरों के इस नेटवर्क से जुड़े होने की जानकारी भी सामने आई है।
आरोप है कि इन कर्मचारियों में कुछ को अधिकृत आधार केंद्रों पर तैनात कर उनके जरिए पहचान दस्तावेजों में अवैध बदलाव किए जाते थे।
पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि किन केंद्रों पर अनियमितताएं हुईं और कितने ऑपरेटर वास्तविक रूप से आपराधिक गतिविधियों में शामिल थे।
केवल किसी केंद्र पर एजाज की कंपनी से कर्मचारी तैनात होने से उसकी अपराध में संलिप्तता सिद्ध नहीं होती।
मुजफ्फरपुर के साइबर कैफे से हुआ था गिरोह का खुलासा
इस पूरे मामले की शुरुआत 30 सितंबर को मुजफ्फरपुर नगर थाना पुलिस को मिली सूचना से हुई थी।
पुलिस को जानकारी मिली थी कि मोतीझील इलाके में एक साइबर कैफे की आड़ में फर्जी तरीके से आधार कार्ड बनाए जा रहे हैं।
सूचना के बाद पुलिस ने कन्हाई कम्युनिकेशन नामक प्रतिष्ठान पर छापेमारी की।
कार्रवाई के दौरान लैपटॉप, आधार से जुड़े इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, फिंगरप्रिंट और आईरिस स्कैनर, क्लोन थंब इंप्रेशन तथा आठ मूल आधार कार्ड बरामद किए गए।
पुलिस ने मौके से साहिल कुमार को गिरफ्तार किया। इसके बाद जांच के आधार पर शिव कुमार पंडित और सुजीत कुमार को पकड़ा गया।
आरोपियों से पूछताछ के बाद एजाज कमर का नाम सामने आया और उसे पटना से गिरफ्तार किया गया।
बांग्लादेशी नागरिक के नाम पर बना भारतीय पासपोर्ट
पुलिस की जांच में एक बांग्लादेशी नागरिक के लिए कथित फर्जी दस्तावेजों के आधार पर भारतीय पासपोर्ट बनवाने का मामला सामने आया।
रिपोर्टों के अनुसार, बांग्लादेशी नागरिक मोहम्मद बेलाल होसन के लिए मुजफ्फरपुर के पते और मोहम्मद आफताब के नाम का इस्तेमाल किया गया था।
जांच में संबंधित पासपोर्ट और उसके लिए प्रस्तुत दस्तावेजों से जुड़ी अनियमितताओं की जानकारी मिली।
पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि पासपोर्ट आवेदन में किन दस्तावेजों का इस्तेमाल हुआ और सत्यापन की प्रक्रिया में कथित फर्जीवाड़ा कैसे पकड़ में नहीं आया।
इस मामले ने पहचान दस्तावेजों और पासपोर्ट जारी करने की प्रक्रिया की विश्वसनीयता को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
31 अफगानी नागरिकों के पासपोर्ट की भी पड़ताल
फर्जी पासपोर्ट से जुड़ी जांच में अफगानिस्तान के नागरिकों के नाम भी सामने आए हैं।
प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार, बिहार के पते पर 31 संदिग्ध अफगानी नागरिकों के भारतीय पासपोर्ट जारी होने की जानकारी संबंधित अधिकारियों तक पहुंची थी।
इनमें 30 व्यक्तियों के पास अफगानिस्तान के पासपोर्ट भी होने की बात सामने आई।
पुलिस और संबंधित एजेंसियों के सामने सवाल है कि इन लोगों ने भारतीय पहचान और पते के प्रमाण किस आधार पर प्रस्तुत किए।
हालांकि, इन सभी मामलों का एजाज कमर के नेटवर्क से सीधा संबंध अभी प्रमाणित नहीं हुआ है। जांच एजेंसियों को संबंधित दस्तावेजों और व्यक्तियों की पहचान का स्वतंत्र सत्यापन करना होगा।
लंदन कनेक्शन की जांच, विदेशों से संबंधों की पड़ताल
एजाज कमर के विदेश से जुड़े संपर्कों को लेकर भी जांच की जा रही है।
मुजफ्फरपुर के सिटी एसपी मोहिबुल्लाह अंसारी के अनुसार, एजाज की पत्नी और परिवार के कुछ सदस्य लंदन में रहते हैं।
पुलिस इसी जानकारी के आधार पर उसके विदेश संपर्कों और यात्रा संबंधी विवरण की पड़ताल कर रही है।
जांच में यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि फर्जी दस्तावेज तैयार करने वाले नेटवर्क का किसी विदेशी व्यक्ति या संगठन से कोई संबंध था या नहीं।
हालांकि, परिवार के सदस्यों का विदेश में रहना अपने आप में किसी आपराधिक गतिविधि का प्रमाण नहीं है। विदेशी नेटवर्क से जुड़े आरोपों की पुष्टि के लिए ठोस साक्ष्य आवश्यक होंगे।
पटना, हाजीपुर और खगड़िया में भी नेटवर्क की तलाश
एजाज कमर के कथित नेटवर्क की जांच मुजफ्फरपुर तक सीमित नहीं है।
पुलिस के अनुसार, पटना, हाजीपुर, खगड़िया और बिहार के अन्य जिलों में भी आधार केंद्रों के माध्यम से संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी सामने आई है।
जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि क्या इन क्षेत्रों में भी अधिकृत उपकरणों और लॉगिन आईडी का दुरुपयोग किया गया।
इसके साथ ही अन्य राज्यों की पुलिस से संपर्क कर संदिग्ध आधार केंद्रों और ऑपरेटरों का विवरण जुटाया जा रहा है।
NIA की भूमिका पर टिकी नजरें, राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मामला
विदेशी नागरिकों को कथित रूप से फर्जी भारतीय दस्तावेज उपलब्ध कराने का मामला सामने आने के बाद केंद्रीय एजेंसियों की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है।
पुलिस यह जांच कर रही है कि नेटवर्क ने कितने फर्जी आधार कार्ड तैयार किए, कितने पासपोर्ट बनवाए और इनमें किन व्यक्तियों की भूमिका रही।
फिलहाल एजाज कमर की गिरफ्तारी के बाद पुलिस उसके नेटवर्क की परतें खोलने में जुटी है। केंद्रीय एजेंसियों को जानकारी साझा करने की तैयारी के बीच यह स्पष्ट होना बाकी है कि एनआईए इस मामले में औपचारिक जांच शुरू करेगी या नहीं।





