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बिहार की कंवर झील की बिगड़ती हालत पर NGT सख्त

Kavita2
26 July 2026 3:38 PM IST
बिहार की कंवर झील की बिगड़ती हालत पर NGT सख्त
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बिहार : ऐतिहासिक कंवर झील (काबर ताल) की बिगड़ती पारिस्थितिकी स्थिति को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने गंभीर रुख अपनाया है। एशिया की सबसे बड़ी ऑक्सबो झील मानी जाने वाली इस जल संरचना के संरक्षण को लेकर एनजीटी ने केंद्र सरकार और अन्य संबंधित पक्षों से जवाब तलब किया है।

एनजीटी एक मीडिया रिपोर्ट पर स्वत: संज्ञान लेते हुए इस मामले की सुनवाई कर रहा है। रिपोर्ट में बिहार के बेगूसराय जिले से करीब 20 किलोमीटर उत्तर में स्थित चेरिया बरियारपुर क्षेत्र में मौजूद कंवर झील की खराब होती पर्यावरणीय स्थिति को उजागर किया गया था। रिपोर्ट में झील के जल क्षेत्र, जैव विविधता और स्थानीय समुदायों पर पड़ रहे प्रभाव को लेकर चिंता जताई गई थी।

हाल ही में मामले की सुनवाई करते हुए एनजीटी अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य अफरोज अहमद की पीठ ने कहा कि कंवर झील एक महत्वपूर्ण प्राकृतिक जल निकाय है। इसे वर्ष 2020 में रामसर साइट के रूप में मान्यता दी गई थी। यह झील न केवल पर्यावरणीय दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि लंबे समय से स्थानीय मछुआरा समुदायों की आजीविका का प्रमुख आधार भी रही है।

कंवर झील को ऑक्सबो झील की श्रेणी में रखा जाता है। ऑक्सबो झील उस समय बनती है जब नदी का कोई बड़ा घुमावदार हिस्सा मुख्य धारा से कटकर अलग हो जाता है और एक अलग जल निकाय का रूप ले लेता है। ऐसी झीलें जैव विविधता के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती हैं और इनमें कई प्रकार के जलीय जीव-जंतुओं तथा पक्षियों का निवास होता है।

एनजीटी ने अपने आदेश में कहा कि इस तरह के महत्वपूर्ण जल निकायों का संरक्षण पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के लिए आवश्यक है। झील की खराब होती स्थिति को लेकर संबंधित विभागों से विस्तृत जानकारी मांगी गई है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इसके संरक्षण के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं और आगे की योजना क्या है।

कंवर झील को प्रवासी पक्षियों के महत्वपूर्ण ठिकानों में भी शामिल किया जाता है। हर साल बड़ी संख्या में देश-विदेश से आने वाले पक्षी यहां पहुंचते हैं। झील का प्राकृतिक स्वरूप और जैव विविधता इसे पर्यावरण प्रेमियों और शोधकर्ताओं के लिए भी महत्वपूर्ण बनाती है।

हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में झील कई चुनौतियों का सामना कर रही है। जलभराव क्षेत्र में कमी, गाद जमा होना, प्रदूषण, अवैध गतिविधियां और जल प्रबंधन से जुड़ी समस्याओं ने झील के पारिस्थितिक संतुलन को प्रभावित किया है। स्थानीय लोगों और पर्यावरण विशेषज्ञों की ओर से लंबे समय से इसके संरक्षण की मांग उठती रही है।

स्थानीय मछुआरा समुदाय के लिए भी कंवर झील का विशेष महत्व है। पीढ़ियों से कई परिवार मछली पालन और उससे जुड़े कार्यों पर निर्भर रहे हैं। झील की स्थिति खराब होने से उनकी आजीविका पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

एनजीटी के हस्तक्षेप के बाद अब उम्मीद की जा रही है कि झील के संरक्षण के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे। पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि केवल कागजी योजनाओं से काम नहीं चलेगा, बल्कि झील के प्राकृतिक स्वरूप को बचाने के लिए जमीनी स्तर पर प्रभावी कार्रवाई जरूरी है।

विशेषज्ञों के अनुसार, रामसर साइट के रूप में पहचान मिलने के बाद कंवर झील के संरक्षण की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। ऐसे स्थलों का संरक्षण न केवल स्थानीय पर्यावरण के लिए जरूरी है, बल्कि वैश्विक स्तर पर जैव विविधता बचाने के प्रयासों का भी हिस्सा है।

एनजीटी ने केंद्र और अन्य संबंधित संस्थानों से जवाब मांगते हुए मामले को गंभीरता से लिया है। अब संबंधित विभागों को झील की मौजूदा स्थिति, संरक्षण उपायों और भविष्य की कार्ययोजना से जुड़ी जानकारी प्रस्तुत करनी होगी।

कंवर झील का संरक्षण बिहार के पर्यावरणीय भविष्य के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। एनजीटी की पहल के बाद स्थानीय लोगों और पर्यावरण संगठनों को उम्मीद है कि इस ऐतिहासिक जल निकाय को बचाने के लिए प्रभावी और स्थायी कदम उठाए जाएंगे।

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