
Bihar बिहार: देश की सबसे बड़ी ग्रामीण रोजगार योजना MGNREGA अब नए स्वरूप और नए नाम के साथ लागू होने जा रही है। केंद्र सरकार ने इस योजना को पुनर्गठित करते हुए इसका नया नाम ‘जीआरएमजे’ यानी विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) रखा है।
यह योजना मूल रूप से वर्ष 2005 में राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (NREGA) के रूप में शुरू की गई थी, जिसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार की गारंटी देना था। बाद में वर्ष 2010 में इसका नाम बदलकर महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना कर दिया गया था, जिसे आज MGNREGA के नाम से जाना जाता है।
अब केंद्र सरकार ने इस योजना को और व्यापक बनाने और बदलते ग्रामीण आर्थिक ढांचे के अनुरूप ढालने के लिए इसका नया नाम और ढांचा तैयार किया है। नई योजना के तहत इसे अधिक प्रभावी, तकनीकी रूप से सक्षम और आजीविका आधारित बनाया जाएगा।
विभागीय जानकारी के अनुसार, इस नई योजना को वित्तीय वर्ष 2026-27 से लागू करने की तैयारी थी, लेकिन पोर्टल और तकनीकी ढांचे की पूरी तैयारी न हो पाने के कारण इसे फिलहाल स्थगित कर दिया गया है। अब इसके डिजिटल सिस्टम और प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करने पर काम किया जा रहा है।
नई योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ाने के साथ-साथ आजीविका के स्थायी साधनों को विकसित करना है। इसके तहत श्रमिकों को न केवल अस्थायी रोजगार मिलेगा, बल्कि कौशल विकास और स्थानीय स्तर पर आय के नए स्रोतों पर भी ध्यान दिया जाएगा।
सरकारी अधिकारियों का मानना है कि बदलते आर्थिक परिदृश्य और डिजिटल प्रशासन को ध्यान में रखते हुए इस योजना में सुधार आवश्यक था। इसी के तहत इसे नए नाम और नए मॉडल के साथ पेश किया जा रहा है।
ग्रामीण विकास सुधारों के अनुसार, ग्रामीण रोजगार योजनाओं में तकनीक का उपयोग बढ़ने से विस्थापन और दक्षता में सुधार हो सकता है। साथ ही, भुगतान प्रणाली और कार्य जिम्मेदारियों को भी अधिक अक्षम बनाया जा सकता है।
हालांकि, इस बदलाव को लेकर ग्रामीण स्तर पर जागरूकता और तैयारी एक बड़ी चुनौती मानी जा रही है। पुराने ढांचे से जुड़े लाखों श्रमिकों को नए सिस्टम से जोड़ना और उन्हें प्रशिक्षित करना सरकार के लिए एक महत्वपूर्ण कार्य होगा।
कुल मिलाकर, मनरेगा का यह नया स्वरूप ग्रामीण रोजगार नीति में एक बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है, जिसका उद्देश्य सिर्फ रोजगार देना ही नहीं बल्कि ग्रामीण आजीविका को मजबूत बनाना भी है।





