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बिहार में नया साइबर फ्रॉड अलर्ट, कूरियर और सस्ते सोने के नाम पर लोगों को बना रहे शिकार

nidhi
25 July 2026 8:02 AM IST
बिहार में नया साइबर फ्रॉड अलर्ट, कूरियर और सस्ते सोने के नाम पर लोगों को बना रहे शिकार
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बिहार पुलिस की चेतावनी, कूरियर और सस्ते सोने के ऑफर से रहें सतर्क; साइबर ठग कर रहे बड़ा खेल
Patna: बिहार में साइबर ठगी के मामलों में लगातार इजाफा हो रहा है। अब साइबर अपराधी लोगों को फर्जी कूरियर, सस्ते सोने की खरीदारी, पार्सल में अवैध सामान मिलने और डिजिटल अरेस्ट जैसे नए-नए तरीकों से निशाना बना रहे हैं। एक फोन कॉल या मैसेज के जरिए लोगों को जाल में फंसाकर उनकी बैंकिंग जानकारी हासिल की जाती है और देखते ही देखते बैंक खाते से लाखों रुपये गायब हो जाते हैं।
साइबर पुलिस के अनुसार, ठग खुद को कूरियर कंपनी, पुलिस, कस्टम विभाग, बैंक अधिकारी या सरकारी एजेंसी का कर्मचारी बताकर लोगों को डराते या लालच देते हैं। इसके बाद वे ओटीपी, बैंक डिटेल, यूपीआई पिन या किसी ऐप को डाउनलोड करने के लिए कहते हैं। जैसे ही पीड़ित उनकी बातों में आ जाता है, उसके खाते से रकम निकाल ली जाती है।
कूरियर स्कैम से कैसे बनाया जा रहा है शिकार?
साइबर अपराधी लोगों को फोन कर बताते हैं कि उनके नाम से भेजे गए एक पार्सल में प्रतिबंधित सामान, नकदी, ड्रग्स या फर्जी दस्तावेज मिले हैं। इसके बाद वे खुद को पुलिस या कस्टम अधिकारी बताकर डराते हैं कि यदि सहयोग नहीं किया गया तो कानूनी कार्रवाई होगी।
डर के माहौल में कई लोग उनकी बातों पर भरोसा कर लेते हैं और वीडियो कॉल, स्क्रीन शेयरिंग या बैंकिंग संबंधी जानकारी साझा कर देते हैं। इसी दौरान ठग खाते से पैसे निकाल लेते हैं।
सस्ते सोने का लालच
साइबर अपराधी सोशल मीडिया, व्हाट्सएप और टेलीग्राम जैसे प्लेटफॉर्म पर कम कीमत में सोना बेचने के विज्ञापन भी चला रहे हैं। लोगों को बाजार से काफी कम कीमत पर सोना देने का दावा किया जाता है।
ठग पहले एडवांस पेमेंट या बुकिंग राशि जमा कराने को कहते हैं। जैसे ही पैसे ट्रांसफर होते हैं, उनका मोबाइल नंबर बंद हो जाता है या वे संपर्क खत्म कर देते हैं। कई मामलों में नकली सोना भेजकर भी लोगों को ठगा जाता है।
डिजिटल अरेस्ट का नया हथकंडा
हाल के दिनों में "डिजिटल अरेस्ट" के नाम पर भी ठगी के मामले बढ़े हैं। ठग वीडियो कॉल पर पुलिस या जांच एजेंसी का अधिकारी बनकर लोगों को डराते हैं कि उनके खिलाफ गंभीर मामला दर्ज है। इसके बाद जांच के नाम पर बैंक खाते की जानकारी या पैसे ट्रांसफर करने के लिए दबाव बनाया जाता है।
विशेषज्ञ स्पष्ट करते हैं कि कोई भी सरकारी एजेंसी फोन या वीडियो कॉल पर किसी व्यक्ति को "डिजिटल अरेस्ट" नहीं करती और न ही बैंक खाते में पैसे जमा कराने का निर्देश देती है।
ठगी के दौरान अपनाए जाने वाले तरीके
साइबर अपराधी आमतौर पर—
खुद को कूरियर कंपनी का कर्मचारी बताते हैं।
पुलिस, सीबीआई, कस्टम या बैंक अधिकारी बनकर फोन करते हैं।
कम कीमत में सोना बेचने का झांसा देते हैं।
केवाईसी अपडेट या बैंक खाता बंद होने का डर दिखाते हैं।
स्क्रीन शेयरिंग या रिमोट एक्सेस ऐप डाउनलोड करवाते हैं।
ओटीपी, यूपीआई पिन और कार्ड की जानकारी मांगते हैं।
इन संकेतों से रहें सतर्क
यदि कोई व्यक्ति—
तुरंत पैसे भेजने का दबाव बनाए।
बैंक या यूपीआई पिन मांगे।
वीडियो कॉल पर पहचान पत्र दिखाकर डराए।
संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने को कहे।
किसी ऐप को डाउनलोड करने के लिए मजबूर करे।
तो तुरंत सतर्क हो जाएं और उसकी बातों पर भरोसा न करें।
खुद को कैसे सुरक्षित रखें?
साइबर विशेषज्ञ लोगों को सलाह देते हैं कि—
किसी भी अनजान कॉल पर बैंकिंग जानकारी साझा न करें।
ओटीपी, एटीएम पिन और यूपीआई पिन किसी को न बताएं।
केवल आधिकारिक वेबसाइट या ऐप का ही उपयोग करें।
सोशल मीडिया पर दिख रहे सस्ते ऑफर की जांच करें।
किसी भी संदिग्ध लिंक पर क्लिक न करें।
मोबाइल में स्क्रीन शेयरिंग ऐप केवल विश्वसनीय स्थिति में ही इस्तेमाल करें।
ठगी होने पर क्या करें?
यदि किसी व्यक्ति के साथ साइबर ठगी हो जाती है, तो समय पर कार्रवाई करना बेहद जरूरी है।
सबसे पहले—
अपने बैंक को तुरंत सूचना दें और खाते को ब्लॉक कराने का अनुरोध करें।
राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर तुरंत शिकायत दर्ज कराएं।
राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें।
नजदीकी साइबर थाना या स्थानीय पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज कराएं।
लेनदेन से जुड़े सभी स्क्रीनशॉट, मैसेज और कॉल डिटेल सुरक्षित रखें।
पुलिस की अपील
बिहार पुलिस और साइबर सेल ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अज्ञात कॉल, संदेश या ऑनलाइन ऑफर पर बिना जांच किए भरोसा न करें। यदि कोई व्यक्ति खुद को सरकारी अधिकारी बताकर पैसे या गोपनीय जानकारी मांगता है, तो पहले संबंधित विभाग के आधिकारिक माध्यम से उसकी पुष्टि करें।
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