बिहार

भोजपुर में सरकारी सिस्टम की लापरवाही उजागर

Saba Naaz
3 July 2026 4:53 PM IST
भोजपुर में सरकारी सिस्टम की लापरवाही उजागर
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Bihar: भोजपुर जिले में जल संरक्षण को लेकर केंद्र और राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाएं जमीन पर असरदार साबित होती नहीं दिख रही हैं। रेन वाटर हार्वेस्टिंग और अन्य जल संचय योजनाएं कागजों तक सीमित होकर रह गई हैं, जबकि जमीनी स्तर पर स्थिति लगातार चिंताजनक बनी हुई है। गर्मी के मौसम में जहां कई प्रखंडों और आरा शहर के मोहल्लों में भूजल स्तर तेजी से नीचे जा रहा है, वहीं सरकारी कार्यालयों में रोजाना हजारों लीटर पानी बेवजह बर्बाद हो रहा है।

जिले में रेन वाटर हार्वेस्टिंग योजना को बढ़ावा देने का दावा किया गया था, लेकिन अधिकांश सरकारी भवनों में यह व्यवस्था या तो बनाई ही नहीं गई या फिर रखरखाव के अभाव में निष्क्रिय पड़ी है। इससे हर वर्ष बारिश का लाखों लीटर पानी बिना संग्रहित हुए बह जाता है, जो जल संरक्षण के प्रयासों पर सवाल खड़े करता है। सरकारी कार्यालयों में स्थिति और भी गंभीर है। कृषि भवन, पुराने समाहरणालय, उप विकास आयुक्त कार्यालय और ट्रेजरी कार्यालय सहित कई परिसरों में पानी की टंकियां ओवरफ्लो होने के कारण घंटों पानी बहता रहता है। कई जगह मोटर बंद नहीं होने से लगातार पानी की बर्बादी हो रही है, लेकिन इसे रोकने के लिए कोई प्रभावी व्यवस्था नहीं दिखाई दे रही है।

गर्मी के दिनों में जिले के कई प्रखंडों और आरा शहर के विभिन्न इलाकों में भूजल स्तर नीचे चले जाने से लोगों को गंभीर जल संकट का सामना करना पड़ता है। कई स्थानों पर हैंडपंप सूख जाते हैं और समरसेबल भी काम करना बंद कर देते हैं, जिससे पेयजल संकट और बढ़ जाता है।

जल संरक्षण को लेकर चलाए जा रहे जागरूकता अभियान भी प्रभावी नहीं हो पा रहे हैं। बैनर, पोस्टर, गोष्ठी और अन्य कार्यक्रमों के बावजूद लोगों में अपेक्षित जागरूकता नहीं आ पा रही है, जिसके कारण सरकारी और निजी दोनों स्तर पर पानी बचाने को लेकर लापरवाही जारी है। जानकारी के अनुसार, वर्ष 2016 में जल संचय अभियान की शुरुआत की गई थी, जिसका उद्देश्य तालाब, कुएं, कुंड, बावड़ी और अन्य पारंपरिक जल स्रोतों का संरक्षण करना था। इसके साथ ही वर्षा जल के संग्रह के लिए आधुनिक तकनीक अपनाने पर भी जोर दिया गया था, लेकिन भोजपुर जिले में इसका असर सीमित ही रहा।

जिले में लगभग 500 सरकारी कार्यालय हैं, लेकिन इनमें से केवल करीब 100 भवनों में ही रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम स्थापित है। इनमें भी अधिकतर सिस्टम निष्क्रिय पड़े हैं। जिले में 14 प्रखंड, 213 पंचायतें, 1 नगर निगम, 5 नगर पंचायत और 1,244 गांव हैं, जहां जल संरक्षण के व्यापक और प्रभावी प्रयासों की आवश्यकता महसूस की जा रही है।

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