Muzaffarpur: जिले में बनने वाले नए औद्योगिक क्षेत्र का विरोध जारी

मुजफ्फरपुर: जिले में बन रहे नए औद्योगिक क्षेत्र का विरोध बढ़ता जा रहा है। यहां के किसान अब अपने क्षेत्र में फैक्ट्रियां नहीं चाहते। इस बारे में किसानों का कहना है कि यहां फैक्ट्री लगाने से पीढ़ियों से उगाई जा रही फसलें नष्ट हो जाएंगी। उन्होंने यह भी कहा कि कृषि भूमि भी खत्म हो जाएगी। इसलिए अगर कोई बल प्रयोग करेगा तो हम अपनी जान दे देंगे लेकिन किसी भी हालत में अपनी जमीन नहीं देंगे। ग्रामीणों ने कहा कि हम अपनी कृषि भूमि को अपनी आंखों के सामने नष्ट नहीं होने देंगे। बिहार सरकार द्वारा यहां उपजाऊ जमीन को छोड़ कर बंजर जगह पर औद्योगिक क्षेत्र स्थापित करने के फैसले के विरोध में किसानों ने जमीन पर धरना शुरू कर दिया है और इसके लिए सैकड़ों ग्रामीण आगे आए हैं।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने प्रगति यात्रा के दौरान यह घोषणा की: दरअसल, अपनी प्रगति यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जिले को एक और बड़े औद्योगिक क्षेत्र की सौगात दी, जिससे तीन जिलों के लोगों को रोजगार व अन्य काम मिलने की संभावना है। इसके लिए बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के पारू प्रखंड के चतुरपट्टी, भोजपट्टी और चैनपुर समेत तीन गांवों में 788 एकड़ जमीन पर नया औद्योगिक क्षेत्र स्थापित करने का प्रस्ताव पारित किया गया। इस दिशा में जिला प्रशासन ने कार्य में तेजी लाते हुए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इतना ही नहीं जमीन की मापी भी कर ली गई, लेकिन अब अंचलाधिकारी को ग्रामीणों के आक्रोश का सामना करना पड़ रहा है। यहां के ग्रामीण औद्योगिक क्षेत्र की स्थापना का विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि हम किसी भी हालत में ऐसा नहीं होने देंगे।
इस मामले को लेकर स्थानीय किसान संजीव कुमार ने कहा कि हम अपनी उपजाऊ कृषि भूमि को बचाने के लिए यहां आए हैं। अगर सरकार फैक्ट्री लगा देगी तो हम और यहां के सैकड़ों लोग कहां जाएंगे? इसके कारण हमारी वर्तमान कृषि भी समाप्त हो जायेगी। हम सभी ग्रामीण यहां पीढ़ियों से विभिन्न प्रकार की फसलें उगाते आ रहे हैं। कारखाने लगाने से हमारी भूमि की उर्वरता नष्ट हो जाएगी। हम यहां कोई कारखाना नहीं चाहते. किसान मो अब्दुल समद ने कहा कि हम यहां आलू, प्याज, लहसुन, गेहूं, मक्का और धान उगाते हैं और ये हर साल उगाए जाते हैं। इसे पड़ोसी जिलों में भी बेचा जाता है। उनका कहना है कि यह सरकार हमारा मजाक उड़ा रही है। हम गांव वालों ने सामूहिक रूप से निर्णय लिया है कि हम किसी भी कीमत पर यहां औद्योगिक क्षेत्र स्थापित नहीं होने देंगे और अब इसे बचाने के लिए अपनी जान भी दे देंगे।





