बिहार

मां दुर्गा का खोइछा भरती हैं मुस्लिम महिलाएं, 300 साल से जारी परंपरा

nidhi
5 Oct 2026 7:42 AM IST
मां दुर्गा का खोइछा भरती हैं मुस्लिम महिलाएं, 300 साल से जारी परंपरा
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मुस्लिम महिलाओं ने भरा खोइछा
मधुबनी: बिहार के मधुबनी में दुर्गा पूजा के दौरान निभाई जाने वाली एक पुरानी परंपरा सामाजिक और धार्मिक सद्भाव की मिसाल बनी हुई है। यहां मुस्लिम समुदाय की महिलाएं दुर्गा पूजा में शामिल होकर मां दुर्गा का खोइछा भरती हैं। स्थानीय मान्यता के अनुसार यह परंपरा करीब 300 साल से चली आ रही है और पीढ़ी दर पीढ़ी इसका निर्वाह किया जा रहा है।
दुर्गा पूजा के अवसर पर मंदिर परिसर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। इन्हीं श्रद्धालुओं के बीच मुस्लिम महिलाएं भी मां दुर्गा के दरबार में पहुंचती हैं और पारंपरिक तरीके से खोइछा भरने की रस्म निभाती हैं। इस दौरान धर्म की अलग-अलग मान्यताओं के बावजूद दोनों समुदायों की महिलाएं एक साथ इस परंपरा का हिस्सा बनती हैं। मिथिला क्षेत्र में खोइछा भरने की परंपरा का विशेष महत्व है। विदाई और शुभ अवसरों पर महिलाओं द्वारा खोइछा भरने की रस्म निभाई जाती है। मधुबनी में दुर्गा पूजा के दौरान भी इसी परंपरा के तहत मां दुर्गा का खोइछा भरा जाता है। मुस्लिम महिलाएं वर्षों से इस रस्म में हिस्सा लेती आ रही हैं।
स्थानीय लोगों के मुताबिक इस परंपरा को हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों ने पीढ़ियों से संभालकर रखा है। समय बदलने के बावजूद दुर्गा पूजा के दौरान होने वाली इस रस्म में दोनों समुदायों की भागीदारी जारी है। परिवारों की नई पीढ़ी भी अपने बुजुर्गों से मिली इस परंपरा को आगे बढ़ा रही है। दुर्गा पूजा के दिनों में मंदिर में धार्मिक अनुष्ठानों के साथ इस परंपरा का भी पालन किया जाता है। मुस्लिम महिलाओं का मां दुर्गा का खोइछा भरना यहां केवल एक धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे आपसी भाईचारे और सामाजिक मेलजोल से जोड़कर देखा जाता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि त्योहारों के दौरान दोनों समुदायों के लोग एक-दूसरे की परंपराओं का सम्मान करते आए हैं। दुर्गा पूजा में मुस्लिम महिलाओं की भागीदारी इसी पुराने सामाजिक रिश्ते को दर्शाती है। करीब तीन शताब्दियों से चली आ रही इस परंपरा में अलग-अलग पीढ़ियों की महिलाएं शामिल होती रही हैं। मधुबनी मिथिला की सांस्कृतिक परंपराओं के लिए जाना जाता है। यहां पर्व और त्योहारों के दौरान कई प्राचीन रीति-रिवाज आज भी निभाए जाते हैं। दुर्गा पूजा में मुस्लिम महिलाओं द्वारा खोइछा भरने की परंपरा भी इसी सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा बनी हुई है।
इस रस्म के दौरान मां दुर्गा के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने के साथ सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना की जाती है। स्थानीय महिलाएं निर्धारित परंपरा के अनुसार पूजा में हिस्सा लेती हैं और खोइछा भरती हैं। करीब 300 वर्षों से चली आ रही यह परंपरा आज भी मधुबनी में उसी सामाजिक भावना के साथ निभाई जा रही है। दुर्गा पूजा के अवसर पर हिंदू और मुस्लिम समुदाय की महिलाओं की साझा भागीदारी यहां की सांस्कृतिक एकता और आपसी सद्भाव की पहचान बनी हुई है।
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