बिहार

बिहार में मशरूम उत्पादन को मिलेगा बढ़ावा, 61.60 लाख से बनेगी मशरूम स्पान इकाई

Rajeshwari Nishad
19 Oct 2026 12:00 AM IST
बिहार में मशरूम उत्पादन को मिलेगा बढ़ावा, 61.60 लाख से बनेगी मशरूम स्पान इकाई
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पटना। कृषि क्षेत्र में किसानों की आय बढ़ाने और खेती के नए विकल्पों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से सरकार ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत चालू वित्तीय वर्ष में मशरूम स्पान उत्पादन एवं प्रदर्शन इकाई की स्थापना को स्वीकृति प्रदान की गई है। इस परियोजना पर सरकार कुल 61 लाख 60 हजार 741 रुपये खर्च करेगी। यह इकाई भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना में स्थापित की जाएगी। इस पहल से मशरूम उत्पादन से जुड़ी तकनीकों को बढ़ावा देने और किसानों को इस क्षेत्र की संभावनाओं से परिचित कराने में मदद मिलने की उम्मीद है।
मशरूम की खेती कम जगह में की जा सकने वाली कृषि गतिविधियों में शामिल है। पारंपरिक फसलों के साथ-साथ किसान अतिरिक्त आय के लिए मशरूम उत्पादन को भी अपना सकते हैं। हालांकि, इसकी सफल खेती के लिए अच्छी गुणवत्ता वाले स्पान, उपयुक्त तापमान, नमी, स्वच्छता और वैज्ञानिक तकनीकों की जानकारी जरूरी होती है। ऐसे में मशरूम स्पान उत्पादन एवं प्रदर्शन इकाई की स्थापना को कृषि क्षेत्र में उपयोगी कदम माना जा सकता है।
राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत मिली मंजूरी
राष्ट्रीय कृषि विकास योजना का उद्देश्य कृषि और उससे जुड़े क्षेत्रों के विकास को गति देना तथा कृषि उत्पादन प्रणाली को अधिक मजबूत बनाना है। इस योजना के अंतर्गत विभिन्न कृषि गतिविधियों और तकनीकी सुविधाओं को बढ़ावा देने के लिए परियोजनाओं को सहायता दी जाती है। इसी क्रम में चालू वित्तीय वर्ष के लिए मशरूम स्पान उत्पादन एवं प्रदर्शन इकाई स्थापित करने की स्वीकृति दी गई है।
परियोजना के लिए 61,60,741 रुपये की राशि निर्धारित की गई है। इकाई की स्थापना पटना स्थित आईसीएआर के पूर्वी अनुसंधान परिसर में की जाएगी। इस संस्थान में इकाई स्थापित होने से मशरूम उत्पादन से संबंधित तकनीकी जानकारी, अनुसंधान और प्रदर्शन गतिविधियों को एक स्थान पर बढ़ावा देने का अवसर मिल सकता है।
हालांकि, परियोजना के तहत निर्माण कार्य कब शुरू होगा, इकाई कब तक तैयार होगी और इससे कितने किसानों को प्रत्यक्ष रूप से लाभ मिलेगा, इसकी विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं है। इन पहलुओं पर आगे जारी होने वाले आधिकारिक विवरण से स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
मशरूम उत्पादन में स्पान की अहम भूमिका
मशरूम की खेती में स्पान की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। स्पान को सामान्य तौर पर मशरूम का बीज कहा जाता है। इसमें मशरूम के विकास के लिए जरूरी कवक-जाल यानी मायसीलियम मौजूद होता है। किसान इसे उपयुक्त माध्यम में डालकर मशरूम उगाने की प्रक्रिया शुरू करते हैं।
अच्छी गुणवत्ता वाले स्पान का चयन मशरूम उत्पादन की सफलता के लिए महत्वपूर्ण है। यदि स्पान की गुणवत्ता खराब हो या उसमें संक्रमण हो, तो उत्पादन प्रभावित हो सकता है। इसके विपरीत, वैज्ञानिक तरीके से तैयार और उचित परिस्थितियों में संरक्षित स्पान से बेहतर उत्पादन की संभावना बढ़ सकती है।
स्पान उत्पादन इकाई स्थापित होने से इस क्षेत्र में वैज्ञानिक प्रक्रियाओं को बढ़ावा देने का अवसर मिलेगा। ऐसी इकाइयों में स्पान तैयार करने, उसकी गुणवत्ता बनाए रखने और उत्पादन से जुड़ी प्रक्रियाओं का प्रदर्शन किया जा सकता है। हालांकि, पटना में स्थापित होने वाली इकाई में कौन-कौन सी सुविधाएं उपलब्ध होंगी, इसकी विस्तृत जानकारी अभी सामने नहीं आई है।
किसानों के लिए मशरूम की खेती क्यों है महत्वपूर्ण?
मशरूम उत्पादन किसानों के लिए आय के वैकल्पिक स्रोत के रूप में उपयोगी हो सकता है। पारंपरिक खेती में मौसम, सिंचाई, भूमि की उपलब्धता और बाजार की परिस्थितियों के कारण कई चुनौतियां आती हैं। ऐसे में किसान अपनी परिस्थितियों के अनुसार मशरूम उत्पादन जैसी गतिविधियों पर विचार कर सकते हैं।
मशरूम की कुछ किस्मों की खेती सीमित स्थान में की जा सकती है। इसके लिए खेत में बड़े क्षेत्र की आवश्यकता हमेशा नहीं होती, लेकिन नियंत्रित वातावरण, स्वच्छता और तकनीकी जानकारी का ध्यान रखना जरूरी है। उत्पादन शुरू करने से पहले स्थानीय बाजार में मांग, लागत, प्रशिक्षण और बिक्री की व्यवस्था का आकलन करना भी आवश्यक है।
मशरूम की खेती से किसानों के साथ-साथ ग्रामीण युवाओं और छोटे उद्यमियों के लिए भी स्वरोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं। यदि उन्हें गुणवत्तापूर्ण स्पान और वैज्ञानिक तकनीक तक पहुंच मिलती है, तो वे इस गतिविधि को व्यवस्थित रूप से अपनाने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।
प्रदर्शन इकाई से तकनीकी जानकारी को मिल सकता है बढ़ावा
मशरूम स्पान उत्पादन के साथ प्रदर्शन इकाई स्थापित करने का उद्देश्य तकनीकी प्रक्रियाओं को समझने और उनका व्यावहारिक प्रदर्शन करने का अवसर उपलब्ध कराना हो सकता है। कृषि क्षेत्र में प्रदर्शन गतिविधियां किसानों को नई तकनीकों के बारे में जानकारी देने का एक महत्वपूर्ण माध्यम हैं।
आईसीएआर के पूर्वी अनुसंधान परिसर में इस इकाई की स्थापना से मशरूम उत्पादन से संबंधित वैज्ञानिक जानकारी को किसानों और कृषि क्षेत्र से जुड़े लोगों तक पहुंचाने की संभावनाएं बन सकती हैं। इससे स्पान की गुणवत्ता, उत्पादन की प्रक्रिया और खेती के लिए जरूरी परिस्थितियों के बारे में जागरूकता बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
हालांकि, इकाई के माध्यम से प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे या किसानों को स्पान उपलब्ध कराया जाएगा, इस संबंध में अभी आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं है। इसलिए इसके वास्तविक लाभों का आकलन इकाई के संचालन और निर्धारित गतिविधियों के स्पष्ट होने के बाद ही किया जा सकेगा।
कृषि क्षेत्र में विविधीकरण की दिशा में पहल
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, खेती में विविधीकरण किसानों को आय के नए विकल्प तलाशने में मदद कर सकता है। मशरूम उत्पादन भी ऐसी ही गतिविधियों में शामिल है, लेकिन इसकी सफलता के लिए बाजार की मांग, उत्पादन लागत, गुणवत्ता और बिक्री व्यवस्था पर ध्यान देना जरूरी है।
पटना में मशरूम स्पान उत्पादन एवं प्रदर्शन इकाई की स्थापना के लिए स्वीकृत 61.60 लाख रुपये की राशि इस क्षेत्र में बुनियादी सुविधाएं विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। यदि इकाई के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण स्पान, वैज्ञानिक तकनीक और प्रदर्शन गतिविधियों को प्रभावी ढंग से बढ़ावा मिलता है, तो इससे मशरूम उत्पादन को प्रोत्साहन मिल सकता है।
कुल मिलाकर, राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत मिली यह स्वीकृति मशरूम उत्पादन से जुड़ी सुविधाओं के विकास की दिशा में अहम पहल है। अब परियोजना के क्रियान्वयन, इकाई की सुविधाओं और किसानों तक इसके लाभ पहुंचाने की व्यवस्था पर नजर रहेगी।
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