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पश्चिमी चंपारण के किसानों को सिखाई गई मल्टी लेयर खेती
Bihar : बिहार के पश्चिमी चंपारण जिले में किसानों की आय बढ़ाने और खेती को अधिक लाभकारी बनाने के उद्देश्य से 'मल्टी लेयर फार्मिंग' (Multi Layer Farming) मॉडल की जानकारी दी गई। कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को बताया कि सीमित भूमि में वैज्ञानिक तरीके से विभिन्न फसलों की एक साथ खेती कर उत्पादन और आमदनी को तीन गुना तक बढ़ाया जा सकता है।
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर आधुनिक, टिकाऊ और अधिक लाभदायक कृषि पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रेरित करना है।
क्या है मल्टी लेयर खेती?
मल्टी लेयर फार्मिंग ऐसी कृषि पद्धति है जिसमें एक ही खेत में अलग-अलग ऊंचाई और परतों पर उगने वाली फसलों की एक साथ खेती की जाती है। इस तकनीक में उपलब्ध भूमि, धूप, पानी और पोषक तत्वों का अधिकतम उपयोग किया जाता है।
इस मॉडल में आमतौर पर—
ऊपरी स्तर पर फलदार या लंबे पौधे।
मध्यम स्तर पर सब्जियां या झाड़ीदार फसलें।
निचले स्तर पर पत्तेदार सब्जियां या कम ऊंचाई वाली फसलें।
जमीन के भीतर उगने वाली कंद फसलें भी शामिल की जा सकती हैं।
इस प्रकार एक ही खेत से कई प्रकार की उपज प्राप्त होती है।
तीन गुना तक बढ़ सकती है आय
कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार यदि किसान मल्टी लेयर मॉडल को सही तकनीक के साथ अपनाते हैं, तो प्रति इकाई क्षेत्र से उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है। इससे किसानों को एक ही मौसम में कई फसलों से आय प्राप्त होती है, जिससे कुल आमदनी पारंपरिक खेती की तुलना में काफी अधिक हो सकती है।
विशेषज्ञों ने बताया कि फसलों का सही चयन, उचित दूरी, सिंचाई और पोषक तत्वों का वैज्ञानिक प्रबंधन इस मॉडल की सफलता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
कम जमीन में अधिक उत्पादन
मल्टी लेयर खेती की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें सीमित भूमि का भी अधिकतम उपयोग किया जा सकता है। छोटे और सीमांत किसानों के लिए यह तकनीक विशेष रूप से लाभदायक मानी जाती है।
इस मॉडल के माध्यम से—
भूमि का बेहतर उपयोग होता है।
एक साथ कई फसलों का उत्पादन मिलता है।
आय के कई स्रोत बनते हैं।
मौसम संबंधी जोखिम कम होता है।
पूरे वर्ष खेती से आमदनी संभव होती है।
किसानों को दी गई वैज्ञानिक जानकारी
प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को विभिन्न विषयों पर विस्तृत जानकारी दी, जिनमें शामिल हैं—
मल्टी लेयर फार्मिंग की योजना।
उपयुक्त फसलों का चयन।
पौधों की दूरी और रोपण तकनीक।
ड्रिप सिंचाई और जल प्रबंधन।
जैविक खाद एवं पोषक तत्व प्रबंधन।
कीट एवं रोग नियंत्रण।
फसल कटाई और विपणन।
किसानों को सफल मॉडलों के उदाहरण भी बताए गए ताकि वे इस तकनीक को आसानी से समझ सकें।
जोखिम होगा कम
एकल फसल की तुलना में मल्टी लेयर खेती में जोखिम अपेक्षाकृत कम रहता है। यदि किसी कारणवश एक फसल प्रभावित होती है, तो अन्य फसलों से किसानों को आय मिलती रहती है। इससे प्राकृतिक आपदाओं, बाजार मूल्य में उतार-चढ़ाव और मौसम की अनिश्चितता का प्रभाव भी कम होता है।
पर्यावरण के लिए भी लाभकारी
विशेषज्ञों का कहना है कि मल्टी लेयर फार्मिंग पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से भी उपयोगी है। विभिन्न प्रकार की फसलों के कारण जैव विविधता बढ़ती है, मिट्टी की गुणवत्ता बनी रहती है और रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम की जा सकती है।
यदि इसे जैविक खेती के साथ जोड़ा जाए, तो उत्पादन की गुणवत्ता और बाजार मूल्य दोनों में वृद्धि की संभावना रहती है।
बाजार से जुड़ने पर मिलेगा अधिक लाभ
कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी कि वे उत्पादन के साथ-साथ विपणन पर भी ध्यान दें। यदि किसान समूह बनाकर सीधे बाजार, किसान उत्पादक संगठन (FPO) या खुदरा विक्रेताओं से जुड़ते हैं, तो उन्हें अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिल सकता है।
प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन से भी अतिरिक्त आय अर्जित की जा सकती है।
कृषि विभाग देगा सहयोग
कृषि विभाग ने किसानों को भरोसा दिलाया कि आधुनिक खेती अपनाने वाले किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन, प्रशिक्षण और विभिन्न सरकारी योजनाओं की जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी। विभाग का उद्देश्य जिले में आधुनिक कृषि तकनीकों का विस्तार करना और किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाना है।
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