
बक्सर। पिता की इच्छा थी कि बेटा पढ़-लिखकर सरकारी नौकरी हासिल करे और परिवार का नाम रोशन करे। लेकिन कारोबारी परिवार में पले-बढ़े स्वयं प्रकाश के मन में कुछ अलग करने का सपना था। उन्होंने नौकरी की तलाश में समय बिताने के बजाय बाजार की जरूरत को समझा और स्वरोजगार का रास्ता चुना।
आज स्वयं प्रकाश का बेकरी उत्पादों का कारोबार न केवल उनकी आत्मनिर्भरता की कहानी बता रहा है, बल्कि कई अन्य लोगों के लिए रोजगार का माध्यम भी बन चुका है। प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP) के तहत मिली 10 लाख रुपये की वित्तीय सहायता ने उनके सपने को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
नौकरी के बजाय चुना उद्यम का रास्ता
स्वयं प्रकाश बताते हैं कि उनके पिता चाहते थे कि वह अच्छी शिक्षा हासिल करने के बाद सरकारी नौकरी करें। परिवार की भी यही उम्मीद थी कि बेटा एक सुरक्षित करियर चुने।
हालांकि, स्वयं प्रकाश का झुकाव शुरू से ही व्यापार की ओर था। उन्होंने महसूस किया कि आज के समय में स्वरोजगार के जरिए भी बेहतर भविष्य बनाया जा सकता है। उन्होंने बाजार की मांग को समझते हुए बेकरी उत्पादों के क्षेत्र में काम शुरू करने का फैसला किया।
उनका मानना था कि यदि मेहनत, सही योजना और अवसर का उपयोग किया जाए तो अपना व्यवसाय खड़ा किया जा सकता है।
PMEGP योजना बनी सहारा
कारोबार शुरू करने के लिए सबसे बड़ी चुनौती पूंजी की थी। इसी दौरान उन्हें प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP) के बारे में जानकारी मिली।
इस योजना के तहत उन्हें 10 लाख रुपये की वित्तीय सहायता मिली। इस आर्थिक सहयोग से उन्होंने बेकरी यूनिट स्थापित की और अपने कारोबार को धीरे-धीरे आगे बढ़ाना शुरू किया।
PMEGP जैसी योजनाएं उन युवाओं के लिए मददगार साबित हो रही हैं, जो अपना व्यवसाय शुरू करना चाहते हैं लेकिन शुरुआती पूंजी की कमी के कारण कदम नहीं उठा पाते।
बेकरी उत्पादों की बढ़ी मांग
स्वयं प्रकाश ने बाजार की जरूरत को ध्यान में रखते हुए बेकरी उत्पादों का निर्माण शुरू किया। धीरे-धीरे उनके उत्पादों की मांग बढ़ने लगी और कारोबार ने गति पकड़ ली।
उन्होंने गुणवत्ता और ग्राहकों की पसंद को प्राथमिकता दी। इसका फायदा यह हुआ कि उनका कारोबार स्थानीय स्तर पर पहचान बनाने लगा।
आज उनकी इकाई में विभिन्न प्रकार के बेकरी उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं, जिनकी बिक्री से उन्हें अच्छी आय प्राप्त हो रही है।
सात लोगों को मिला रोजगार
स्वयं प्रकाश की सफलता केवल उनके व्यक्तिगत विकास तक सीमित नहीं है। उनकी बेकरी यूनिट अब सात लोगों के लिए रोजगार का जरिया बन चुकी है।
उन्होंने बताया कि कारोबार बढ़ने के साथ कर्मचारियों की जरूरत बढ़ी और कई लोगों को काम का अवसर मिला। इस तरह उनका छोटा प्रयास अब रोजगार सृजन की दिशा में भी योगदान दे रहा है।
युवाओं के लिए प्रेरणा बनी कहानी
स्वयं प्रकाश की कहानी उन युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो रोजगार की तलाश में केवल सरकारी नौकरी पर निर्भर रहते हैं। उनका मानना है कि आज के समय में युवाओं को अपनी रुचि और क्षमता के अनुसार स्वरोजगार के विकल्पों पर भी विचार करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि सरकारी योजनाओं की मदद से छोटे स्तर से शुरुआत कर बड़े मुकाम तक पहुंचा जा सकता है।
मेहनत और सही योजना से मिली सफलता
स्वयं प्रकाश की सफलता के पीछे उनकी मेहनत, बाजार की समझ और सही समय पर मिले आर्थिक सहयोग की अहम भूमिका रही। उन्होंने शुरुआत में आने वाली चुनौतियों का सामना किया और धीरे-धीरे अपने कारोबार को मजबूत बनाया।
उन्होंने कहा कि किसी भी व्यवसाय में धैर्य और लगातार प्रयास जरूरी होता है। शुरुआत में मुश्किलें आती हैं, लेकिन सही दिशा में मेहनत करने से सफलता जरूर मिलती है।
आत्मनिर्भर भारत की दिशा में योगदान
स्वयं प्रकाश का कारोबार आत्मनिर्भर भारत की सोच को भी मजबूत करता है। छोटे उद्यमों के माध्यम से न केवल लोगों को रोजगार मिलता है, बल्कि स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलता है।
PMEGP जैसी योजनाएं युवाओं और छोटे कारोबारियों को आगे बढ़ने का अवसर प्रदान कर रही हैं।
सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने की अपील
स्वयं प्रकाश ने युवाओं से अपील की कि वे सरकारी योजनाओं की जानकारी लें और उनका लाभ उठाएं। उन्होंने कहा कि यदि मन में कुछ करने का जुनून हो तो संसाधनों की कमी रास्ता नहीं रोक सकती।
आज स्वयं प्रकाश की बेकरी इकाई उनकी मेहनत और आत्मविश्वास की पहचान बन चुकी है। जिस बेटे से पिता सरकारी नौकरी की उम्मीद कर रहे थे, उसने अपने फैसले से न सिर्फ खुद को आत्मनिर्भर बनाया, बल्कि दूसरों को भी रोजगार देने वाला बन गया।





