बिहार

मोतिहारी: अस्पताल में कबाड़ के कार्टन के सहारे टूटा पैर, वीडियो वायरल

Saba Naaz
26 Jun 2026 7:11 PM IST
मोतिहारी: अस्पताल में कबाड़ के कार्टन के सहारे टूटा पैर, वीडियो वायरल
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Bihar: मोतिहारी (पूर्वी चंपारण)। बिहार की बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था की एक बेहद चिंताजनक और शर्मनाक तस्वीर मोतिहारी जिले से सामने आई है। यहाँ के सुगौली सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में एक भीषण सड़क हादसे के बाद लाए गए गंभीर रूप से घायल मरीजों के इलाज के दौरान अस्पताल प्रशासन की भारी लापरवाही उजागर हुई। अस्पताल में टूटी हुई हड्डी को स्थिर रखने के लिए इस्तेमाल होने वाला बुनियादी उपकरण 'स्प्लिंट' तक उपलब्ध नहीं था। आरोप है कि इसके अभाव में डॉक्टरों को मजबूरी में कबाड़ में पड़े गत्ते (कार्डबोर्ड के कार्टन) को काटकर मरीज के टूटे पैर पर बांधना पड़ा और उसी के ऊपर पट्टी लपेटनी पड़ी। इस घटना की तस्वीर और वीडियो सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है।

भीषण सड़क हादसे के बाद अस्पताल लाए गए थे घायल

मिली जानकारी के अनुसार, पूरा मामला सुगौली थाना क्षेत्र का है, जहाँ एक टेंपो और पिकअप वैन के बीच आमने-सामने की जोरदार टक्कर हो गई। इस दर्दनाक हादसे में चार लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि चार अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। स्थानीय लोगों और पुलिस की मदद से सभी घायलों को तुरंत प्राथमिक उपचार के लिए नजदीकी सुगौली सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में भर्ती कराया गया। आपातकालीन वार्ड में ड्यूटी पर तैनात चिकित्सकों ने जब मरीजों की जांच की, तो पाया कि दो घायलों के पैर बुरी तरह टूट चुके हैं और उनमें गंभीर फ्रैक्चर है।

स्प्लिंट गायब, गत्ते के डिब्बे से बांधा पैर

चिकित्सा विज्ञान के नियमों के अनुसार, पैर या हाथ में फ्रैक्चर होने पर हड्डी को और अधिक नुकसान से बचाने और उसे स्थिर रखने के लिए तुरंत प्लास्टर से पहले 'स्प्लिंट' (लकड़ी या फाइबर की पट्टी) लगाई जाती है। लेकिन पीड़ित परिजनों का आरोप है कि जब उन्होंने डॉक्टरों से स्प्लिंट लगाने को कहा, तो अस्पताल के कर्मचारियों ने साफ कह दिया कि स्टोर में स्प्लिंट उपलब्ध नहीं है। परिजनों का आरोप: प्रत्यक्षदर्शियों और परिजनों ने बताया कि अस्पताल में बुनियादी आपातकालीन सुविधाओं का घोर अभाव था। स्प्लिंट न होने की दशा में डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों ने जुगाड़ तकनीक अपनाई। उन्होंने अस्पताल परिसर में ही कबाड़ में फेंके गए दवाओं के खाली कार्टन (कार्डबोर्ड) को उठाया, उसे पैर के आकार में काटा और मरीज के टूटे पैर के दोनों तरफ लगाकर सूती पट्टी से बांध दिया।

सिविल सर्जन ने कहा— 'लापरवाही बर्दाश्त नहीं, दोषियों पर होगी कार्रवाई'

अस्पताल के इस 'कार्टन वाले इलाज' की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद जिला प्रशासन और स्वास्थ्य महकमे की जमकर किरकिरी हो रही है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पूर्वी चंपारण के सिविल सर्जन डॉ. दिलीप कुमार ने तत्काल कड़ा संज्ञान लिया है। सिविल सर्जन ने आधिकारिक बयान जारी करते हुए कहा कि प्रथम दृष्टया यह मामला मरीजों के इलाज में गंभीर लापरवाही और अस्पताल प्रबंधन की विफलता को दर्शाता है, जिसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने बताया कि वह खुद इस पूरे मामले की हकीकत जानने के लिए सुगौली सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के औचक निरीक्षण के लिए रवाना हो चुके हैं। सिविल सर्जन ने स्पष्ट किया कि स्टोर में आवश्यक दवाओं और उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित करना प्रभारी की जिम्मेदारी है। जांच रिपोर्ट आते ही जो भी अधिकारी या स्वास्थ्य कर्मी इसके लिए जिम्मेदार पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त विभागीय और अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

सरकारी दावों और जमीनी हकीकत पर उठे सवाल

इस घटना ने बिहार सरकार और स्वास्थ्य विभाग के उन दावों की पोल खोलकर रख दी है, जिसमें जमीनी स्तर पर बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने की बात कही जाती है। स्थानीय ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस पर गहरा आक्रोश व्यक्त किया है। लोगों का कहना है कि जब जिला मुख्यालय से सटे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों का यह हाल है, जहाँ एक अदद स्प्लिंट तक नसीब नहीं है, तो सुदूर ग्रामीण इलाकों के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की स्थिति की कल्पना ही की जा सकती है। स्थानीय जनता ने मांग की है कि केवल जांच का नाटक न किया जाए, बल्कि अस्पताल में तुरंत सभी आवश्यक जीवन रक्षक उपकरण और दवाएं उपलब्ध कराई जाएं।

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