
दरभंगा। ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय (LNMU) ने छात्रों को बेहतर रोजगार अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की है। विश्वविद्यालय के अधीन चार प्रमुख अंगीभूत महाविद्यालयों में अब अप्रेंटिसशिप एम्बेडेड डिग्री प्रोग्राम शुरू किया जाएगा। इस कार्यक्रम के तहत छात्रों को पारंपरिक डिग्री शिक्षा के साथ-साथ उद्योगों में व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया जाएगा, जिससे उनकी रोजगार क्षमता बढ़ सकेगी।
इस नई पहल के लिए ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय और व्यावहारिक प्रशिक्षण बोर्ड (पूर्वी क्षेत्र), कोलकाता के बीच समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। विश्वविद्यालय मुख्यालय में शुक्रवार को आयोजित कार्यक्रम में इस समझौते को अंतिम रूप दिया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. संजय कुमार चौधरी ने की।
इस अवसर पर बिहार शिक्षा विभाग के पूर्व सचिव और वर्तमान में सीआरआईएसपी के अध्यक्ष बैद्यनाथ यादव तथा बीओपीटी के निदेशक डॉ. एसएम एजाज अहमद सहित कई अधिकारी और शिक्षक मौजूद रहे।
समझौते के अनुसार, इस कार्यक्रम में नामांकित छात्र-छात्राओं को अपनी नियमित डिग्री की पढ़ाई के साथ-साथ उद्योगों में ऑन-द-जॉब ट्रेनिंग यानी काम के दौरान व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त करने का अवसर मिलेगा। इससे छात्रों को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं रहना पड़ेगा, बल्कि वे वास्तविक कार्य वातावरण को समझ सकेंगे और नौकरी के लिए आवश्यक कौशल विकसित कर पाएंगे।
विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि मौजूदा समय में उच्च शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री प्रदान करना नहीं, बल्कि युवाओं को आत्मनिर्भर और कुशल बनाना भी है। उद्योगों की जरूरतों के अनुसार तैयार किए गए पाठ्यक्रमों से छात्रों को रोजगार पाने में आसानी होगी और वे बदलते कार्यक्षेत्र की चुनौतियों का सामना बेहतर तरीके से कर सकेंगे।
कुलपति प्रो. संजय कुमार चौधरी ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि आज के दौर में शिक्षा व्यवस्था को रोजगार से जोड़ना जरूरी है। विद्यार्थियों को ऐसी शिक्षा मिलनी चाहिए, जिससे वे पढ़ाई पूरी करने के बाद नौकरी के लिए तैयार हो सकें। अप्रेंटिसशिप एम्बेडेड डिग्री प्रोग्राम इसी उद्देश्य को पूरा करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय लगातार ऐसे प्रयास कर रहा है, जिससे छात्रों को आधुनिक कौशल और व्यावहारिक अनुभव मिल सके। उद्योग आधारित प्रशिक्षण से विद्यार्थियों का आत्मविश्वास बढ़ेगा और वे अपने करियर में बेहतर अवसर प्राप्त कर सकेंगे।
सीआरआईएसपी के अध्यक्ष बैद्यनाथ यादव ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि यह समझौता बिहार में उच्च शिक्षा को रोजगारपरक बनाने की दिशा में एक दूरदर्शी कदम है। उन्होंने कहा कि इस तरह के कार्यक्रम छात्रों को शिक्षा और रोजगार के बीच की दूरी को कम करने में मदद करेंगे।
बीओपीटी के निदेशक डॉ. एसएम एजाज अहमद ने भी कहा कि अप्रेंटिसशिप आधारित शिक्षा प्रणाली से छात्रों को उद्योगों की कार्यप्रणाली समझने का मौका मिलेगा। इससे वे पढ़ाई पूरी करने के बाद सीधे रोजगार के लिए तैयार हो सकेंगे।
विश्वविद्यालय के चार अंगीभूत महाविद्यालयों में शुरू होने वाला यह कार्यक्रम छात्रों के लिए एक नया अवसर लेकर आएगा। इसमें शिक्षा के साथ कौशल विकास और कार्य अनुभव को जोड़ा गया है। इससे विद्यार्थियों को बेहतर करियर विकल्प मिलेंगे और उच्च शिक्षा का स्वरूप भी अधिक व्यावहारिक बनेगा।
LNMU की यह पहल बिहार के उच्च शिक्षा क्षेत्र में एक नई दिशा देने वाली मानी जा रही है। आने वाले समय में ऐसे रोजगारपरक पाठ्यक्रमों के विस्तार से अधिक से अधिक छात्रों को लाभ मिलने की उम्मीद है।





