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बिहार में पटाखा फैक्ट्री में भीषण विस्फोट, चार घंटे तक धमाकों से दहला गांव

Kavita2
24 Oct 2026 10:37 AM IST
बिहार में पटाखा फैक्ट्री में भीषण विस्फोट, चार घंटे तक धमाकों से दहला गांव
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सीवान। बिहार के सीवान जिले में शुक्रवार शाम एक मकान में पटाखा निर्माण के दौरान हुए भीषण विस्फोट ने पूरे इलाके में दहशत फैला दी। जामो बाजार थाना क्षेत्र के आलमपुर गांव में हुए धमाके इतने जोरदार थे कि आसपास के लोग घरों से बाहर निकल आए। विस्फोट के बाद मकान का बड़ा हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया और मलबा आसपास तक फैल गया। सबसे भयावह स्थिति तब पैदा हुई, जब शुरुआती धमाके के बाद भी मकान में रखे पटाखों में लगातार विस्फोट होते रहे। करीब चार घंटे तक रुक-रुककर धमाकों की आवाज सुनाई देती रही, जिससे राहत और बचाव कार्य में जुटी टीमों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा।

इस हादसे में सात लोगों की मौत होने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि, शुक्रवार देर रात जारी पुलिस की आधिकारिक जानकारी में तीन लोगों की मौत की पुष्टि की गई थी। कुछ अन्य रिपोर्टों में पुलिस अधीक्षक के हवाले से पांच मौतों की जानकारी भी सामने आई है। ऐसे में मृतकों की अंतिम संख्या को लेकर स्थिति स्पष्ट होने का इंतजार है।

शाम साढ़े पांच बजे हुआ जोरदार धमाका

जानकारी के अनुसार, शुक्रवार 23 अक्टूबर को शाम करीब साढ़े पांच बजे आलमपुर गांव के एक मकान में पटाखे बनाए जा रहे थे। इसी दौरान अचानक जोरदार विस्फोट हो गया। धमाका इतना शक्तिशाली था कि मकान की छत और दीवारों को भारी नुकसान पहुंचा।

धमाके की आवाज सुनकर ग्रामीण घटनास्थल की ओर दौड़े। वहां धुआं, आग और बिखरा मलबा देखकर लोगों में अफरातफरी मच गई।

बताया जा रहा है कि मकान के भीतर बड़ी मात्रा में पटाखे और आतिशबाजी से जुड़ी सामग्री रखी हुई थी। शुरुआती विस्फोट के बाद आग दूसरे पटाखों तक पहुंच गई, जिससे लगातार धमाके होने लगे।

घटना की सूचना तत्काल स्थानीय पुलिस और जिला प्रशासन को दी गई। इसके बाद पुलिस, अग्निशमन विभाग और अन्य राहत-बचाव टीमें घटनास्थल पर पहुंचीं।

चार घंटे तक होते रहे धमाके, बचाव कार्य में आई बाधा

हादसे के बाद सबसे बड़ी चुनौती घटनास्थल पर लगातार हो रहे विस्फोट थे। बचावकर्मियों को आशंका थी कि मकान के भीतर अभी भी विस्फोटक सामग्री मौजूद हो सकती है।

इस कारण मलबे में दबे लोगों को निकालने के दौरान अतिरिक्त सावधानी बरतनी पड़ी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, शुरुआती धमाके के बाद कई घंटों तक रुक-रुककर विस्फोट होते रहे।

दमकलकर्मियों ने आग पर नियंत्रण पाने की कोशिश की, जबकि पुलिस ने आसपास के लोगों को घटनास्थल से सुरक्षित दूरी पर रहने के लिए कहा।

लगातार धमाकों के कारण राहत और बचाव अभियान की गति प्रभावित हुई। मलबे में अन्य लोगों के दबे होने की आशंका के चलते टीमें सावधानीपूर्वक तलाशी अभियान चलाती रहीं।

सात मौतों की आशंका, आंकड़ों को लेकर अलग-अलग दावे

इस हादसे में मृतकों की संख्या को लेकर अलग-अलग जानकारियां सामने आई हैं। स्थानीय स्तर पर सात लोगों की मौत होने की बात कही जा रही है।

वहीं, शुक्रवार देर रात पुलिस की ओर से जारी जानकारी में मेडिकल टीम द्वारा तीन लोगों की मौत की पुष्टि करने की बात कही गई।

कुछ समाचार रिपोर्टों में पांच लोगों की मौत की पुष्टि का उल्लेख किया गया है। ऐसे में सात मौतों के आंकड़े को फिलहाल अंतिम आधिकारिक संख्या नहीं माना जा सकता।

प्रशासन के सामने प्राथमिक चुनौती मृतकों की पहचान सुनिश्चित करने, घायलों को उपचार उपलब्ध कराने और घटनास्थल पर फंसे लोगों की तलाश पूरी करने की रही।

अधिकारियों के अनुसार, घटनास्थल की जांच और बचाव अभियान के निष्कर्षों के आधार पर मृतकों तथा घायलों के संबंध में आगे की जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी।

घटनास्थल पहुंचे डीएम और एसपी

हादसे की जानकारी मिलने के बाद सीवान के जिलाधिकारी विजय प्रकाश मीणा और पुलिस अधीक्षक भरत सोनी घटनास्थल पर पहुंचे।

अधिकारियों ने राहत और बचाव कार्यों की निगरानी की तथा संबंधित विभागों को आवश्यक निर्देश दिए।

जिलाधिकारी ने बताया कि घटनास्थल पर अग्निशमन विभाग, मेडिकल टीम और अन्य संबंधित एजेंसियों को लगाया गया है। प्राथमिकता मलबे में फंसे लोगों की तलाश करना और घायलों को समय पर उपचार उपलब्ध कराना है।

प्रशासन ने घटनास्थल पर सुरक्षा व्यवस्था भी बढ़ाई, ताकि अनावश्यक भीड़ के कारण बचाव कार्य प्रभावित न हो।

थानाध्यक्ष और चौकीदार को किया गया निलंबित

विस्फोट के बाद पुलिस प्रशासन ने लापरवाही के आरोप में बड़ी कार्रवाई की है। जामो बाजार थाने के थानाध्यक्ष और स्थानीय चौकीदार चंद्रिका मांझी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।

यह कार्रवाई थाना स्तर पर कथित लापरवाही सामने आने के बाद की गई है।

इसके साथ ही महाराजगंज के अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी के नेतृत्व में विशेष जांच टीम गठित करने का निर्देश दिया गया है।

पुलिस ने मामले में प्रारंभिक प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। महाराजगंज के सर्किल इंस्पेक्टर को मामले का अनुसंधान अधिकारी बनाया गया है।

फोरेंसिक टीम जुटाएगी विस्फोट के सबूत

घटनास्थल की वैज्ञानिक जांच के लिए विधि विज्ञान प्रयोगशाला की टीम को भी बुलाया गया है।

फोरेंसिक विशेषज्ञ घटनास्थल से साक्ष्य जुटाकर यह पता लगाने का प्रयास करेंगे कि विस्फोट किन परिस्थितियों में हुआ और वहां किस प्रकार की सामग्री रखी गई थी।

पुलिस यह भी जांच करेगी कि मकान में पटाखा निर्माण या भंडारण के लिए आवश्यक वैध अनुमति थी या नहीं।

इसके अलावा यह पता लगाया जाएगा कि संबंधित स्थान पर सुरक्षा संबंधी नियमों का पालन किया जा रहा था या नहीं।

फोरेंसिक जांच के निष्कर्षों और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

गांव में पटाखा निर्माण की गतिविधियों पर उठे सवाल

आलमपुर गांव में हुए इस विस्फोट के बाद अवैध पटाखा निर्माण और भंडारण को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।

रिपोर्टों के अनुसार, गांव के कई मकानों में पटाखा निर्माण से जुड़ी गतिविधियां संचालित होने की जानकारी सामने आई है।

जिस मकान में विस्फोट हुआ, वह मोहम्मद अमरुद्दीन मियां से संबंधित बताया गया है। हालांकि, वहां पटाखा निर्माण की कानूनी अनुमति होने या नहीं होने की जांच जारी है।

इस घटना ने आबादी वाले क्षेत्रों में ज्वलनशील और विस्फोटक सामग्री के असुरक्षित भंडारण से जुड़े खतरों को उजागर किया है।

पूरे जिले में छापेमारी अभियान चलाने का फैसला

विस्फोट के बाद जिला प्रशासन ने अवैध पटाखा निर्माण, भंडारण और बिक्री के खिलाफ सख्त अभियान चलाने का निर्णय लिया है।

शनिवार से जिले के संदिग्ध ठिकानों पर छापेमारी करने और अवैध गतिविधियों में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने की योजना बनाई गई है।

प्रशासन का उद्देश्य ऐसे स्थानों की पहचान करना है, जहां नियमों का उल्लंघन करके पटाखे तैयार किए जा रहे हैं या उनका भंडारण किया गया है।

इसके साथ ही संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी और निगरानी व्यवस्था की भी समीक्षा की जा सकती है।

हादसे के बाद गांव में दहशत का माहौल

आलमपुर गांव में हुए इस भीषण हादसे के बाद स्थानीय लोगों में भय और चिंता का माहौल है। लगातार धमाकों और मकान के क्षतिग्रस्त होने से आसपास रहने वाले परिवारों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठे हैं।

ग्रामीणों के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि आबादी के बीच पटाखा निर्माण जैसी जोखिमपूर्ण गतिविधियां किस तरह संचालित हो रही थीं और जिम्मेदार विभागों को इसकी जानकारी थी या नहीं।

फिलहाल पुलिस और प्रशासन घटना के कारणों की जांच कर रहे हैं। राहत और बचाव कार्य तथा वैज्ञानिक जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही हादसे की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।

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