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मखाना बना समृद्धि की चाबी
कटिहार: बिहार के कटिहार जिले में मखाना अब केवल पारंपरिक खेती तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का महत्वपूर्ण जरिया बनता जा रहा है। जिले के मखदुमपुर इलाके में मखाने की प्रोसेसिंग से जुड़े घरेलू कार्यों और छोटे कारोबारों को लेकर नई संभावनाएं सामने आ रही हैं। मखाने की बढ़ती मांग के कारण किसानों, मजदूरों और छोटे व्यापारियों को अपनी आमदनी बढ़ाने के अवसर मिल रहे हैं। वहीं ऑनलाइन कारोबार और विदेशी बाजारों तक पहुंच बनाने की पहल से स्थानीय उत्पादों की पहचान भी बढ़ रही है।
मखाना बिहार के सीमांचल और मिथिलांचल क्षेत्रों की प्रमुख कृषि उपज में शामिल है। कटिहार में बड़ी संख्या में किसान मखाने की खेती और इससे जुड़े व्यवसाय पर निर्भर हैं। पहले अधिकांश किसान कच्चे मखाने की बिक्री तक सीमित रहते थे, लेकिन अब प्रोसेसिंग, पैकेजिंग और मखाने से तैयार खाद्य उत्पादों के जरिए अधिक मूल्य प्राप्त करने की दिशा में काम हो रहा है। मखदुमपुर जैसे ग्रामीण क्षेत्रों में मखाने की प्रोसेसिंग रोजगार का महत्वपूर्ण माध्यम बन सकती है। मखाने को तैयार करने में सफाई, सुखाने, गर्म करने, फोड़ने, छंटाई और पैकिंग जैसे कई चरण शामिल होते हैं। इन गतिविधियों में स्थानीय स्तर पर श्रमिकों की भागीदारी रहती है। घरेलू स्तर पर छोटे प्रसंस्करण कार्यों से भी अतिरिक्त आमदनी की संभावनाएं बढ़ती हैं।
कटिहार जिले में मखाने को स्थानीय बाजार से निकालकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने की पहल तेज हुई है। अगस्त 2026 में जिला कृषि विभाग ने मखाना और इससे बने उत्पादों को अमेजन तथा फ्लिपकार्ट जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से जोड़ने के लिए पंजीकरण प्रक्रिया शुरू की थी। इसका उद्देश्य किसानों और छोटे उद्यमियों को बड़े बाजारों तक पहुंच उपलब्ध कराना है। मखाने से अब केवल साधारण भुने हुए उत्पाद ही नहीं, बल्कि विभिन्न प्रकार की मिठाइयां और खाद्य सामग्री भी तैयार की जा रही हैं। कटिहार में मखाना ठेकुआ, जलेबी, खीर, पेड़ा और रस मलाई जैसे उत्पादों को बढ़ावा दिया जा रहा है। इन उत्पादों की बिक्री स्थानीय बाजारों के साथ ऑनलाइन माध्यम से करने की कोशिश की जा रही है।
जिला कृषि विभाग ने मखाना उत्पादकों को प्रशिक्षण देकर गुणवत्तापूर्ण उत्पादन और मूल्य संवर्धन पर भी जोर दिया है। जुलाई 2026 में आयोजित कार्यक्रम में किसानों और किसान उत्पादक संगठनों को आधुनिक तकनीक तथा बेहतर मार्केटिंग के बारे में जानकारी दी गई थी। विभाग ने मखाने से तैयार विभिन्न खाद्य उत्पादों के लिए बिक्री केंद्र विकसित करने की पहल भी की है।
कटिहार के मखाने की मांग विदेशी बाजारों में भी बढ़ रही है। मई 2026 में जिले से अमेरिका के लिए मखाने की खेप भेजे जाने की जानकारी सामने आई थी। कनाडा सहित अन्य देशों में भी मखाना उत्पादों के लिए कारोबारी संपर्क बढ़ाने की कोशिश की गई। इससे स्थानीय किसानों और उद्यमियों के सामने निर्यात के नए अवसर खुल रहे हैं। मखाना कारोबार का विस्तार ग्रामीण महिलाओं और युवाओं के लिए भी उपयोगी साबित हो सकता है। विशेष रूप से पैकेजिंग, छंटाई, उत्पाद निर्माण और ऑनलाइन बिक्री जैसे क्षेत्रों में स्वरोजगार की संभावनाएं मौजूद हैं। यदि छोटे उत्पादकों को प्रशिक्षण, पूंजी और बाजार की सुविधा मिले तो वे अपने कारोबार को आगे बढ़ा सकते हैं।
हालांकि मखाना प्रोसेसिंग के विस्तार के लिए आधुनिक उपकरणों, गुणवत्ता नियंत्रण, उचित भंडारण और बेहतर परिवहन सुविधाओं की जरूरत है। छोटे कारोबारियों के सामने पूंजी और बाजार तक सीधी पहुंच जैसी चुनौतियां भी बनी हुई हैं। कटिहार का मखाना अब खेती से आगे बढ़कर प्रसंस्करण, स्वरोजगार और निर्यात की नई संभावनाएं पैदा कर रहा है। मखदुमपुर में घरेलू प्रोसेसिंग से होने वाली वास्तविक आय और इसमें जुड़े परिवारों की संख्या के अलग आधिकारिक आंकड़े अभी स्पष्ट नहीं हैं, लेकिन जिले में बढ़ता मखाना कारोबार ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण अवसर बन रहा है।
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