बिहार

DRI और STF की बड़ी सफलता,10 करोड़ की चरस के साथ तस्कर गिरफ्तार

Rajeshwari Nishad
6 Nov 2026 9:40 PM IST
DRI और STF की बड़ी सफलता,10 करोड़ की चरस के साथ तस्कर गिरफ्तार
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मुजफ्फरपुर। बिहार के मुजफ्फरपुर में नशीले पदार्थों की तस्करी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई सामने आई है। राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI) और बिहार स्पेशल टास्क फोर्स (STF) की संयुक्त कार्रवाई में चरस तस्करी के एक मामले का भंडाफोड़ किया गया है। इस दौरान 10 किलोग्राम चरस जब्त की गई है, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनुमानित कीमत करीब 10 करोड़ रुपये बताई जा रही है। कार्रवाई के दौरान एक कथित तस्कर को गिरफ्तार किया गया है। शुरुआती जानकारी के अनुसार, चरस की यह खेप नेपाल से बिहार लाई गई थी और इसे उत्तर प्रदेश के रास्ते गुजरात पहुंचाने की योजना थी। इस खुलासे के बाद जांच एजेंसियों का ध्यान पूरे तस्करी नेटवर्क और उससे जुड़े लोगों की पहचान पर केंद्रित हो गया है।
प्राप्त जानकारी के मुताबिक, मुजफ्फरपुर में DRI और बिहार STF ने संयुक्त रूप से कार्रवाई करते हुए चरस की बड़ी खेप पकड़ी। जांच एजेंसियों को नशीले पदार्थों की तस्करी से संबंधित जानकारी मिली थी, जिसके आधार पर कार्रवाई की गई। इस दौरान 10 किलोग्राम चरस बरामद होने के साथ एक संदिग्ध तस्कर को गिरफ्तार किया गया। बरामद मादक पदार्थ की कीमत करीब 10 करोड़ रुपये आंकी गई है। हालांकि, इसकी वास्तविक कीमत गुणवत्ता, शुद्धता और अवैध बाजार की परिस्थितियों के अनुसार अलग हो सकती है।
इस मामले की सबसे महत्वपूर्ण बात चरस की तस्करी के लिए इस्तेमाल किए जा रहे कथित अंतरराज्यीय मार्ग का सामने आना है। शुरुआती जानकारी के अनुसार, चरस की खेप नेपाल से भारत पहुंचाई गई थी। इसके बाद इसे बिहार से उत्तर प्रदेश ले जाकर गुजरात तक पहुंचाने की तैयारी थी। इससे संकेत मिलता है कि तस्करी का मामला केवल एक राज्य तक सीमित नहीं था, बल्कि कई राज्यों से जुड़ा हुआ था।नेपाल और भारत के बीच खुली सीमा होने के कारण दोनों देशों के नागरिकों की आवाजाही के लिए विशेष व्यवस्थाएं हैं। हालांकि, सीमा पार मादक पदार्थों की अवैध तस्करी रोकने के लिए सुरक्षा और खुफिया एजेंसियां लगातार निगरानी करती हैं। सीमावर्ती क्षेत्रों में तस्करी के मामलों की जांच के दौरान यह पता लगाना महत्वपूर्ण होता है कि नशीले पदार्थों को किस रास्ते से भारत में लाया गया और इसके पीछे कौन लोग सक्रिय थे।
मुजफ्फरपुर में पकड़ी गई चरस की खेप के मामले में भी कई सवाल सामने आए हैं। जांच एजेंसियों के लिए यह पता लगाना जरूरी होगा कि चरस नेपाल में किस व्यक्ति या समूह से प्राप्त की गई थी। इसके अलावा भारत में खेप पहुंचाने की जिम्मेदारी किसकी थी और गुजरात में इसे किस व्यक्ति तक पहुंचाया जाना था, इसकी जानकारी जुटाना भी महत्वपूर्ण होगा।गिरफ्तार आरोपी की भूमिका को लेकर भी जांच की जा सकती है। यह स्पष्ट करना आवश्यक होगा कि आरोपी केवल चरस को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने का काम कर रहा था या उसका संबंध किसी बड़े तस्करी गिरोह से था। साथ ही यह भी जांच का विषय है कि आरोपी को खेप पहुंचाने के बदले कितनी रकम मिलने वाली थी और उसके संपर्क किन लोगों से थे। फिलहाल आरोपी की पहचान और उससे पूछताछ में सामने आई विस्तृत जानकारी की आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
चरस एक प्रतिबंधित मादक पदार्थ है, जो कैनबिस पौधे के रेजिन से तैयार किया जाता है। भारत में इसकी अवैध खरीद-बिक्री, परिवहन और तस्करी पर नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंसेज एक्ट यानी एनडीपीएस अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाती है। इस कानून में मादक पदार्थों की मात्रा और अपराध की प्रकृति के अनुसार कठोर सजा का प्रावधान है।एनडीपीएस कानून के तहत चरस की एक किलोग्राम मात्रा को व्यावसायिक मात्रा की सीमा माना जाता है। ऐसे में 10 किलोग्राम चरस की बरामदगी गंभीर श्रेणी का मामला है। यदि जांच और न्यायिक प्रक्रिया में आरोप सिद्ध होते हैं, तो संबंधित प्रावधानों के तहत कठोर सजा हो सकती है। हालांकि, किसी भी गिरफ्तार व्यक्ति को अदालत द्वारा दोषी ठहराए जाने से पहले अपराधी नहीं माना जा सकता।
इस कार्रवाई में DRI और बिहार STF के संयुक्त प्रयास को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। DRI देश में तस्करी और सीमा शुल्क से जुड़े गंभीर मामलों की जांच करने वाली प्रमुख खुफिया एजेंसियों में शामिल है। वहीं, बिहार STF संगठित अपराध और गंभीर आपराधिक गतिविधियों के खिलाफ कार्रवाई में भूमिका निभाती है। दोनों एजेंसियों के समन्वय से इतनी बड़ी मात्रा में चरस की खेप पकड़ी जाना मादक पदार्थों की तस्करी रोकने की दिशा में महत्वपूर्ण कार्रवाई है।इस मामले में आगे की जांच के दौरान डिजिटल साक्ष्यों और आर्थिक लेनदेन की पड़ताल भी महत्वपूर्ण हो सकती है। तस्करी से जुड़े मामलों में मोबाइल फोन, संपर्क नंबर, बैंकिंग लेनदेन और परिवहन संबंधी दस्तावेजों की जांच से नेटवर्क के अन्य सदस्यों तक पहुंचने में मदद मिल सकती है। हालांकि, इस विशेष मामले में किन उपकरणों या दस्तावेजों को जब्त किया गया है, इसकी जानकारी अभी सामने नहीं आई है।
गुजरात तक चरस की खेप पहुंचाने की कथित योजना ने जांच का दायरा और बढ़ा दिया है। जांच एजेंसियों को यह पता लगाना होगा कि गुजरात में चरस की अंतिम डिलीवरी कहां होनी थी। इसके अलावा उत्तर प्रदेश में खेप को किसी अन्य व्यक्ति को सौंपने की योजना थी या वही तस्कर इसे आगे ले जाने वाला था, यह भी जांच का विषय हो सकता है।नशीले पदार्थों की तस्करी का कारोबार केवल कानून-व्यवस्था के लिए चुनौती नहीं है, बल्कि यह सार्वजनिक स्वास्थ्य और युवाओं के भविष्य से जुड़ा गंभीर मुद्दा भी है। मादक पदार्थों की अवैध उपलब्धता नशे की समस्या को बढ़ावा दे सकती है। इसके साथ ही संगठित तस्करी से होने वाली अवैध कमाई का इस्तेमाल अन्य आपराधिक गतिविधियों में होने की आशंका भी रहती है।
मुजफ्फरपुर में हुई इस कार्रवाई ने नेपाल से भारत के विभिन्न राज्यों तक मादक पदार्थों की कथित तस्करी के एक मार्ग को उजागर किया है। हालांकि, पूरे नेटवर्क के आकार और इसमें शामिल लोगों की संख्या का पता विस्तृत जांच के बाद ही चल सकेगा।फिलहाल DRI और बिहार STF की संयुक्त कार्रवाई में 10 किलोग्राम चरस जब्त होने और एक आरोपी की गिरफ्तारी की जानकारी सामने आई है। करीब 10 करोड़ रुपये की अनुमानित कीमत वाली इस खेप को नेपाल से बिहार और उत्तर प्रदेश होते हुए गुजरात ले जाने की बात कही जा रही है। अब जांच एजेंसियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती चरस के स्रोत, अंतिम खरीदार और पूरे सप्लाई नेटवर्क का पता लगाना है।
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