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बिहार में बाढ़ पीड़ितों को बड़ी राहत, 8.27 लाख परिवारों के खातों में भेजे 579.23 करोड़

Kavita2
15 Sept 2026 5:29 PM IST
बिहार में बाढ़ पीड़ितों को बड़ी राहत, 8.27 लाख परिवारों के खातों में भेजे 579.23 करोड़
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पटना। बिहार में बाढ़ से प्रभावित परिवारों को तत्काल आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के लिए राज्य सरकार ने मंगलवार को बड़ी राहत पहल की। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 8 लाख 27 हजार 472 बाढ़ प्रभावित परिवारों के बैंक खातों में प्रत्यक्ष लाभ अंतरण यानी डीबीटी के माध्यम से कुल 579.23 करोड़ रुपये भेजे। प्रत्येक पात्र परिवार को सात हजार रुपये की आनुग्रहिक राहत राशि दी गई है। सरकार का कहना है कि यह सहायता प्रभावित परिवारों को भोजन, कपड़े, दवा और अन्य आवश्यक वस्तुओं की व्यवस्था करने में मदद करेगी।

पटना स्थित लोक सेवक आवास के संकल्प सभागार में आयोजित कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने राहत राशि हस्तांतरण की प्रक्रिया का शुभारंभ किया। एक साथ लाखों लाभार्थियों के खातों में रकम भेजने के लिए डीबीटी प्रणाली का उपयोग किया गया। इसके माध्यम से सहायता राशि बिना किसी बिचौलिये के सीधे प्रभावित परिवारों तक पहुंचाई गई है। सरकार ने लाभार्थियों से अपने बैंक खातों और मोबाइल संदेशों की जांच करने को कहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बाढ़ से प्रभावित प्रत्येक पात्र परिवार तक सहायता पहुंचाना सरकार की प्राथमिकता है। सूची तैयार करने में पारदर्शिता बरतने और वास्तविक पीड़ितों को लाभ देने के निर्देश अधिकारियों को दिए गए हैं। यदि किसी पात्र परिवार का नाम शुरुआती सूची में शामिल नहीं हो सका है तो सत्यापन के बाद उसे भी सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। सरकार ने स्पष्ट किया कि कोई भी पात्र परिवार राहत राशि से वंचित नहीं रहेगा।

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार राज्य के 15 जिले बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। इन जिलों के 88 प्रखंडों, 575 ग्राम पंचायतों और 2,642 गांवों में पानी भरने से जनजीवन प्रभावित हुआ है। ग्रामीण क्षेत्रों के साथ शहरी इलाकों में भी बाढ़ का असर दिखाई दिया। राज्य के 21 शहरों के 136 वार्ड बाढ़ की चपेट में आए हैं। करीब 50 लाख लोगों के प्रभावित होने का अनुमान है।

बाढ़ के कारण कई क्षेत्रों में लोगों के घरों में पानी घुस गया और बड़ी संख्या में परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ा। खेतों में खड़ी फसलें डूबने से किसानों को नुकसान हुआ है। ग्रामीण सड़कों, संपर्क मार्गों और सार्वजनिक सुविधाओं पर भी बाढ़ का प्रभाव पड़ा। पानी से घिरे गांवों में लोगों को भोजन, पीने के पानी, दवा और पशुओं के चारे की समस्या का सामना करना पड़ रहा है।

सरकार की ओर से प्रभावित क्षेत्रों में सामुदायिक रसोई, राहत शिविर और अस्थायी आश्रय स्थलों की व्यवस्था की गई है। आवश्यकता के अनुसार नावों से लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया जा रहा है। गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों, बच्चों और बीमार लोगों की सहायता पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग की टीमों को बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में दवाएं उपलब्ध कराने और जलजनित बीमारियों की रोकथाम के लिए लगाया गया है।

बाढ़ का पानी उतरने के बाद प्रभावित परिवारों के सामने घरों की सफाई, भोजन की व्यवस्था और रोजमर्रा की जिंदगी दोबारा शुरू करने की चुनौती रहती है। ऐसे समय में सात हजार रुपये की आनुग्रहिक सहायता उन्हें तत्काल जरूरतों को पूरा करने में मदद कर सकती है। हालांकि बाढ़ के कारण मकान, पशुधन और फसलों को हुए नुकसान के लिए अलग-अलग सरकारी प्रावधानों के तहत सर्वे और मुआवजे की प्रक्रिया चलाए जाने की उम्मीद है।

डीबीटी के माध्यम से राशि भेजने से वितरण प्रक्रिया में समय की बचत होती है और नकद राशि के दुरुपयोग की आशंका कम होती है। इसके बावजूद लाभार्थियों के बैंक खातों का आधार और अन्य विवरणों से सही तरीके से जुड़ा होना जरूरी है। बैंक खाता निष्क्रिय होने, नाम में अंतर अथवा तकनीकी समस्या के कारण कुछ लाभार्थियों के खाते में रकम पहुंचने में देरी हो सकती है। ऐसी शिकायतों के समाधान के लिए स्थानीय प्रशासन को आवश्यक व्यवस्था करने के निर्देश दिए जाने की बात कही गई है।

सरकार ने जिला प्रशासन, अंचल कार्यालयों और आपदा प्रबंधन विभाग को प्रभावित परिवारों की सूची का लगातार सत्यापन करने को कहा है। जिन लोगों को निर्धारित अवधि में राशि नहीं मिलेगी, वे संबंधित अंचल कार्यालय अथवा जिला आपदा प्रबंधन शाखा में अपनी शिकायत दर्ज करा सकेंगे। जांच में पात्र पाए जाने पर उनके खातों में भी राहत राशि भेजी जाएगी।

राज्य में बाढ़ के कारण कृषि क्षेत्र को हुए नुकसान का आकलन भी महत्वपूर्ण होगा। कई जिलों में धान, मक्का, सब्जियों और अन्य फसलों के पानी में डूबने की खबर है। खेतों में लंबे समय तक पानी जमा रहने से तैयार फसल बर्बाद होने के साथ अगली बुआई पर भी असर पड़ सकता है। पशुपालकों के सामने मवेशियों के लिए चारे और सुरक्षित स्थान की समस्या बनी हुई है। ऐसे में किसानों और पशुपालकों के लिए अलग राहत उपायों की मांग भी उठ रही है।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को राहत कार्यों में लापरवाही नहीं बरतने और प्रभावित इलाकों की नियमित निगरानी करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार के पास संसाधनों की कमी नहीं है और जरूरतमंद परिवारों तक सहायता पहुंचाई जाएगी। बाढ़ के कारण नुकसान झेलने वाले लोगों का सर्वे निष्पक्ष तरीके से कराने और राहत वितरण की जानकारी सार्वजनिक रखने पर भी जोर दिया गया।

प्रथम चरण में चिह्नित 8,27,472 परिवारों को सात-सात हजार रुपये दिए जाने पर कुल 579.23 करोड़ रुपये का भुगतान बनता है। राशि हस्तांतरण की पुष्टि अलग-अलग लाभार्थियों के बैंक खातों में जमा होने के बाद होगी। सरकार ने प्रभावित लोगों से अपील की है कि वे अफवाहों पर विश्वास न करें और सहायता से संबंधित जानकारी के लिए आधिकारिक माध्यमों अथवा स्थानीय प्रशासन से संपर्क करें।

बाढ़ का संकट पूरी तरह समाप्त होने तक राहत और बचाव अभियान जारी रखने की आवश्यकता है। डीबीटी के माध्यम से दी गई सहायता प्रभावित परिवारों के लिए तात्कालिक राहत है, लेकिन पुनर्वास, क्षतिग्रस्त मकानों की मरम्मत, कृषि नुकसान की भरपाई और आजीविका बहाल करने के लिए दीर्घकालिक कदम भी जरूरी होंगे।

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