बिहार

70 करोड़ के नकली सिक्कों का बड़ा खेल, बिहार से गिरोह का शातिर आरोपी गिरफ्तार

Kavita2
24 Oct 2026 10:41 AM IST
70 करोड़ के नकली सिक्कों का बड़ा खेल, बिहार से गिरोह का शातिर आरोपी गिरफ्तार
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मधुबनी। उत्तर प्रदेश की सहारनपुर पुलिस ने बिहार के मधुबनी जिले में बड़ी कार्रवाई करते हुए नकली सिक्के बनाने और देश के विभिन्न बाजारों में सप्लाई करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह से जुड़े एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपी की पहचान राजनगर थाना क्षेत्र के लड्डुगांव निवासी मिथिलेश चौरसिया के रूप में हुई है। पुलिस के मुताबिक, आरोपी उस गिरोह से जुड़ा हुआ है, जिस पर करीब 70 करोड़ रुपये के नकली सिक्के बाजार में खपाने का आरोप है। गुरुवार, 22 अक्टूबर की देर शाम सहारनपुर पुलिस ने स्थानीय राजनगर थाना पुलिस के सहयोग से लड्डुगांव में छापेमारी कर मिथिलेश को पकड़ा। शुक्रवार को पुलिस उसे अपने साथ उत्तर प्रदेश ले गई। इस गिरफ्तारी के बाद नकली सिक्कों के अंतरराज्यीय नेटवर्क से जुड़े कई नए खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

लड्डुगांव में छापेमारी कर आरोपी को दबोचा

जानकारी के अनुसार, सहारनपुर पुलिस पिछले कई दिनों से मिथिलेश चौरसिया की तलाश कर रही थी। नकली सिक्कों के मामले में गिरफ्तार अन्य आरोपियों से पूछताछ और जांच के दौरान उसका नाम सामने आया था।

इसके बाद सहारनपुर नगर थाने के उपनिरीक्षक इकबाल सिंह तोमर के नेतृत्व में पुलिस की एक टीम बिहार के मधुबनी जिले पहुंची। टीम ने राजनगर थाना पुलिस से संपर्क कर आरोपी की तलाश शुरू की।

गुरुवार देर शाम पुलिस ने लड्डुगांव में दबिश दी और मिथिलेश चौरसिया को गिरफ्तार कर लिया। राजनगर थानाध्यक्ष सत्येंद्र कुमार ने गिरफ्तारी की पुष्टि की।

सहारनपुर पुलिस ने कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद आरोपी को अपने साथ ले जाने की कार्रवाई की। पुलिस ने उसका ट्रांजिट रिमांड भी प्राप्त किया है।

12 सितंबर को हुआ था नकली सिक्कों के गिरोह का खुलासा

इस मामले की शुरुआत सितंबर में सहारनपुर पुलिस की बड़ी कार्रवाई से हुई थी। पुलिस ने 12 सितंबर को नकली सिक्के बनाने और बाजार में सप्लाई करने वाले गिरोह के पांच सदस्यों को गिरफ्तार किया था।

गिरफ्तार आरोपियों में गिरोह का कथित सरगना उपकार लूथरा उर्फ अभय प्रताप सिंह भी शामिल था।

इसके अलावा हिमांशु उर्फ गुल्लू, कुलदीप, संतोष चौरसिया उर्फ जनार्दन और अनुराग पाल उर्फ लंकेश को पकड़ा गया था।

गिरफ्तार संतोष चौरसिया भी मधुबनी के लड्डुगांव का रहने वाला है। पुलिस के अनुसार, मिथिलेश चौरसिया संतोष का भाई है और मामले में उसका नाम भी दर्ज किया गया था।

इसी के बाद से पुलिस उसकी गिरफ्तारी के प्रयास में जुटी हुई थी।

छह मशीनें और हजारों नकली सिक्के बरामद

सहारनपुर पुलिस ने सितंबर में गिरोह के खिलाफ की गई कार्रवाई के दौरान बड़ी मात्रा में नकली सिक्के और उन्हें बनाने वाले उपकरण बरामद किए थे।

पुलिस के मुताबिक, आरोपियों के कब्जे से 20-20 रुपये के 6,400 नकली सिक्के मिले थे। इनकी कुल अंकित कीमत एक लाख 28 हजार रुपये थी।

इसके अलावा करीब पांच लाख रुपये अंकित मूल्य के अर्धनिर्मित सिक्के, सिक्के तैयार करने वाली छह मशीनें, लोहे की डाई और अन्य उपकरण बरामद किए गए थे।

बरामद सामान में आठ मोबाइल फोन, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, दो कारें, हिसाब-किताब के सात रजिस्टर, एक चेकबुक और अन्य दस्तावेज भी शामिल थे।

पुलिस इन सामानों के आधार पर गिरोह के कारोबार और सप्लाई नेटवर्क की जांच कर रही है।

रोजाना 10 से 12 हजार सिक्के बनाता था गिरोह

पुलिस की शुरुआती जांच में नकली सिक्के तैयार करने के तरीके और उनकी सप्लाई को लेकर कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आई थीं।

पुलिस के अनुसार, गिरोह छह मशीनों की मदद से प्रतिदिन लगभग 10 से 12 हजार नकली सिक्के तैयार करता था।

एक नकली सिक्का बनाने में लगभग पांच से छह रुपये का खर्च आता था, जबकि उसकी अंकित कीमत 20 रुपये होती थी।

गिरोह इन सिक्कों को सीधे बाजार में चलाने के बजाय एजेंटों के माध्यम से सप्लाई करता था।

पुलिस के मुताबिक, 20 रुपये के नकली सिक्के एजेंटों को लगभग 12 से 15 रुपये में दिए जाते थे। इसके बाद एजेंट अलग-अलग बाजारों में इन्हें चलाने का काम करते थे।

इस तरह गिरोह नकली सिक्कों को असली मुद्रा के रूप में बाजार में पहुंचाने का प्रयास करता था।

शराब की दुकानों और टोल प्लाजा तक फैला था नेटवर्क

जांच में सामने आया कि गिरोह नकली सिक्के खपाने के लिए ऐसे स्थानों को निशाना बनाता था, जहां बड़ी संख्या में नकद लेनदेन होता है।

पुलिस के अनुसार, शराब की दुकानों, टोल प्लाजा और किराना दुकानों के माध्यम से नकली सिक्कों को बाजार में चलाने की कोशिश की जाती थी।

इन स्थानों पर लगातार नकद लेनदेन होने के कारण नकली सिक्कों की पहचान नहीं हो पाने की आशंका रहती थी।

पुलिस अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि गिरोह के संपर्क में कितने एजेंट थे और किन-किन राज्यों में नकली सिक्कों की सप्लाई की गई थी।

हरियाणा में चल रही थी नकली सिक्कों की फैक्ट्री

मामले की जांच में हरियाणा के सोनीपत जिले से भी गिरोह के तार जुड़े होने की जानकारी सामने आई है।

पुलिस के मुताबिक, सोनीपत के एक औद्योगिक क्षेत्र में नकली सिक्के बनाने की फैक्ट्री संचालित की जा रही थी।

गिरोह का सरगना उपकार लूथरा अपने साथियों के साथ सहारनपुर में भी नया ठिकाना तैयार करने की योजना बना रहा था।

पुलिस को इसकी जानकारी मिलने के बाद सितंबर में कार्रवाई की गई और पांच आरोपियों को पकड़ लिया गया।

अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि नकली सिक्कों के निर्माण में इस्तेमाल मशीनें, धातु की चादरें और डाई कहां से खरीदी गई थीं।

पांच साल तक प्रमुख प्रतिनिधि रह चुका है आरोपी

मिथिलेश चौरसिया की गिरफ्तारी के बाद मधुबनी के राजनगर क्षेत्र में चर्चा तेज हो गई है।

पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, मिथिलेश करीब पांच वर्षों तक राजनगर में प्रमुख प्रतिनिधि के रूप में काम कर चुका है।

इसके अलावा वह कई मैथिली गीतों में भी काम कर चुका है। स्थानीय स्तर पर उसकी सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों से जुड़ी पहचान रही है।

ऐसे में नकली सिक्कों के अंतरराज्यीय गिरोह से उसका नाम जुड़ने के बाद स्थानीय लोगों में हैरानी देखी जा रही है। हालांकि, उसके खिलाफ लगाए गए आरोपों का अंतिम निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया के तहत होगा।

70 करोड़ के सिक्कों का हिसाब खंगालेगी पुलिस

इस मामले में सबसे बड़ा सवाल करीब 70 करोड़ रुपये के नकली सिक्कों के कथित कारोबार को लेकर है।

पुलिस की जांच में गिरोह द्वारा इतनी बड़ी राशि के नकली सिक्के बाजार में खपाने का अनुमान सामने आया है। हालांकि, यह रकम मौके से बरामद सिक्कों की कीमत नहीं है।

सहारनपुर पुलिस अब गिरफ्तार मिथिलेश चौरसिया से पूछताछ कर गिरोह के नेटवर्क, आर्थिक लेनदेन और अन्य सहयोगियों के बारे में जानकारी जुटाने का प्रयास करेगी।

एसपी सिटी व्योम बिंदल के अनुसार, आरोपी को ट्रांजिट रिमांड पर लिया गया है और सहारनपुर पहुंचने के बाद उससे विस्तृत पूछताछ की जाएगी।

अन्य राज्यों में भी जांच बढ़ने की संभावना

पुलिस के सामने यह पता लगाना भी चुनौती है कि नकली सिक्कों की सप्लाई किन राज्यों में की गई और उनके वितरण से जुड़े अन्य लोग कौन हैं।

जब्त मोबाइल फोन, हिसाब-किताब के रजिस्टर और अन्य दस्तावेज इस जांच में महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।

इसके अलावा पुलिस गिरोह को मशीनें और कच्चा माल उपलब्ध कराने वाले लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है।

फिलहाल मिथिलेश चौरसिया की गिरफ्तारी को इस मामले में महत्वपूर्ण कार्रवाई माना जा रहा है। आगे की पूछताछ और साक्ष्यों की जांच से नकली सिक्कों के कारोबार के वास्तविक विस्तार तथा अन्य आरोपियों की भूमिका स्पष्ट हो सकेगी।

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