
पटना: बिहार में हाल के दिनों में छात्रों के उग्र प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा और उपद्रव के बाद पुलिस ने अब सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है। राज्य के विभिन्न जिलों में प्रदर्शन के दौरान हुई तोड़फोड़, पथराव और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के मामलों में उपद्रवियों की पहचान की जा रही है। पुलिस वीडियो फुटेज, सीसीटीवी कैमरों और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आरोपितों की पहचान कर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई में जुटी है।
राज्य के अपर पुलिस महानिदेशक (विधि-व्यवस्था) केएस अनुपम ने बताया कि 22 जुलाई से 25 जुलाई के बीच हुए छात्र प्रदर्शनों के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने में पुलिस और प्रशासन को काफी चुनौतियों का सामना करना पड़ा। इन चार दिनों में राज्य के कई हिस्सों में हिंसक घटनाएं हुईं, जिनका प्रभाव पटना सहित कुल 15 जिलों की विधि-व्यवस्था पर पड़ा।
एडीजी के अनुसार, इन घटनाओं में 157 पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी घायल हुए हैं। वहीं, हिंसा के दौरान 13 आम नागरिक भी घायल हुए। घायलों में पुलिसकर्मी, प्रशासनिक अधिकारी और अन्य सरकारी कर्मचारी शामिल हैं, जिन्हें अलग-अलग अस्पतालों में उपचार उपलब्ध कराया गया। कई अधिकारियों को ड्यूटी के दौरान पथराव और अन्य हिंसक घटनाओं में चोटें आईं।
पुलिस ने बताया कि अब तक 355 प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। इन सभी पर कानून-व्यवस्था भंग करने, सरकारी कार्य में बाधा डालने, पथराव, तोड़फोड़ और अन्य संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की जा रही है। पुलिस का कहना है कि जांच अभी जारी है और जिन लोगों की पहचान वीडियो या अन्य साक्ष्यों के आधार पर होगी, उनके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
प्रदर्शनों के दौरान सरकारी संपत्ति को भी भारी नुकसान पहुंचा। अधिकारियों के अनुसार, 14 सरकारी वाहनों को क्षतिग्रस्त कर दिया गया, जबकि एक सरकारी वाहन को आग के हवाले कर दिया गया। कई स्थानों पर प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड तोड़े, सड़कें जाम कीं और पुलिस बल पर पथराव किया, जिससे हालात कुछ समय के लिए तनावपूर्ण हो गए।
सबसे गंभीर घटनाओं में से एक सारण जिले में हुई, जहां पथराव के दौरान सारण सदर की प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) दृष्टि पाठक गंभीर रूप से घायल हो गईं। अधिकारियों के अनुसार, उनके चेहरे और आंख पर गंभीर चोट लगी, जिससे उनकी एक आंख गंभीर रूप से प्रभावित हुई। उन्हें तत्काल बेहतर इलाज के लिए पटना स्थित आईजीआईएमएस (इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान) में भर्ती कराया गया, जहां उनका उपचार जारी है। प्रशासन ने उनके स्वास्थ्य की लगातार निगरानी की जा रही है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि प्रदर्शन के दौरान कई स्थानों पर भीड़ ने उग्र रूप धारण कर लिया था। हालात को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को अतिरिक्त बल तैनात करना पड़ा। कई जगहों पर भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आवश्यक कानूनी उपाय अपनाए गए, ताकि जन-धन की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
एडीजी केएस अनुपम ने कहा कि कानून हाथ में लेने वालों के खिलाफ किसी प्रकार की नरमी नहीं बरती जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन हिंसा, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाना और सरकारी कर्मचारियों पर हमला करना गंभीर अपराध है। ऐसे मामलों में कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस मुख्यालय के अनुसार, घटनास्थलों से प्राप्त वीडियो रिकॉर्डिंग, ड्रोन फुटेज, सीसीटीवी कैमरों और सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो की जांच की जा रही है। इन साक्ष्यों के आधार पर उपद्रव में शामिल लोगों की पहचान की जा रही है। आवश्यकता पड़ने पर आरोपितों के खिलाफ अतिरिक्त धाराएं भी जोड़ी जा सकती हैं।
प्रशासन ने जिलों के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि भविष्य में किसी भी प्रकार के प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था और अधिक मजबूत रखी जाए। संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती, लगातार निगरानी और खुफिया सूचनाओं के आधार पर एहतियाती कदम उठाने के निर्देश भी दिए गए हैं।
इस बीच, विभिन्न जिलों में सामान्य जनजीवन धीरे-धीरे पटरी पर लौट रहा है। हालांकि जिन क्षेत्रों में हिंसा हुई थी, वहां पुलिस की गश्त बढ़ा दी गई है और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने और किसी भी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि हिंसक प्रदर्शनों के मामलों में निष्पक्ष जांच और साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई आवश्यक है। यदि किसी व्यक्ति की संलिप्तता प्रमाणित होती है, तो उसके खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी, जबकि जिन लोगों की भूमिका साबित नहीं होगी, उन्हें कानून के अनुसार राहत मिलेगी।
फिलहाल बिहार पुलिस हिंसा से जुड़े सभी मामलों की जांच में जुटी हुई है। गिरफ्तार किए गए प्रदर्शनकारियों के खिलाफ न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ रही है, जबकि अन्य संदिग्धों की पहचान का काम जारी है। राज्य सरकार का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने तथा सरकारी कर्मचारियों पर हमला करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।





