बिहार

पश्चिम चंपारण में भूमि अभिलेखों में बड़ी गड़बड़ी, गलत रिकॉर्ड से जमीन मालिकों की बढ़ी चिंता

nidhi
6 Aug 2026 7:41 AM IST
पश्चिम चंपारण में भूमि अभिलेखों में बड़ी गड़बड़ी, गलत रिकॉर्ड से जमीन मालिकों की बढ़ी चिंता
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जमीन विवाद से परेशान लोग, पश्चिम चंपारण में राजस्व रिकॉर्ड की गड़बड़ियों ने बढ़ाई मुश्किलें

बिहार : पश्चिम चंपारण जिले में भूमि रिकॉर्ड से जुड़ी गंभीर अनियमितताओं का मामला सामने आया है। कई जमीन मालिकों का आरोप है कि उनकी जमीन पर मालिकाना हक होने के बावजूद सरकारी रिकॉर्ड में गलत मौजा, खाता-खेसरा संख्या और दाखिल-खारिज (म्यूटेशन) से संबंधित त्रुटियां दर्ज हैं। इन गड़बड़ियों के कारण किसानों और अन्य भू-स्वामियों को अपनी ही जमीन पर अधिकार साबित करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

भूमि अभिलेखों में हुई इन त्रुटियों ने न केवल प्रशासनिक प्रक्रिया को जटिल बनाया है, बल्कि खरीद-बिक्री, ऋण, उत्तराधिकार और सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में भी बाधाएं उत्पन्न कर दी हैं।
क्या हैं प्रमुख शिकायतें?
स्थानीय लोगों के अनुसार, भूमि रिकॉर्ड में कई प्रकार की गड़बड़ियां सामने आई हैं, जिनमें शामिल हैं—
सही जमीन का गलत मौजा में दर्ज होना।
खाता और खेसरा संख्या में त्रुटियां।
दाखिल-खारिज की प्रक्रिया में देरी या गलत प्रविष्टियां।
एक व्यक्ति की जमीन दूसरे के रिकॉर्ड में दिखाई देना।
ऑनलाइन रिकॉर्ड और पुराने कागजी अभिलेखों में अंतर।
इन समस्याओं के कारण कई मामलों में जमीन मालिकों को बार-बार राजस्व कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
किसानों पर सबसे अधिक असर
भूमि रिकॉर्ड की गड़बड़ियों का सबसे अधिक प्रभाव किसानों पर पड़ रहा है। जिन किसानों को फसल ऋण, कृषि अनुदान या अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए भूमि दस्तावेजों की आवश्यकता होती है, उन्हें रिकॉर्ड में त्रुटियों के कारण दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
इसके अलावा, जमीन की खरीद-बिक्री और उत्तराधिकार संबंधी मामलों में भी विवाद बढ़ने की आशंका बनी हुई है।
दाखिल-खारिज में देरी बनी बड़ी समस्या
दाखिल-खारिज (म्यूटेशन) भूमि स्वामित्व परिवर्तन की महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। यदि इसमें गड़बड़ी होती है, तो नए मालिक का नाम राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज नहीं हो पाता। इससे भविष्य में कानूनी विवाद, बैंक ऋण और अन्य प्रशासनिक कार्य प्रभावित हो सकते हैं।
कई लोगों का कहना है कि आवेदन करने के बाद भी लंबे समय तक दाखिल-खारिज की प्रक्रिया पूरी नहीं हो रही या रिकॉर्ड में गलत विवरण दर्ज कर दिया गया है।
प्रशासन की भूमिका
राजस्व विभाग के अधिकारी ऐसे मामलों की जांच कर रिकॉर्ड में सुधार की प्रक्रिया अपनाते हैं। जहां तकनीकी त्रुटियां पाई जाती हैं, वहां दस्तावेजों के सत्यापन के बाद संशोधन किया जाता है।
प्रशासन का कहना है कि यदि किसी व्यक्ति को भूमि रिकॉर्ड में गलती दिखाई देती है, तो वह संबंधित अंचल कार्यालय या राजस्व विभाग में आवश्यक दस्तावेजों के साथ सुधार के लिए आवेदन कर सकता है।
भूमि रिकॉर्ड सही होना क्यों जरूरी?
सही भूमि रिकॉर्ड कई कारणों से महत्वपूर्ण है—
संपत्ति पर कानूनी स्वामित्व का प्रमाण।
खरीद-बिक्री में पारदर्शिता।
बैंक से कृषि या आवास ऋण प्राप्त करने में सुविधा।
सरकारी योजनाओं का लाभ।
भविष्य के भूमि विवादों से बचाव।
उत्तराधिकार और म्यूटेशन प्रक्रिया में आसानी।
विशेषज्ञों की राय
भूमि मामलों के जानकारों का कहना है कि रिकॉर्ड के डिजिटलीकरण से पारदर्शिता बढ़ी है, लेकिन पुराने अभिलेखों को डिजिटल रिकॉर्ड में बदलने के दौरान हुई त्रुटियों को समय रहते ठीक करना आवश्यक है। नियमित सत्यापन, दस्तावेजों का मिलान और शिकायतों का त्वरित निस्तारण भूमि विवादों को कम करने में मदद कर सकता है।
लोगों की मांग
स्थानीय नागरिकों और किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि—
भूमि रिकॉर्ड का विशेष सत्यापन अभियान चलाया जाए।
गलत मौजा, खाता-खेसरा और दाखिल-खारिज की त्रुटियों को शीघ्र सुधारा जाए।
शिकायतों के निपटारे के लिए समयबद्ध व्यवस्था बनाई जाए।
डिजिटल और कागजी रिकॉर्ड का मिलान कराया जाए।
प्रभावित लोगों को अनावश्यक कार्यालयी चक्कर से राहत दी जाए।
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