
पटना। बिहार में प्याज की खेती करने वाले किसानों के लिए कृषि विभाग ने राहत भरा कदम उठाया है। फसल तैयार होने के बाद उचित भंडारण की कमी के कारण होने वाले नुकसान को कम करने के लिए राज्य सरकार अब आधुनिक प्याज भंडारण इकाइयों का निर्माण कराएगी।
प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत राज्यभर में प्याज के सुरक्षित भंडारण के लिए 55 आधुनिक गोदाम बनाए जाएंगे। इन भंडारण इकाइयों का उद्देश्य किसानों को फसल खराब होने से बचाना और उन्हें बेहतर बाजार मूल्य मिलने तक प्याज सुरक्षित रखने की सुविधा उपलब्ध कराना है।
50 मीट्रिक टन क्षमता वाले बनेंगे गोदाम
कृषि विभाग की योजना के अनुसार, प्रत्येक आधुनिक प्याज भंडारण इकाई की क्षमता 50 मीट्रिक टन होगी। एक इकाई के निर्माण पर करीब छह लाख रुपये खर्च किए जाएंगे।
इस योजना की सबसे खास बात यह है कि किसानों को निर्माण लागत का बड़ा हिस्सा सरकार की ओर से अनुदान के रूप में दिया जाएगा। प्रत्येक लाभार्थी किसान को 75 प्रतिशत तक सरकारी सहायता मिलेगी।
इससे किसानों पर आर्थिक बोझ कम होगा और वे अपनी फसल को वैज्ञानिक तरीके से सुरक्षित रख सकेंगे।
फसल खराब होने की समस्या से मिलेगी राहत
बिहार में बड़ी संख्या में किसान प्याज की खेती करते हैं। लेकिन फसल तैयार होने के बाद सुरक्षित भंडारण की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने के कारण किसानों को अक्सर नुकसान उठाना पड़ता है।
कई बार बाजार में उचित कीमत नहीं मिलने पर किसान प्याज को लंबे समय तक नहीं रख पाते और मजबूरी में कम दाम पर बेच देते हैं। वहीं, खुले या असुरक्षित स्थानों पर रखने से प्याज सड़ने और खराब होने की संभावना बढ़ जाती है।
आधुनिक भंडारण इकाइयों के निर्माण से किसानों को इस समस्या से राहत मिलने की उम्मीद है।
समस्तीपुर में तीन इकाइयों को मंजूरी
इस योजना के तहत समस्तीपुर जिले में तीन आधुनिक प्याज भंडारण इकाइयों के निर्माण को प्रशासनिक मंजूरी मिल चुकी है।
जिले में प्याज उत्पादन करने वाले किसानों की संख्या अच्छी है, लेकिन वैज्ञानिक स्टोरेज की सुविधा सीमित होने के कारण हर साल बड़ी मात्रा में प्याज खराब हो जाता है।
कृषि विभाग का मानना है कि इन इकाइयों के बनने से किसानों को अपनी फसल सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी और उन्हें बेहतर कीमत मिलने तक इंतजार करने का अवसर मिलेगा।
किसानों की आय बढ़ाने पर जोर
सरकार का उद्देश्य केवल उत्पादन बढ़ाना ही नहीं, बल्कि किसानों की आय में सुधार करना भी है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, खेती में नुकसान का एक बड़ा कारण फसल कटाई के बाद सही प्रबंधन की कमी है।
अगर किसानों को भंडारण की सुविधा मिलती है तो वे बाजार की स्थिति के अनुसार प्याज बेच सकेंगे। इससे उन्हें कम कीमत पर फसल बेचने की मजबूरी से राहत मिलेगी।
वैज्ञानिक तरीके से होगा भंडारण
इन आधुनिक गोदामों को इस तरह तैयार किया जाएगा कि प्याज लंबे समय तक सुरक्षित रह सके। वैज्ञानिक भंडारण व्यवस्था में तापमान, हवा के प्रवाह और नमी जैसी चीजों का ध्यान रखा जाता है।
इससे प्याज की गुणवत्ता बनी रहती है और खराब होने की संभावना कम हो जाती है।
कृषि विभाग किसानों को इन इकाइयों के संचालन और रखरखाव की जानकारी भी देगा, ताकि वे इसका बेहतर उपयोग कर सकें।
राज्यभर के किसानों को मिलेगा लाभ
55 आधुनिक भंडारण इकाइयों के निर्माण से राज्य के कई जिलों के प्याज उत्पादक किसानों को फायदा मिलने की उम्मीद है।
सरकार की योजना है कि किसानों को उत्पादन से लेकर भंडारण और बिक्री तक बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। इससे कृषि क्षेत्र को मजबूत करने में मदद मिलेगी।
किसानों में बढ़ी उम्मीद
कृषि विभाग की इस पहल से प्याज किसानों में उम्मीद जगी है। किसानों का कहना है कि यदि फसल को सुरक्षित रखने की सुविधा मिलती है तो वे बेहतर तरीके से खेती कर पाएंगे और उन्हें आर्थिक नुकसान कम होगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि भंडारण सुविधा बढ़ने से बाजार में प्याज की उपलब्धता भी संतुलित रह सकती है और कीमतों में अचानक उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।
आगे की प्रक्रिया
अब विभाग की ओर से चयनित स्थानों पर भंडारण इकाइयों के निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। लाभार्थी किसानों को योजना से जोड़ने के लिए आवश्यक प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
कृषि विभाग को उम्मीद है कि इन आधुनिक गोदामों के माध्यम से प्याज उत्पादन करने वाले किसानों की सबसे बड़ी समस्या का समाधान किया जा सकेगा और उनकी आय में सुधार आएगा।





