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बिहार में मॉक ड्रिल के दौरान बड़ा हादसा, टियर गैस के धुएं से 122 जवान बीमार

Kavita2
8 Oct 2026 9:58 AM IST
बिहार में मॉक ड्रिल के दौरान बड़ा हादसा, टियर गैस के धुएं से 122 जवान बीमार
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दरभंगा। बिहार के दरभंगा जिले में बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस बल (बीएसएपी-13) के परिसर में बुधवार, 7 अक्टूबर को मॉक ड्रिल के दौरान बड़ी संख्या में जवानों की तबीयत बिगड़ गई। टियर गैस यानी आंसू गैस के धुएं के संपर्क में आने से 100 से अधिक जवान बीमार पड़ गए। इनमें दो दर्जन से अधिक महिला सिपाही भी शामिल थीं। जवानों को अचानक सिरदर्द, पेट दर्द, बेचैनी, चक्कर और उल्टी की शिकायत होने लगी। इसके बाद प्रभावित जवानों को इलाज के लिए दरभंगा मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (डीएमसीएच) के इमरजेंसी वार्ड में ले जाया गया। अस्पताल पहुंचने वाले जवानों की संख्या 122 बताई गई है। उपचार के बाद अधिकांश जवानों को छुट्टी दे दी गई, जबकि पांच जवानों को निगरानी में रखा गया।

मॉक ड्रिल के दौरान अचानक बिगड़ी तबीयत

जानकारी के अनुसार, बीएसएपी-13 परिसर में बुधवार दोपहर करीब साढ़े तीन बजे वरिष्ठ जवानों के लिए मॉक ड्रिल आयोजित की गई थी। इस दौरान पुलिसकर्मियों को टियर गैस शेल के इस्तेमाल का प्रशिक्षण दिया जा रहा था। प्रशिक्षण का उद्देश्य जवानों को भीड़ नियंत्रण और आपात परिस्थितियों में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों से परिचित कराना था।

इसी दौरान टियर गैस के इस्तेमाल से निकला धुआं आसपास मौजूद जवानों तक पहुंच गया। कुछ ही देर में कई जवानों को घबराहट और चक्कर आने लगे। इसके बाद उल्टी और बेचैनी की शिकायत भी सामने आई।

एक साथ बड़ी संख्या में जवानों की तबीयत खराब होने से प्रशिक्षण परिसर में अफरातफरी की स्थिति बन गई। प्रभावित जवानों को तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई।

पेड़ के नीचे बैठकर देख रहे थे प्रशिक्षण

घटना के संबंध में सामने आई जानकारी के अनुसार, परिसर में मौजूद कुछ प्रशिक्षु महिला और पुरुष जवान मेस से भोजन करने के बाद पेड़ के नीचे बैठकर मॉक ड्रिल देख रहे थे।

इसी दौरान प्रशिक्षण में इस्तेमाल की गई आंसू गैस का धुआं उस स्थान तक पहुंच गया, जहां जवान बैठे हुए थे। धुएं के संपर्क में आने के बाद उनकी तबीयत बिगड़ने लगी।

पहले कुछ जवानों ने चक्कर और जी मिचलाने की शिकायत की। इसके बाद अन्य जवानों में भी इसी तरह के लक्षण दिखाई देने लगे।

जवानों की संख्या बढ़ने पर परिसर में प्राथमिक उपचार की व्यवस्था की गई। इसके बाद प्रभावित जवानों को वाहनों की सहायता से डीएमसीएच भेजा गया।

डीएमसीएच के इमरजेंसी वार्ड में पहुंचे 122 जवान

बड़ी संख्या में बीमार जवानों के अस्पताल पहुंचने के बाद डीएमसीएच के इमरजेंसी विभाग में चिकित्सा व्यवस्था तेज कर दी गई।

डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मचारियों ने प्रभावित जवानों की जांच शुरू की। अस्पताल में आने वाले जवानों को उनकी स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार उपचार दिया गया।

डीएमसीएच के अधीक्षक डॉ. जगदीश चंद्र ने चिकित्सकों को सतर्क किया। अस्पताल प्रशासन के अनुसार, जवानों को उल्टी, बेचैनी और अन्य समस्याओं की शिकायत थी।

प्रारंभिक स्तर पर भोजन से संबंधित समस्या की आशंका भी सामने आई थी। हालांकि, बीएसएपी-13 के कमांडेंट ने टियर गैस के धुएं को जवानों की तबीयत बिगड़ने की वजह बताया।

117 जवानों को उपचार के बाद मिली छुट्टी

अस्पताल में इलाज के बाद जवानों की स्वास्थ्य स्थिति में सुधार हुआ। बुधवार देर शाम तक कुल 122 जवानों में से 117 को उपचार के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।

पांच जवानों को आगे की चिकित्सकीय निगरानी के लिए अस्पताल में रखा गया। चिकित्सकों के अनुसार, उपचार करा रहे जवानों की स्थिति खतरे से बाहर बताई गई।

इतनी बड़ी संख्या में जवानों के प्रभावित होने के बाद अस्पताल में लगातार उनकी स्थिति की निगरानी की गई।

स्वास्थ्य में सुधार होने पर जवानों को छुट्टी दी गई, जबकि जिनकी तबीयत पूरी तरह सामान्य नहीं हुई थी, उन्हें निगरानी में रखा गया।

कमांडेंट ने बताई घटना की वजह

बीएसएपी-13 के कमांडेंट रवीश कुमार भी बीमार जवानों की जानकारी लेने डीएमसीएच पहुंचे। उन्होंने घटना के संबंध में बताया कि परिसर में वरिष्ठ जवानों के लिए मॉक ड्रिल आयोजित की गई थी।

इस दौरान इस्तेमाल की गई टियर गैस के प्रभाव में प्रशिक्षु जवान आ गए, जिससे उनकी तबीयत बिगड़ गई।

कमांडेंट ने भोजन से विषाक्तता की आशंका को खारिज करते हुए कहा कि जवानों की तबीयत खराब होने की वजह आंसू गैस का प्रभाव था।

उन्होंने यह भी बताया कि प्रभावित जवानों का इलाज कराया गया है और स्थिति नियंत्रण में है।

अग्निशमन विभाग ने परिसर में किया पानी का छिड़काव

घटना के बाद अग्निशमन विभाग की टीम को भी बुलाया गया। टीम ने मॉक ड्रिल वाले परिसर में पानी का छिड़काव किया।

इसका उद्देश्य प्रशिक्षण स्थल पर मौजूद टियर गैस के प्रभाव को कम करना था, ताकि वहां मौजूद अन्य जवानों को परेशानी न हो।

प्रभावित क्षेत्र में पानी का छिड़काव किए जाने के बाद स्थिति सामान्य करने के प्रयास किए गए।

टियर गैस का इस्तेमाल आमतौर पर भीड़ नियंत्रण से जुड़ी परिस्थितियों में किया जाता है। इसके संपर्क में आने से आंखों में जलन, सांस लेने में परेशानी, खांसी और बेचैनी जैसे लक्षण हो सकते हैं। अधिक प्रभाव होने पर चिकित्सकीय सहायता की आवश्यकता पड़ सकती है।

महिला जवानों की संख्या भी अधिक

बीमार पड़े जवानों में महिला सिपाहियों की संख्या भी उल्लेखनीय रही। दो दर्जन से अधिक महिला जवानों के प्रभावित होने की जानकारी सामने आई है।

अस्पताल में भर्ती कराए गए जवानों में महिला और पुरुष दोनों शामिल थे। कुछ जवानों को उल्टी और चक्कर की शिकायत थी, जबकि अन्य जवान बेचैनी और सिरदर्द से परेशान थे।

प्रशिक्षण के दौरान इतनी बड़ी संख्या में जवानों की तबीयत बिगड़ने की घटना ने सुरक्षा और सावधानी संबंधी व्यवस्थाओं को लेकर सवाल खड़े किए हैं।

हालांकि, मॉक ड्रिल के आयोजन में किसी प्रकार की लापरवाही हुई थी या नहीं, इस संबंध में आधिकारिक जांच के निष्कर्ष सामने नहीं आए हैं।

सभी जवानों की हालत खतरे से बाहर

दरभंगा में बीएसएपी-13 परिसर में हुई इस घटना के बाद पुलिस और अस्पताल प्रशासन ने प्रभावित जवानों को तत्काल उपचार उपलब्ध कराया।

अस्पताल से मिली जानकारी के अनुसार, अधिकांश जवानों की तबीयत में सुधार हो चुका है। पांच जवानों को निगरानी में रखा गया था और उनकी स्थिति भी खतरे से बाहर बताई गई।

फिलहाल बीएसएपी-13 के अधिकारियों ने घटना की वजह मॉक ड्रिल के दौरान इस्तेमाल की गई आंसू गैस को बताया है। बड़ी संख्या में जवानों के बीमार होने के बाद प्रशिक्षण के दौरान अपनाई जाने वाली सुरक्षा व्यवस्थाएं चर्चा का विषय बन गई हैं।

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