बिहार

बिहार सरकार का बड़ा फैसला, जीविका दीदियों को स्वरोजगार के लिए मिलेगी ₹60 हजार सब्सिडी

nidhi
21 July 2026 6:57 AM IST
बिहार सरकार का बड़ा फैसला, जीविका दीदियों को स्वरोजगार के लिए मिलेगी ₹60 हजार सब्सिडी
x
महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा, जीविका दीदियों के लिए ₹60 हजार सब्सिडी योजना शुरू

BIHAR : ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए जीविका (JEEViKA) से जुड़ी स्वयं सहायता समूह (SHG) की महिलाओं के लिए नई स्वरोजगार योजना शुरू की है। इस योजना के तहत जीविका दीदियों को अपने ही गांव में छोटा व्यवसाय शुरू करने का अवसर मिलेगा और सरकार की ओर से ₹60,000 तक की सब्सिडी प्रदान की जाएगी। इस पहल का उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना, स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ाना और गांवों की अर्थव्यवस्था को मजबूत करना है।

राज्य सरकार का मानना है कि बड़ी संख्या में महिलाएं स्वरोजगार शुरू करना चाहती हैं, लेकिन पूंजी की कमी उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती होती है। इसी समस्या को दूर करने के लिए यह सब्सिडी योजना लागू की गई है, जिससे महिलाएं बिना बड़े वित्तीय बोझ के अपना व्यवसाय शुरू कर सकें।
क्या है योजना का उद्देश्य?
इस योजना का मुख्य उद्देश्य जीविका से जुड़ी महिलाओं को उद्यमी बनाना और उन्हें गांव छोड़कर शहरों में रोजगार तलाशने की आवश्यकता को कम करना है। सरकार चाहती है कि महिलाएं अपने गांव में ही आय का स्थायी स्रोत विकसित करें और परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करें।
इस योजना के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे उद्योगों, सेवा आधारित व्यवसायों और कृषि से जुड़े उद्यमों को भी बढ़ावा मिलेगा। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन होगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी।
मिलेगी ₹60 हजार तक की सब्सिडी
योजना के तहत पात्र जीविका दीदियों को स्वरोजगार शुरू करने के लिए ₹60,000 तक की सब्सिडी उपलब्ध कराई जाएगी। यह राशि व्यवसाय की प्रकृति और पात्रता के आधार पर दी जाएगी। इसके अलावा महिलाओं को आवश्यक प्रशिक्षण, व्यवसाय संचालन संबंधी मार्गदर्शन और वित्तीय सहायता भी उपलब्ध कराई जाएगी ताकि वे अपना उद्यम सफलतापूर्वक चला सकें।
सरकार का लक्ष्य केवल आर्थिक सहायता देना नहीं बल्कि महिलाओं को दीर्घकालिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना भी है।
किन व्यवसायों के लिए मिलेगी सहायता?
जीविका दीदियां अपनी रुचि और स्थानीय जरूरतों के अनुसार कई तरह के व्यवसाय शुरू कर सकती हैं। इनमें प्रमुख रूप से—
डेयरी एवं दुग्ध उत्पादन
बकरी पालन एवं मुर्गी पालन
किराना दुकान
सिलाई एवं बुटीक
अगरबत्ती, मसाला और पापड़ निर्माण
खाद्य प्रसंस्करण इकाई
मशरूम उत्पादन
फूल एवं सब्जी की खेती
डिजिटल सेवा केंद्र (CSC)
हस्तशिल्प एवं घरेलू उद्योग
इन व्यवसायों के माध्यम से महिलाएं कम लागत में नियमित आय अर्जित कर सकती हैं।
कौन उठा सकता है लाभ?
इस योजना का लाभ मुख्य रूप से बिहार जीविका मिशन से जुड़ी स्वयं सहायता समूह (SHG) की पात्र महिलाओं को मिलेगा। आवेदन करने वाली महिला का संबंधित समूह से जुड़ा होना और निर्धारित पात्रता शर्तों को पूरा करना आवश्यक होगा।
स्थानीय जीविका कार्यालय या प्रखंड स्तर के संबंधित अधिकारियों के माध्यम से आवेदन प्रक्रिया पूरी की जा सकेगी। आवश्यक दस्तावेजों में पहचान पत्र, आधार कार्ड, बैंक खाता, समूह सदस्यता से जुड़े प्रमाण और अन्य जरूरी दस्तावेज शामिल हो सकते हैं।
प्रशिक्षण भी मिलेगा
सरकार केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं रहेगी। लाभार्थियों को व्यवसाय प्रबंधन, विपणन, लेखा-जोखा, डिजिटल भुगतान, उत्पाद गुणवत्ता और ग्राहक सेवा से संबंधित प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। इससे महिलाएं अपने व्यवसाय को लंबे समय तक सफलतापूर्वक संचालित कर सकेंगी।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा बढ़ावा
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बड़ी संख्या में जीविका दीदियां इस योजना का लाभ उठाती हैं तो गांवों में नए रोजगार के अवसर पैदा होंगे। स्थानीय उत्पादों का उत्पादन बढ़ेगा, महिलाओं की आय में वृद्धि होगी और ग्रामीण परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।
इसके अलावा महिलाओं की सामाजिक भागीदारी भी बढ़ेगी और वे परिवार के आर्थिक निर्णयों में अधिक प्रभावी भूमिका निभा सकेंगी।
महिला सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम
बिहार सरकार की यह पहल महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने के साथ-साथ आत्मनिर्भर ग्रामीण अर्थव्यवस्था के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। जीविका मॉडल पहले ही लाखों महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से संगठित कर चुका है और अब यह नई योजना उन्हें अपने व्यवसाय की शुरुआत करने का अवसर देगी।
यदि योजना का प्रभावी ढंग से क्रियान्वयन होता है तो आने वाले वर्षों में हजारों ग्रामीण महिलाएं सफल उद्यमी बन सकती हैं और अपने गांव में ही सम्मानजनक आजीविका प्राप्त कर सकेंगी।

Next Story