
Motihari मोतिहारी : बिहार के पूर्वी चंपारण जिले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए अवैध रूप से संचालित कारतूस निर्माण फैक्ट्री का खुलासा किया है। चकिया थाना क्षेत्र में की गई इस कार्रवाई के दौरान पुलिस ने भारी मात्रा में निर्मित और अर्धनिर्मित कारतूस, विस्फोटक सामग्री, कारतूस बनाने वाली मशीनें और अन्य उपकरण बरामद किए हैं। पुलिस की इस कार्रवाई से अवैध हथियार और कारतूस निर्माण के नेटवर्क में हड़कंप मच गया है।
पुलिस के अनुसार, गुप्त सूचना के आधार पर चकिया थाना क्षेत्र में छापेमारी की गई थी। जांच के दौरान एक ऐसे ठिकाने का पता चला, जहां अवैध तरीके से कारतूस तैयार किए जा रहे थे। पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर कार्रवाई की और वहां से बड़ी मात्रा में तैयार और अधबने कारतूस बरामद किए। इसके अलावा कारतूस निर्माण में इस्तेमाल होने वाली मशीनें, उपकरण और विस्फोटक सामग्री भी जब्त की गई है।
छापेमारी के दौरान पुलिस ने 500 से अधिक निर्मित और अर्धनिर्मित कारतूस बरामद किए हैं। इसके साथ ही कारतूस बनाने में इस्तेमाल होने वाली कई सामग्री भी मिली है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि यह अवैध फैक्ट्री कितने समय से संचालित हो रही थी और यहां तैयार किए गए कारतूस किन लोगों तक पहुंचाए जाते थे।
इस मामले में पुलिस ने फैक्ट्री संचालक और कथित मास्टरमाइंड श्रीकांत सिंह को गिरफ्तार किया है। वह पूर्वी चंपारण जिले के मड़पा मोहन गांव का रहने वाला बताया जा रहा है। पुलिस जांच में सामने आया है कि श्रीकांत सिंह के खिलाफ पहले से ही आर्म्स और बुलेट से जुड़े पांच मामले दर्ज हैं। पुलिस अब उसके पुराने आपराधिक रिकॉर्ड और अवैध हथियार कारोबार से जुड़े संबंधों की भी जांच कर रही है।
कार्रवाई के दौरान पुलिस ने चार लोगों को हिरासत में लिया है। इनसे पूछताछ कर पूरे नेटवर्क की जानकारी जुटाई जा रही है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इस अवैध कारतूस फैक्ट्री का संचालन किन लोगों के सहयोग से किया जा रहा था और इसके तार कहां-कहां तक जुड़े हुए हैं।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अवैध हथियार और कारतूस निर्माण करने वालों के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जा रहा है। इस कार्रवाई को भी इसी अभियान के तहत बड़ी सफलता माना जा रहा है। अधिकारियों के मुताबिक, मामले में शामिल सभी लोगों की पहचान की जा रही है और जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस अब बरामद सामग्री की तकनीकी जांच भी करा रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि कारतूस किस प्रकार के हथियारों के लिए तैयार किए जा रहे थे। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि इनका इस्तेमाल किसी आपराधिक घटना में तो नहीं किया गया।
स्थानीय पुलिस का कहना है कि अवैध हथियार कारोबार पर पूरी तरह रोक लगाने के लिए लगातार कार्रवाई जारी रहेगी। पुलिस टीम इस पूरे मामले में जुड़े अन्य आरोपियों और सहयोगियों की तलाश कर रही है। अधिकारियों ने बताया कि जांच पूरी होने के बाद मामले में और भी गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
पूर्वी चंपारण में हुई इस कार्रवाई को पुलिस की बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है, क्योंकि अवैध कारतूस निर्माण जैसी गतिविधियां अपराधियों को हथियार उपलब्ध कराने का बड़ा माध्यम बन सकती हैं। पुलिस का कहना है कि ऐसे नेटवर्क को पूरी तरह खत्म करने के लिए सख्त कार्रवाई की जाएगी।





