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पटना। बिहार में सरकारी अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार और आय से अधिक संपत्ति के मामलों में आर्थिक अपराध इकाई (EOU) की कार्रवाई जारी है। इसी कड़ी में गुरुवार, 8 अक्टूबर को बिहार पुलिस की आर्थिक अपराध इकाई ने योजना एवं विकास विभाग में कार्यरत कार्यपालक अभियंता नारद कुमार दास के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की। जांच एजेंसी ने बिहार के चार जिलों में उनके पांच अलग-अलग ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। नारद कुमार दास पर अपनी ज्ञात वैध आय से लगभग 83 लाख 53 हजार 200 रुपये अधिक संपत्ति अर्जित करने का आरोप है। प्रारंभिक जांच में यह संपत्ति उनकी ज्ञात आय से लगभग 64.93 प्रतिशत अधिक आंकी गई है।
आर्थिक अपराध इकाई के अधिकारियों के अनुसार, कार्यपालक अभियंता नारद कुमार दास के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के संबंध में विश्वसनीय जानकारी प्राप्त हुई थी। इस सूचना के आधार पर जांच शुरू की गई। जांच में मिले प्रारंभिक साक्ष्यों के बाद बुधवार, 7 अक्टूबर को उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई।जांच एजेंसी ने इस मामले में पटना स्थित निगरानी की विशेष अदालत से तलाशी वारंट प्राप्त किया। इसके बाद पुलिस उपाधीक्षक स्तर के अधिकारियों के नेतृत्व में विशेष टीमों का गठन किया गया। इन टीमों ने गुरुवार सुबह भागलपुर, मुंगेर, मुजफ्फरपुर और पटना में एक साथ तलाशी अभियान शुरू किया।
ईओयू की कार्रवाई के तहत सबसे पहले मुंगेर में कार्यपालक अभियंता के किराये के आवास और सरकारी कार्यालय की तलाशी ली गई। मुंगेर के कासिम बाजार थाना क्षेत्र के बेलन बाजार स्थित बंगाली टोला में उनके किराये के मकान पर जांच टीम पहुंची। इसके अलावा स्थानीय क्षेत्र अभियंत्रण संगठन के कार्य प्रमंडल कार्यालय में भी दस्तावेजों की जांच की गई।बताया गया है कि नारद कुमार दास वर्ष 2024 से मुंगेर में स्थानीय क्षेत्र अभियंत्रण संगठन के कार्यपालक अभियंता के रूप में पदस्थापित हैं। इसके अतिरिक्त उनके पास जिला परिषद मुंगेर के कार्यपालक अभियंता का अतिरिक्त प्रभार भी है।
मुंगेर के अलावा जांच एजेंसी ने भागलपुर जिले में उनके निजी आवास पर भी छापेमारी की। यह आवास तिलकामांझी थाना क्षेत्र के हनुमान पथ में स्थित है। गुरुवार सुबह आर्थिक अपराध इकाई की टीम पुलिस बल के साथ यहां पहुंची और संपत्ति से संबंधित दस्तावेजों की जांच शुरू की।मुजफ्फरपुर में भी जांच टीम ने नारद कुमार दास से जुड़े एक फ्लैट की तलाशी ली। यह फ्लैट काजी मोहम्मदपुर थाना क्षेत्र के नया टोला स्थित राधिका अपार्टमेंट में है। जांच एजेंसी ने अपार्टमेंट के फ्लैट संख्या 2एफ में दस्तावेजों, नकदी और अन्य संपत्तियों की पड़ताल की।
इसी तरह राजधानी पटना के रूपसपुर थाना क्षेत्र के कुसुमपुरम मोहल्ले में स्थित एक आवास पर भी ईओयू की टीम ने दबिश दी। इस प्रकार चार जिलों में कुल पांच स्थानों पर एक साथ तलाशी अभियान चलाया गया।छापेमारी के दौरान जांच एजेंसी को बड़ी मात्रा में नकदी भी बरामद हुई है। प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार, मुजफ्फरपुर स्थित ठिकाने से लगभग 50 लाख रुपये नकद मिले। नकदी की मात्रा अधिक होने के कारण नोट गिनने की मशीन मंगानी पड़ी।
बाद की रिपोर्टों में बरामद नकदी की राशि 50 लाख रुपये से अधिक बताई गई है। हालांकि, अलग-अलग समय पर सामने आए आंकड़ों में अंतर होने के कारण अंतिम बरामदगी का निर्धारण जांच एजेंसी की समेकित रिपोर्ट के आधार पर ही किया जा सकेगा।जांच के दौरान अधिकारियों ने बैंक खातों, संपत्ति के दस्तावेजों, निवेश से जुड़े रिकॉर्ड और अन्य वित्तीय कागजात की पड़ताल की। आर्थिक अपराध इकाई यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि संबंधित अधिकारी ने अपनी सेवा अवधि के दौरान कितनी संपत्ति अर्जित की और उसके लिए आय के स्रोत क्या थे।ईओयू के पुलिस उपमहानिरीक्षक मानवजीत सिंह ढिल्लों के अनुसार, प्रारंभिक जांच में नारद कुमार दास के पास ज्ञात वैध आय से 83.53 लाख रुपये अधिक संपत्ति होने के साक्ष्य मिले थे। इसी आधार पर मामला दर्ज कर तलाशी की कार्रवाई की गई।
आय से अधिक संपत्ति के मामलों में जांच एजेंसियां संबंधित सरकारी अधिकारी की कुल वैध आय, वेतन, अन्य घोषित आमदनी और अर्जित संपत्तियों की तुलना करती हैं। इसके साथ ही परिवार के नाम पर खरीदी गई संपत्तियों, बैंक खातों तथा विभिन्न प्रकार के निवेश की भी जांच की जा सकती है।यदि किसी अधिकारी की संपत्ति उसकी ज्ञात आय के मुकाबले अधिक पाई जाती है, तो जांच के दौरान उससे संबंधित दस्तावेज और आय के वैध स्रोतों का विवरण महत्वपूर्ण हो जाता है। हालांकि, किसी व्यक्ति के पास आय से अधिक संपत्ति होने का प्रारंभिक आरोप अपने आप में अपराध सिद्ध होने का प्रमाण नहीं होता।
इस मामले में नारद कुमार दास के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(1)(बी) और 13(2) के तहत प्राथमिकी दर्ज किए जाने की जानकारी सामने आई है। इन प्रावधानों के तहत लोक सेवक द्वारा अवैध तरीके से संपत्ति अर्जित करने से संबंधित मामलों की जांच की जाती है।ईओयू की टीम सरकारी कार्यालय में मौजूद विकास योजनाओं, टेंडर आवंटन और भुगतान से संबंधित अभिलेखों की भी जांच कर रही है। इससे यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि अधिकारी की वित्तीय गतिविधियों और सरकारी कार्यों के बीच किसी प्रकार का संबंध था या नहीं।
हालांकि, अभी तक किसी विशेष सरकारी परियोजना में गड़बड़ी या टेंडर में भ्रष्टाचार सिद्ध होने की जानकारी सामने नहीं आई है। इसलिए इस संबंध में अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही निकाला जा सकेगा।इस छापेमारी के बाद मुंगेर और अन्य संबंधित जिलों के सरकारी विभागों में भी कार्रवाई चर्चा का विषय बनी हुई है। विशेष रूप से योजना एवं विकास विभाग से जुड़े एक वरिष्ठ अभियंता के कई ठिकानों पर एक साथ कार्रवाई होने से प्रशासनिक स्तर पर हलचल देखी गई।
आर्थिक अपराध इकाई की जांच में अब तक मिली नकदी और दस्तावेजों का विस्तृत परीक्षण किया जा रहा है। जांच एजेंसी यह भी पता लगाने का प्रयास करेगी कि संबंधित संपत्तियों का वास्तविक स्वामित्व किसके पास है और उनकी खरीद के लिए धन कहां से आया था।इस प्रकार की जांच में दस्तावेजों के सत्यापन के साथ बैंकिंग लेनदेन और संपत्ति के मूल्यांकन की प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण होती है। तलाशी में प्राप्त सामग्री का अध्ययन करने के बाद जांच एजेंसी आगे की कानूनी कार्रवाई पर निर्णय ले सकती है।
फिलहाल कार्यपालक अभियंता नारद कुमार दास के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज है और जांच जारी है। उपलब्ध जानकारी में उनकी गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं हुई है।गुरुवार को चार जिलों के पांच ठिकानों पर हुई इस कार्रवाई में बड़ी मात्रा में नकदी और संपत्ति से संबंधित दस्तावेज मिलने की जानकारी सामने आई है। आर्थिक अपराध इकाई की जांच पूरी होने के बाद ही कथित बेहिसाब संपत्ति की वास्तविक मात्रा और उसके स्रोतों को लेकर स्थिति स्पष्ट होगी।
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