बिहार

मधुबनी कला को दिल्ली में मिलेगा सम्मान

Kavita2
9 Sept 2026 3:41 PM IST
मधुबनी कला को दिल्ली में मिलेगा सम्मान
x

मधुबनी। विश्व प्रसिद्ध मिथिला की पारंपरिक कला मधुबनी पेंटिंग की पहचान अब देश के लोकतंत्र के सबसे बड़े संस्थानों में और मजबूत होने जा रही है। भारत निर्वाचन आयोग ने दिल्ली स्थित अपने आधिकारिक कार्यालयों के लिए मधुबनी पेंटिंग्स उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है। आयोग की पहल से मिथिला की कला, संस्कृति और परंपरा को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलने की उम्मीद है।

भारत निर्वाचन आयोग की ओर से मांगी गई इन कलाकृतियों में मिथिला की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, लोक परंपराओं और पारंपरिक कला शैली की झलक दिखाई देगी। आयोग का उद्देश्य है कि कार्यालय परिसर में लगाई जाने वाली पेंटिंग्स के माध्यम से भारतीय संस्कृति के विविध रंगों को प्रदर्शित किया जा सके।

इस पहल की सबसे खास बात यह है कि मधुबनी पेंटिंग्स की खरीद सीधे स्थानीय कलाकारों और शिल्पकारों से की जाएगी। इससे न केवल पारंपरिक कलाकारों को आर्थिक सहयोग मिलेगा, बल्कि उन्हें अपनी कला को देश के सबसे महत्वपूर्ण संस्थानों में प्रदर्शित करने का अवसर भी मिलेगा।

मधुबनी पेंटिंग बिहार के मिथिला क्षेत्र की सदियों पुरानी लोक कला है। इस कला में प्राकृतिक रंगों, बारीक रेखाओं और विशेष चित्र शैली के माध्यम से देवी-देवताओं, प्रकृति, सामाजिक जीवन, लोक कथाओं और धार्मिक परंपराओं को दर्शाया जाता है। दुनिया भर में इस कला की अपनी अलग पहचान है।

मिथिला की महिलाओं ने पीढ़ियों से इस कला को संरक्षित रखा है। पहले यह कला घरों की दीवारों और आंगनों तक सीमित थी, लेकिन समय के साथ कलाकारों ने इसे कागज, कपड़े और अन्य माध्यमों पर उतारकर वैश्विक स्तर तक पहुंचाया।

भारत निर्वाचन आयोग की यह पहल मधुबनी कला के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर मानी जा रही है। कलाकारों का कहना है कि जब देश का एक प्रमुख संवैधानिक संस्थान मिथिला की कला को अपनाएगा तो इससे स्थानीय कलाकारों का मनोबल बढ़ेगा।

स्थानीय कलाकारों और शिल्पकारों को उम्मीद है कि इस पहल के बाद मधुबनी पेंटिंग को और अधिक प्रोत्साहन मिलेगा। इससे युवा कलाकार भी इस पारंपरिक कला से जुड़ने के लिए प्रेरित होंगे और कला की विरासत आगे बढ़ेगी।

मधुबनी जिले के कलाकार लंबे समय से इस कला को देश-विदेश में पहचान दिलाने के लिए प्रयास कर रहे हैं। कई कलाकारों ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कार भी हासिल किए हैं। अब निर्वाचन आयोग के माध्यम से उनकी कला को एक नया मंच मिलने जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि किसी सरकारी और संवैधानिक संस्थान में पारंपरिक कला का उपयोग केवल सजावट तक सीमित नहीं होता, बल्कि यह देश की सांस्कृतिक विविधता को सम्मान देने का माध्यम भी होता है। निर्वाचन आयोग की यह पहल इसी दिशा में एक सकारात्मक कदम है।

मधुबनी पेंटिंग में इस्तेमाल होने वाले विषय भी इसकी खास पहचान हैं। इसमें रामायण, कृष्ण लीला, विवाह संस्कार, सूर्य पूजा, प्राकृतिक दृश्य और ग्रामीण जीवन से जुड़े चित्र बनाए जाते हैं। यही विविधता इस कला को दुनिया भर में लोकप्रिय बनाती है।

कलाकारों के लिए यह अवसर रोजगार और सम्मान दोनों लेकर आ सकता है। स्थानीय स्तर पर पेंटिंग बनाने वाले शिल्पकारों को सीधे काम मिलने से उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। साथ ही, नई पीढ़ी के कलाकारों को भी अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलेगा।

भारत निर्वाचन आयोग की ओर से मांगी गई पेंटिंग्स को लेकर स्थानीय स्तर पर उत्साह देखा जा रहा है। कलाकारों का कहना है कि मिथिला की कला का लोकतंत्र के प्रमुख संस्थान तक पहुंचना पूरे क्षेत्र के लिए गौरव की बात है।

इस पहल से मधुबनी पेंटिंग को केवल एक कला रूप के रूप में नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक पहचान के महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में भी मजबूती मिलेगी। आने वाले समय में ऐसी पहलों से देश की अन्य पारंपरिक कलाओं को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

फिलहाल स्थानीय कलाकार आयोग की जरूरतों के अनुसार कलाकृतियां तैयार करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। यह कदम मिथिला की कला परंपरा को राष्ट्रीय मंच पर स्थापित करने के साथ-साथ कलाकारों के लिए नई संभावनाओं के द्वार खोलने वाला साबित हो सकता है।

Next Story