बिहार

Gorakhpur–सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे के लिए पश्चिम चंपारण में भूमि अधिग्रहण तेज, मापी कार्य शुरू

Kavita2
8 May 2026 5:38 PM IST
Gorakhpur–सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे के लिए पश्चिम चंपारण में भूमि अधिग्रहण तेज, मापी कार्य शुरू
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Bihar बिहार: गोरखपुर–सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे परियोजना को लेकर पश्चिम चंपारण जिले में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया में तेजी आ गई है। इस महत्वाकांक्षी सड़क परियोजना के तहत जिले में लगभग 27 किलोमीटर क्षेत्र में एक्सप्रेसवे का निर्माण प्रस्तावित है, जिसके लिए प्रशासनिक स्तर पर जमीन की मापी का काम शुरू कर दिया गया है।

जिला प्रशासन की ओर से संबंधित क्षेत्रों में सर्वे और सीमांकन की प्रक्रिया तेज कर दी गई है, ताकि परियोजना के लिए आवश्यक भूमि का सही निर्धारण किया जा सके। अधिकारियों के अनुसार, भूमि अधिग्रहण कार्य को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के लिए विशेष टीमों का गठन किया गया है।

इस प्रक्रिया के तहत प्रभावित किसानों और भूमि मालिकों को मुआवजा भुगतान सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक दस्तावेजों की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि मुआवजा प्राप्त करने के लिए किसानों को भूमि पर कब्जा प्रमाणित करने वाला एलपीसी (लैंड पजेशन सर्टिफिकेट) बनवाना अनिवार्य होगा।

प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि एलपीसी के बिना मुआवजा प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाई जा सकेगी, इसलिए सभी प्रभावित भूमि स्वामियों को समय पर आवश्यक कागजी कार्रवाई पूरी करने की सलाह दी गई है।

इस परियोजना को क्षेत्रीय कनेक्टिविटी और यातायात सुविधा के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। एक्सप्रेसवे के निर्माण से न केवल उत्तर बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश के बीच आवागमन आसान होगा, बल्कि व्यापार और परिवहन को भी गति मिलने की उम्मीद है।

भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया शुरू होने के बाद कई गांवों में हलचल देखी जा रही है। किसान अपने दस्तावेजों को लेकर संबंधित कार्यालयों का रुख कर रहे हैं ताकि मुआवजा प्रक्रिया में किसी तरह की देरी न हो।

अधिकारियों के अनुसार, परियोजना को निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरा करने के लिए सभी जरूरी प्रशासनिक कदम तेजी से उठाए जा रहे हैं। साथ ही यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि प्रभावित लोगों को नियमानुसार उचित मुआवजा दिया जाए।

गोरखपुर–सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे को क्षेत्रीय विकास की दृष्टि से एक बड़ी परियोजना माना जा रहा है, जिससे पश्चिम चंपारण सहित आसपास के जिलों में बुनियादी ढांचे को नई गति मिलने की संभावना है।

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