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सीवान। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के अध्यक्ष और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव शुक्रवार, 6 नवंबर 2026 को वर्ष 2011 के आदर्श आचार संहिता उल्लंघन से जुड़े एक पुराने मामले में सीवान की अदालत में पेश हुए। करीब 15 साल पुराने इस मामले में लालू यादव की पेशी को लेकर सुबह से ही राजनीतिक हलचल तेज रही। अदालत में उनकी उपस्थिति के दौरान समर्थकों और पार्टी कार्यकर्ताओं की भीड़ देखने को मिली। इस मामले में लालू प्रसाद यादव को जमानत मिलने की जानकारी भी सामने आई है। हालांकि, जमानत मिलने का मतलब मुकदमे से बरी होना नहीं है और मामले की आगे की न्यायिक प्रक्रिया जारी रहेगी।यह मामला वर्ष 2011 में सीवान जिले के दारौंदा विधानसभा क्षेत्र में हुए उपचुनाव से जुड़ा है। उस दौरान लालू प्रसाद यादव राष्ट्रीय जनता दल के उम्मीदवार के समर्थन में चुनाव प्रचार करने पहुंचे थे। आरोप है कि चुनावी सभा के दौरान निर्धारित समय सीमा के बाद भी लाउडस्पीकर का इस्तेमाल किया गया था, जिसे आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन माना गया।इस मामले में स्थानीय प्रशासन की ओर से शिकायत दर्ज कराई गई थी। इसके बाद लालू प्रसाद यादव के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया शुरू हुई। लंबे समय से लंबित मामले में शुक्रवार को उनकी अदालत में व्यक्तिगत उपस्थिति हुई।
जानकारी के अनुसार, 8 अक्टूबर 2011 को लालू प्रसाद यादव दारौंदा विधानसभा क्षेत्र में राजद प्रत्याशी परमेश्वर सिंह के समर्थन में चुनाव प्रचार करने पहुंचे थे। चुनावी सभा के दौरान निर्धारित समय के बाद भी भाषण और ध्वनि विस्तारक यंत्र के इस्तेमाल को लेकर विवाद सामने आया था।उस समय चुनाव आयोग के निर्देशों के अनुसार प्रचार गतिविधियों के लिए निर्धारित नियमों का पालन अनिवार्य था। प्रशासन ने आरोप लगाया था कि सभा के दौरान इन नियमों का उल्लंघन किया गया। इसके आधार पर संबंधित अधिकारियों ने कार्रवाई करते हुए प्राथमिकी दर्ज कराई थी।वर्ष 2011 में हुई इस घटना के बाद मामला अदालत पहुंचा। हालांकि, कानूनी प्रक्रिया विभिन्न कारणों से लंबे समय तक चलती रही। करीब डेढ़ दशक बाद लालू यादव की व्यक्तिगत पेशी ने एक बार फिर इस पुराने चुनावी विवाद को चर्चा में ला दिया है।मामले की सुनवाई सीवान की एसीजेएम-1 अदालत में हुई। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, अदालत में लालू यादव को उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों का सारांश सुनाया गया। इसके बाद आगे की न्यायिक प्रक्रिया का रास्ता साफ हुआ।
अदालत में आरोपों का सारांश सुनाए जाने का उद्देश्य संबंधित व्यक्ति को यह स्पष्ट करना होता है कि उसके खिलाफ किस घटना और किन कानूनी प्रावधानों के आधार पर मुकदमा चल रहा है। इसके बाद अभियोजन पक्ष को अपने आरोपों के समर्थन में साक्ष्य और गवाह प्रस्तुत करने का अवसर मिलता है।लालू प्रसाद यादव की पेशी के दौरान उनके समर्थकों की मौजूदगी भी चर्चा में रही। सीवान और आसपास के क्षेत्रों में राजद का राजनीतिक आधार रहा है। ऐसे में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के अदालत पहुंचने की जानकारी मिलने के बाद कार्यकर्ताओं में उत्सुकता देखी गई।लालू यादव गुरुवार को ही सीवान पहुंच गए थे, ताकि शुक्रवार को निर्धारित समय पर अदालत में उपस्थित हो सकें। उनके आगमन के बाद से ही स्थानीय राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई थीं।लालू प्रसाद यादव बिहार की राजनीति के प्रमुख नेताओं में शामिल हैं। वह राज्य के मुख्यमंत्री और केंद्र सरकार में रेल मंत्री रह चुके हैं। राष्ट्रीय जनता दल के संस्थापक अध्यक्ष के रूप में उन्होंने बिहार की राजनीति में लंबे समय तक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।उनकी राजनीतिक यात्रा में कई उतार-चढ़ाव आए हैं। चुनावी राजनीति, गठबंधन, सामाजिक न्याय और पिछड़े वर्गों के प्रतिनिधित्व जैसे मुद्दों को लेकर वह लंबे समय से सक्रिय रहे हैं। उनके खिलाफ विभिन्न न्यायिक मामलों की कार्यवाही भी समय-समय पर राजनीतिक चर्चा का विषय बनती रही है।
हालांकि, सीवान का मौजूदा मामला वर्ष 2011 के चुनाव प्रचार के दौरान कथित आदर्श आचार संहिता उल्लंघन से संबंधित है। इसे लालू यादव के खिलाफ चल रहे अन्य मामलों से अलग समझना आवश्यक है।भारतीय चुनाव व्यवस्था में आदर्श आचार संहिता का विशेष महत्व है। चुनाव कार्यक्रम घोषित होने के बाद राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों को चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशों का पालन करना होता है।इसका उद्देश्य चुनावी प्रक्रिया को स्वतंत्र, निष्पक्ष और शांतिपूर्ण बनाए रखना है। चुनाव प्रचार के दौरान लाउडस्पीकर के इस्तेमाल, सभाओं के आयोजन, सरकारी संसाधनों के उपयोग और सार्वजनिक स्थानों पर प्रचार गतिविधियों के लिए निर्धारित नियम लागू होते हैं।चुनाव आयोग की ओर से प्रचार के समय और ध्वनि विस्तारक यंत्रों के इस्तेमाल को लेकर भी दिशा-निर्देश जारी किए जाते हैं। इन नियमों का उल्लंघन होने पर संबंधित परिस्थितियों और लागू कानूनी प्रावधानों के अनुसार कार्रवाई की जा सकती है।लालू यादव से जुड़े इस मामले में भी विवाद का मुख्य आधार चुनावी सभा के दौरान लाउडस्पीकर का कथित इस्तेमाल और निर्धारित समय सीमा का पालन नहीं करना था।
यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि घटना को लगभग 15 वर्ष बीत चुके हैं। इतने लंबे समय बाद किसी चुनावी विवाद की सुनवाई होना न्यायिक प्रक्रिया में लगने वाले समय को भी सामने लाता है।अदालत में पेशी के बाद लालू प्रसाद यादव को जमानत मिलने से उन्हें तत्काल राहत मिली है। हालांकि, मामले में आरोपों की सत्यता का अंतिम निर्धारण न्यायालय की सुनवाई और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही होगा।आने वाली सुनवाई में अभियोजन पक्ष की ओर से गवाहों और साक्ष्यों को प्रस्तुत किए जाने की प्रक्रिया महत्वपूर्ण रहेगी। बचाव पक्ष को भी कानूनी प्रावधानों के अनुसार अपना पक्ष रखने और आरोपों का जवाब देने का अवसर मिलेगा।राजनीतिक दृष्टि से लालू यादव की इस पेशी को लेकर बिहार में चर्चा बनी हुई है। राष्ट्रीय जनता दल के लिए उनके नेतृत्व का विशेष महत्व है। वहीं, विपक्षी दल भी उनके खिलाफ चल रहे विभिन्न मामलों की न्यायिक गतिविधियों पर नजर बनाए रखते हैं।फिलहाल 2011 के आदर्श आचार संहिता उल्लंघन मामले में शुक्रवार की पेशी और जमानत मिलने के बाद आगे की सुनवाई महत्वपूर्ण होगी। अदालत में प्रस्तुत साक्ष्य और गवाहों के बयान यह तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे कि पुराने चुनावी मामले का अंतिम परिणाम क्या होगा।
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