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बिहार में हजारों शिक्षकों की नौकरी पर संकट, तेजस्वी यादव ने CM सम्राट चौधरी को लिखा पत्र

Kavita2
18 Oct 2026 9:47 AM IST
बिहार में हजारों शिक्षकों की नौकरी पर संकट, तेजस्वी यादव ने CM सम्राट चौधरी को लिखा पत्र
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पटना। बिहार में हजारों नियोजित शिक्षकों और उर्दू-बांग्ला विशेष शिक्षकों की नौकरी पर संकट के बीच राज्य की राजनीति गरमा गई है। बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के नेता तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को पत्र लिखकर शिक्षकों की सेवा सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। तेजस्वी यादव ने सुप्रीम कोर्ट के जुलाई 2026 के एक आदेश का हवाला देते हुए आशंका जताई है कि इसके कारण वर्ष 2015 के बाद नियुक्त अप्रशिक्षित शिक्षकों और वर्ष 2015-16 में नियुक्त उर्दू एवं बांग्ला विशेष शिक्षकों की नौकरी खतरे में पड़ सकती है। उन्होंने मुख्यमंत्री से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने और सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल करने की मांग की है। तेजस्वी यादव ने अपना पत्र सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर भी साझा किया है।

तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में उठाए गंभीर सवाल

तेजस्वी यादव ने 17 अक्टूबर 2026 को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को पत्र लिखकर राज्य के हजारों शिक्षकों की नौकरी और उनके भविष्य को लेकर चिंता जताई।

उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के जुलाई में आए आदेश के बाद बिहार के नियोजित शिक्षकों सहित वर्ष 2015 के बाद नियुक्त अप्रशिक्षित शिक्षकों की सेवा पर गंभीर संकट पैदा हो गया है।

विशेष रूप से वर्ष 2015-16 में नियुक्त उर्दू और बांग्ला विशेष शिक्षकों के बीच असमंजस की स्थिति बनी हुई है।

तेजस्वी यादव का कहना है कि इन शिक्षकों ने वर्षों तक विद्यालयों में अपनी सेवाएं दी हैं। ऐसे में उनकी नौकरी समाप्त होने की आशंका से शिक्षकों और उनके परिवारों के सामने अनिश्चितता पैदा हो गई है।

उन्होंने राज्य सरकार से शिक्षकों के हितों की रक्षा करने और कानूनी स्तर पर प्रभावी कदम उठाने की अपील की है।

वर्ष 2014 में शुरू हुई थी शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया

तेजस्वी यादव ने अपने पत्र में उर्दू और बांग्ला विशेष शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया का उल्लेख किया है।

उनका कहना है कि इन शिक्षकों की नियुक्ति किसी नई भर्ती प्रक्रिया के तहत नहीं की गई थी, बल्कि वर्ष 2014 में शुरू हुई नियोजन प्रक्रिया के अंतर्गत ही हुई थी।

उन्होंने बताया कि संबंधित विभागीय आदेशों और पूर्व निर्धारित प्रक्रिया के अनुपालन में वर्ष 2015-16 के दौरान इन शिक्षकों का नियोजन किया गया था।

तेजस्वी यादव के अनुसार, यदि नियुक्ति प्रक्रिया पहले शुरू हो चुकी थी, तो केवल नियुक्ति की तारीख 31 मार्च 2015 के बाद होने के आधार पर इन शिक्षकों को सेवा समाप्ति के दायरे में रखना उचित नहीं होगा।

उन्होंने सरकार से नियुक्ति प्रक्रिया की वास्तविक परिस्थितियों और संबंधित दस्तावेजों के आधार पर निर्णय लेने की मांग की है।

प्रशिक्षित और सक्षमता परीक्षा पास शिक्षकों को मिले संरक्षण

तेजस्वी यादव ने कहा कि प्रभावित शिक्षकों में कई ऐसे हैं, जो नियुक्ति के बाद आवश्यक प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके हैं।

इसके अलावा बड़ी संख्या में शिक्षकों ने सक्षमता परीक्षा भी उत्तीर्ण की है। इनमें से कुछ शिक्षक वर्तमान में विशिष्ट शिक्षक, प्रधान शिक्षक या विद्यालय अध्यापक के रूप में सेवाएं दे रहे हैं।

उन्होंने सवाल उठाया कि जिन शिक्षकों ने आवश्यक प्रशिक्षण प्राप्त कर लिया है और निर्धारित परीक्षाएं उत्तीर्ण कर ली हैं, उनकी सेवा सुरक्षा पर विचार किया जाना चाहिए।

तेजस्वी यादव ने सरकार से मांग की है कि डीएलएड प्रशिक्षण पूरा करने वाले, सक्षमता परीक्षा पास करने वाले और बिहार लोक सेवा आयोग की भर्ती प्रक्रिया से नियुक्त शिक्षकों की स्थिति की अलग से समीक्षा की जाए।

उनका कहना है कि इन शिक्षकों की योग्यता और वर्षों की सेवाओं को ध्यान में रखते हुए उचित कानूनी संरक्षण दिया जाना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल करने की मांग

तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के समक्ष प्रभावी कानूनी पैरवी करने की मांग की है।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार को शीर्ष अदालत में पुनर्विचार याचिका दाखिल करने पर विचार करना चाहिए, ताकि प्रभावित शिक्षकों की स्थिति को स्पष्ट किया जा सके।

तेजस्वी यादव का मानना है कि शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया, प्रशिक्षण, योग्यता और सेवा अवधि से संबंधित तथ्यों को न्यायालय के सामने रखा जाना आवश्यक है।

हालांकि, संबंधित आदेश की कानूनी व्याख्या और किसी शिक्षक की सेवा पर उसके वास्तविक प्रभाव का निर्धारण न्यायालय के आदेश तथा लागू सेवा नियमों के आधार पर ही होगा।

गायब अभिलेखों के लिए शिक्षकों को जिम्मेदार न ठहराएं

मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में तेजस्वी यादव ने नियोजन संबंधी अभिलेखों के गायब होने और प्रशासनिक कमियों का मुद्दा भी उठाया है।

उन्होंने कहा कि यदि नियुक्ति प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेजों के रखरखाव में कोई कमी रही है, तो उसकी जवाबदेही संबंधित अधिकारियों की होनी चाहिए।

ऐसी प्रशासनिक गलतियों के लिए शिक्षकों को दंडित करना उचित नहीं होगा।

तेजस्वी यादव ने सरकार से मांग की है कि जिन मामलों में आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं, उनकी निष्पक्ष जांच कराई जाए और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।

उन्होंने कहा कि शिक्षकों की सेवा सुरक्षा से जुड़े मामलों में संवेदनशीलता और न्यायसंगत दृष्टिकोण अपनाना आवश्यक है।

पहले भी उठ चुका है उर्दू-बांग्ला शिक्षकों का मामला

उर्दू और बांग्ला विशेष शिक्षकों की सेवा सुरक्षा का मुद्दा इससे पहले भी सामने आ चुका है।

चार अक्टूबर 2026 को बिहार विधान परिषद सदस्य कारी मोहम्मद शोएब ने भी मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को पत्र लिखकर उर्दू-बांग्ला शिक्षकों को सेवा समाप्ति की प्रक्रिया से संरक्षण देने की मांग की थी।

उन्होंने प्राथमिक शिक्षा निदेशक के एक अक्टूबर के पत्र का उल्लेख करते हुए इन शिक्षकों के मामलों की अलग से समीक्षा करने का अनुरोध किया था।

शोएब ने भी कहा था कि संबंधित शिक्षकों की नियुक्तियां वर्ष 2014 में प्रारंभ प्रक्रिया के अंतर्गत 2015-16 में हुई थीं।

हजारों शिक्षक परिवारों के भविष्य का सवाल

बिहार में शिक्षकों की सेवा सुरक्षा का मुद्दा केवल सरकारी नियुक्ति तक सीमित नहीं है। इसका संबंध उन परिवारों की आर्थिक स्थिति से भी है, जो शिक्षकों की नौकरी पर निर्भर हैं।

लंबे समय से शिक्षा विभाग में सेवाएं दे रहे शिक्षकों के सामने नौकरी समाप्त होने की आशंका गंभीर चिंता पैदा कर सकती है।

शिक्षकों की सेवा से जुड़ी अनिश्चितता का असर विद्यालयों में पढ़ाई की निरंतरता पर भी पड़ सकता है।

इसी कारण तेजस्वी यादव ने सरकार से इस मामले में जल्द निर्णय लेने और प्रभावित शिक्षकों को कानूनी प्रक्रिया के अनुरूप राहत देने की मांग की है।

अब सरकार के अगले कदम पर नजर

तेजस्वी यादव के पत्र के बाद शिक्षकों की सेवा सुरक्षा का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक चर्चा में आ गया है।

आरजेडी नेता ने मुख्यमंत्री से सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल करने, प्रशिक्षित शिक्षकों को संरक्षण देने और प्रशासनिक कमियों के लिए जिम्मेदारी तय करने की मांग की है।

फिलहाल उपलब्ध रिपोर्टों में इस पत्र पर राज्य सरकार की ओर से किसी अंतिम निर्णय या पुनर्विचार याचिका दाखिल किए जाने की पुष्टि नहीं हुई है।

अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि बिहार सरकार प्रभावित शिक्षकों की सेवा सुरक्षा को लेकर क्या कानूनी और प्रशासनिक कदम उठाती है।

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