बिहार

कुत्तों में ब्लड प्रेशर और हार्ट की बीमारियों का खतरा बढ़ा

Admin Delhi 1
21 Aug 2023 8:30 AM GMT
कुत्तों में ब्लड प्रेशर और हार्ट की बीमारियों का खतरा बढ़ा
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फिजियोथेरेपी विधि से हो रहा इलाज

पटना: खराब दिनचर्या और असंतुलित भोजन सिर्फ इंसानों को ही बीमार नहीं कर रहा बल्कि इसकी वजह से पालतू जानवर भी प्रभावित हो रहे हैं. जिस प्रकार से इंसानों में ब्लड प्रेशर बढ़ना, कम होना, हार्टअटैक, लिवर, किडनी फेल होने जैसी समस्याएं आ रही हैं, ठीक उसी प्रकार राजधानी के पालतू जानवरों में भी अब ऐसी समस्याएं बढ़ने लगी हैं.

कई कुत्तों की इन बीमारियों से मौत तक हो जा रही है. राजधानी के पालतू कुत्ते इन गंभीर बीमारियों से ग्रसित होकर बिहार पशु चिकित्सा महाविद्यालय अस्पताल समनपुरा पहुंच रहे हैं. यहां पर इन कुत्तों का फिजियोथेरेपी विधि से निशुल्क इलाज किया जा रहा है.

140 से 160 के बीच होना चाहिए बीपी कुत्तों की कई प्रजातियां हैं. प्रजातियों के अनुसार उनका सामान्य रक्तचाप (ब्लड प्रेशर) अधिकतम 140 से 160 और न्यूनतम 50 से 80 के बीच होना चाहिए. यदि अधिकतम 200 और न्यूनतम 100 पहुंच जाए तो कुत्ते को लकवा ग्रस्त होने की आशंका बढ़ जाती है. डॉक्टरों के मुताबिक पालतू कुत्तों का बीपी नियमित जांच कराते रहना चाहिए.

फिजियोथेरेपी विधि से हो रहा इलाज

बिहार वेटनरी अस्पताल में पहली बार लकवा से ग्रसित कुत्तों का इलाज फिजियोथेरिपी विधि से शुरू की गई है. डॉ. अर्चना कुमारी ने बताया कि लकवा से ग्रसित कुत्ते फिजियोथेरेपी से महज दस दिनों में स्वस्थ होकर दौड़ने लगते हैं. फिजियोथेरिपी से इस बीमारी में सौ फीसदी रिकवरी देखी जा रही है. जरूरत के अनुसार कुत्तों को नर्व मेडिसिन और कैल्शियम दिया जा जा रहा है. कुत्तों को कोई भी सूई या दर्द की दवा नहीं दी जाती है. डॉ. अर्चना ने बताया कि इन बीमारियों का बड़ा कारण कुत्तों का वजन बढ़ना और विटामीन डी की कमी भी है. इससे लकवा मारने का भी खतरा होता है.

10 प्रजातियों के कुत्ते लोग अधिक पालते हैं

वेटनरी अस्पताल में लकवा से ग्रसित एक से दो कुत्ते रोज पहुंच रहे हैं. इसकी पहचान इस रूप में होती कि वे पिछले दोनों पैर से लाचार हो जाते. वे ठीक से चल नहीं पाते और पैर को घसीट कर चलते हैं. वेटनरी डॉक्टर की मानें तो इस तरह के लक्षण कुत्तों में आने पर तुरंत इलाज कराना चाहिए.

आजकल कुत्ते पालना हर किसी का शौक बन चुका है. हर वर्ग के लोगों में अलग-अलग प्रजातियों के कुत्तों को पालने के प्रति आकर्षण देखा जा रहा है. अमूमन लोग लैब्राडोर, जर्मन शेफर्ड, बुलडॉग, पब, मालटीज, बीगलस, गोल्डन, जैक रसेल टेरियर, न्यूफाउंडलैंड और पोडल प्रजातियों के कुत्तों को रखने का शौक पाले हुए हैं.

ये रखें सावधानी

● वेटनरी डॉक्टरों से ही इलाज कराएं

● कोई भी इंजेक्शन लगवाने से बचें

● कुत्तों को रोज टहलाएं ताकि वजन नियंत्रित रह सके

● रोजाना एक्सरसाइज कराएं

● बीपी की नियमित अंतराल पर जांच कराएं

● वेटनरी डॉक्टर से समय-समय पर सलाह लेकर डाइट प्लान बनवाएं

● दो समय ही भोजन दें, भोजन में पोष्टिक खाद्य पदार्थ दें

● पालतू जानवरों के व्यवहार में परिवर्तन, वजन बढ़ने जैसी समस्याओं पर नजर रखें

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