बिहार

कैंसर का अधूरा इलाज, वह भी किस्तों में

Admin Delhi 1
28 July 2023 5:30 AM GMT
कैंसर का अधूरा इलाज, वह भी किस्तों में
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भागलपुर न्यूज़: पूर्वी बिहार, कोसी-सीमांचल के 13 जिलों में सबसे बड़ा अस्पताल माना जाने वाला जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (मायागंज अस्पताल) के पास दर्द-ए-कैंसर का इलाज नहीं है. यहां पर किस्तों में कैंसर का इलाज किया जा रहा है, वह भी आधा-अधूरा. यहां पर कैंसर की जांच कहीं और तो इलाज के नाम पर कीमोथेरेपी व कैंसर स्क्रीनिंग कहीं और की जा रही है.

मायागंज अस्पताल में हर माह औसतन विभिन्न प्रकार के कैंसर मरीज स्क्रीनिंग व जांच के दौरान मिल रहे हैं. लेकिन यहां पर कैंसर के पूर्ण इलाज की सुविधा न होने से मरीजों को इलाज के लिए दिल्ली, पटना, मुजफ्फरपुर या मुंबई जैसे शहरों की तरफ रुख करना पड़ता है. आलम ये है कि इस अस्पताल में आज की तारीख में रेडियोथेरेपी जैसी सुविधा भी कैंसर के मरीजों को मयस्सर नहीं है. मायागंज अस्पताल के अधीक्षक डॉ. उदय नारायण सिंह ने बताया कि फैब्रिकेटेड अस्पताल तैयार हो जाएगा तो वहीं पर स्थायी रूप से पेलिएटिव एंड कीमोथेरेपी डे केयर सेंटर को बना दिया जाएगा. रहीं बात कैंसर अस्पताल बनाने की तो इसकी जानकारी हमें नहीं है. पटना से आने पर ही इससे जुड़ी फाइल का अवलोकन होगा, तभी कुछ कहा जा सकेगा.

ओपीडी में स्क्रीनिंग और जांच दूसरी बिल्डिंग में

मायागंज अस्पताल के ओपीडी बिल्डिंग में कैंसर स्क्रीनिंग की व्यवस्था है. अगर संदिग्ध निकला तो ब्रेस्ट कैंसर, ओवेरियन कैंसर, पैनिक्रिएटिस कैंसर व गैस्ट्रिक कैंसर की जांच अधीक्षक कार्यालय के दूसरे तल पर कराने लिए जाना पड़ेगा. अगर नाक, कान गला से लेकर लीवर, स्किन, मुंख का कैंसर है तो इसकी जांच के लिए मरीज को तो या पटना या फिर मुजफ्फरपुर जाना पड़ेगा. वहीं कैंसर के लास्ट स्टेज में पहुंच चुके मरीजों के दर्द को कम करने के लिए या फिर कीमोथेरेपी कराने के लिए एमसीएच बिल्डिंग जाना पड़ेगा.

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