बिहार

सम्राट चौधरी और भूपेंद्र यादव की अहम मुलाकात,कई प्रस्तावों पर चर्चा

Rajeshwari Nishad
3 Nov 2026 7:28 PM IST
सम्राट चौधरी और भूपेंद्र यादव की अहम मुलाकात,कई प्रस्तावों पर चर्चा
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नई दिल्ली। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मंगलवार, 3 नवंबर 2026 को नई दिल्ली में केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव से महत्वपूर्ण मुलाकात की। इस दौरान बिहार में औद्योगिक विकास, आधारभूत संरचना के विस्तार, पर्यटन को बढ़ावा देने और वन भूमि के उपयोग से संबंधित कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर विस्तृत चर्चा हुई। बैठक में गयाजी में नए चिड़ियाघर के निर्माण, जमुई में उद्योगों की स्थापना, अमृतसर-कोलकाता औद्योगिक गलियारे और वाल्मीकि टाइगर रिजर्व से जुड़ी परियोजनाओं को लेकर केंद्र सरकार से आवश्यक स्वीकृतियां प्राप्त करने पर विशेष जोर दिया गया।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की इस मुलाकात को बिहार में औद्योगिक निवेश और विकास परियोजनाओं को गति देने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राज्य सरकार की कई परियोजनाओं के लिए वन एवं पर्यावरण संबंधी मंजूरी आवश्यक है। ऐसे में केंद्रीय मंत्री के साथ हुई चर्चा से इन प्रस्तावों को आगे बढ़ाने का रास्ता खुल सकता है। हालांकि, बैठक में चर्चा होने का अर्थ यह नहीं है कि सभी परियोजनाओं को अंतिम स्वीकृति मिल गई है।
गयाजी में 45.9 हेक्टेयर भूमि पर चिड़ियाघर बनाने का प्रस्ताव
बैठक में गयाजी में प्रस्तावित चिड़ियाघर के निर्माण का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया। राज्य सरकार ने लगभग 45.9 हेक्टेयर भूमि पर चिड़ियाघर विकसित करने की योजना तैयार की है।इस परियोजना के लिए केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण से आवश्यक अनुमोदन प्राप्त करने का प्रस्ताव रखा गया।गयाजी धार्मिक और ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण शहर है। यहां हर साल बड़ी संख्या में देश-विदेश से श्रद्धालु और पर्यटक पहुंचते हैं।नए चिड़ियाघर के निर्माण से जिले में पर्यटन की संभावनाओं का विस्तार हो सकता है। इसके साथ ही स्थानीय स्तर पर रोजगार और व्यावसायिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।प्रस्तावित चिड़ियाघर वन्यजीव संरक्षण, पर्यावरण शिक्षा और जैव विविधता के प्रति जागरूकता बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।हालांकि, निर्माण शुरू होने से पहले परियोजना को संबंधित प्राधिकरणों के नियमों और पर्यावरणीय मानकों के अनुसार मंजूरी मिलना आवश्यक होगा।
जमुई में बड़े औद्योगिक निवेश की तैयारी
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बैठक के दौरान जमुई जिले में प्रस्तावित औद्योगिक परियोजनाओं के लिए भूमि की उपलब्धता का विषय भी उठाया।जानकारी के अनुसार, जिले में सौर ऊर्जा और इस्पात उद्योगों की स्थापना के लिए लगभग 9,000 एकड़ भूमि की आवश्यकता बताई गई है।इसमें से करीब 4,340 एकड़ वन भूमि के गैर-वन उपयोग के लिए स्वीकृति का प्रस्ताव केंद्र सरकार के समक्ष रखा गया।जमुई में इन औद्योगिक परियोजनाओं को मंजूरी मिलने से निवेश की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।सौर ऊर्जा परियोजनाओं से स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। वहीं, इस्पात उद्योगों के विकास से रोजगार और संबंधित औद्योगिक गतिविधियों का विस्तार हो सकता है।हालांकि, इतनी बड़ी मात्रा में वन भूमि के उपयोग से जुड़े प्रस्तावों के लिए पर्यावरणीय प्रभाव, वन संरक्षण और संबंधित कानूनी प्रावधानों का परीक्षण महत्वपूर्ण होगा।
डोभी में इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर पर चर्चा
बैठक में गयाजी जिले के डोभी में प्रस्तावित इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर की स्थापना से जुड़े विषयों पर भी चर्चा हुई।यह परियोजना अमृतसर-कोलकाता औद्योगिक गलियारे के अंतर्गत प्रस्तावित है।इस क्लस्टर के विकास के लिए लगभग 1,600 एकड़ भूमि की आवश्यकता बताई गई है, जिसमें से 1,308.72 एकड़ वन भूमि के गैर-वन उपयोग की स्वीकृति का प्रस्ताव रखा गया है।औद्योगिक क्लस्टर विकसित होने से विभिन्न उद्योगों को एक ही क्षेत्र में आवश्यक बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है।इससे विनिर्माण गतिविधियों, परिवहन, लॉजिस्टिक्स और स्थानीय कारोबार को बढ़ावा मिलने की संभावना है।बिहार सरकार औद्योगिक विकास के माध्यम से रोजगार के नए अवसर पैदा करने और निवेश आकर्षित करने की दिशा में प्रयास कर रही है।ऐसे में डोभी की इस परियोजना को राज्य की औद्योगिक रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।
वाल्मीकि टाइगर रिजर्व में सड़क परियोजना का प्रस्ताव
पश्चिम चंपारण जिले के वाल्मीकि टाइगर रिजर्व से संबंधित महत्वपूर्ण प्रस्ताव भी केंद्रीय मंत्री के समक्ष रखा गया।बैठक में लगभग 5.8 किलोमीटर लंबे मदनपुर-पनियहवा मार्ग की मरम्मत और इसे प्रस्तावित एलिवेटेड कॉरिडोर के रूप में विकसित करने के विषय पर चर्चा हुई।इस परियोजना का उद्देश्य क्षेत्र में सड़क संपर्क को बेहतर बनाना है।वाल्मीकि टाइगर रिजर्व बिहार का महत्वपूर्ण वन्यजीव संरक्षण क्षेत्र है। यहां बाघों सहित अनेक वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास है।इसलिए सड़क परियोजना को आगे बढ़ाते समय वन्यजीवों की आवाजाही और प्राकृतिक आवास की सुरक्षा का विशेष ध्यान रखना आवश्यक होगा।एलिवेटेड कॉरिडोर का प्रस्ताव इसी संवेदनशीलता के मद्देनजर महत्वपूर्ण माना जा सकता है। हालांकि, इसकी अंतिम रूपरेखा संबंधित पर्यावरणीय और वन्यजीव स्वीकृतियों पर निर्भर करेगी।मुंगेर में औद्योगिक क्षेत्र के विस्तार की योजनामुख्यमंत्री ने मुंगेर जिले के तारापुर अनुमंडल अंतर्गत संग्रामपुर में प्रस्तावित औद्योगिक क्षेत्र के विकास का मुद्दा भी उठाया।
इस परियोजना के लिए कुल 114 एकड़ भूमि की आवश्यकता बताई गई है।
इसमें से लगभग 84 एकड़ जंगल-झाड़ भूमि के उपयोग की अनुमति प्राप्त करने का प्रस्ताव रखा गया।यदि परियोजना को नियमानुसार स्वीकृति मिलती है, तो मुंगेर और आसपास के क्षेत्रों में औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिल सकता है।स्थानीय स्तर पर छोटे और मध्यम उद्योगों के विकास की संभावनाएं भी बढ़ सकती हैं।भीमबांध में ईको टूरिज्म को बढ़ावा देने की तैयारीबैठक के दौरान मुंगेर जिले के भीमबांध क्षेत्र में ईको टूरिज्म विकसित करने की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई।भीमबांध अपनी प्राकृतिक सुंदरता, जंगलों और गर्म जलस्रोतों के लिए जाना जाता है।राज्य सरकार इस क्षेत्र में पर्यावरण के अनुकूल पर्यटन सुविधाओं के विकास की संभावनाएं तलाश रही है।इसके लिए आवश्यक वैधानिक और पर्यावरणीय स्वीकृतियां प्राप्त करने का प्रस्ताव रखा गया।ईको टूरिज्म के विकास से स्थानीय लोगों को पर्यटन से जुड़े रोजगार और स्वरोजगार के अवसर मिल सकते हैं। हालांकि, पर्यटकों की बढ़ती संख्या के बीच वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखना भी महत्वपूर्ण होगा।
केंद्र और राज्य के समन्वय से विकास को मिलेगी गति
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के बीच हुई इस मुलाकात में बिहार की कई बड़ी विकास परियोजनाओं से संबंधित प्रस्तावों पर विचार-विमर्श हुआ।इनमें औद्योगिक निवेश, सड़क निर्माण, वन्यजीव संरक्षण और पर्यटन विकास से जुड़ी योजनाएं शामिल हैं।राज्य सरकार के लिए इन परियोजनाओं की प्रगति महत्वपूर्ण है, लेकिन वन भूमि के गैर-वन उपयोग के प्रस्तावों में पर्यावरण संरक्षण और विकास के बीच संतुलन बनाए रखना भी आवश्यक है।आने वाले समय में संबंधित विभागों की समीक्षा और कानूनी प्रक्रियाओं के बाद ही इन प्रस्तावों पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।फिलहाल इस मुलाकात से बिहार की लंबित और प्रस्तावित विकास परियोजनाओं को लेकर केंद्र तथा राज्य सरकार के बीच समन्वय बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।
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