
पटना। बिहार में एमएलसी चुनाव को लेकर कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के बीच जारी खींचतान का असर अब मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ चल रहे आंदोलन पर भी दिखाई देने लगा है। गुरुवार को पटना में INDIA गठबंधन की ओर से आयोजित ‘ज्ञानेश हटाओ, लोकतंत्र बचाओ’ लोकभवन मार्च के दौरान कांग्रेस और राजद के बीच समन्वय की कमी सामने आई। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम के नेतृत्व में पार्टी के नेता निर्धारित समय पर शहीद स्मारक पहुंचे, लेकिन उससे करीब आधा घंटा पहले ही तेजस्वी यादव के नेतृत्व में विपक्षी दलों का मार्च निकल चुका था। विपक्ष का शिष्टमंडल लोकभवन की ओर भी कूच कर गया। इस घटनाक्रम ने गठबंधन के भीतर तालमेल और आपसी संबंधों को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
बिहार में एमएलसी चुनाव को लेकर दोनों दलों के बीच चल रही खींचतान के बीच यह मार्च विपक्षी एकजुटता का प्रदर्शन करने के लिहाज से महत्वपूर्ण था। हालांकि, मार्च के समय को लेकर सामने आए घटनाक्रम ने कांग्रेस और राजद के बीच समन्वय की स्थिति को चर्चा में ला दिया। एक ओर कांग्रेस नेता निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार शहीद स्मारक पहुंचे, वहीं दूसरी ओर तेजस्वी यादव के नेतृत्व में विपक्षी मोर्चा पहले ही मार्च निकाल चुका था।
कांग्रेस पहुंची, उससे पहले निकल गया तेजस्वी यादव का मार्च
गुरुवार को पटना में ‘ज्ञानेश हटाओ, लोकतंत्र बचाओ’ के नारे के साथ INDIA गठबंधन के लोकभवन मार्च का कार्यक्रम रखा गया था। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम के नेतृत्व में कांग्रेसी निर्धारित समय पर शहीद स्मारक पहुंचे। लेकिन वहां पहुंचने पर स्थिति यह थी कि तेजस्वी यादव के नेतृत्व में विपक्षी मोर्चा करीब आधा घंटा पहले ही मार्च निकाल चुका था।
इसके बाद विपक्ष का शिष्टमंडल लोकभवन की ओर कूच कर गया। कार्यक्रम के समय में इस अंतर ने कांग्रेस और राजद के बीच समन्वय को लेकर चर्चा तेज कर दी। निर्धारित समय पर पहुंची कांग्रेस की टीम और उससे पहले निकल चुके विपक्षी मोर्चे के घटनाक्रम ने आंदोलन के दौरान दोनों दलों के बीच तालमेल की कमी को सामने ला दिया।
हालांकि, उपलब्ध जानकारी में यह स्पष्ट नहीं है कि मार्च के समय में अंतर किन परिस्थितियों के कारण आया या दोनों दलों के बीच कार्यक्रम को लेकर अंतिम स्तर पर क्या बातचीत हुई थी।
एमएलसी चुनाव को लेकर पहले से चल रही खींचतान
बिहार एमएलसी चुनाव को लेकर कांग्रेस और राजद के बीच टकराव की बात सामने आ रही है। इसी राजनीतिक खींचतान का असर अब ज्ञानेश कुमार के खिलाफ चल रहे आंदोलन पर भी दिखाई देने लगा है। दोनों दल INDIA गठबंधन का हिस्सा हैं और चुनाव आयोग के मुद्दे पर विरोध प्रदर्शन के लिए साथ आए थे, लेकिन पटना में मार्च के दौरान सामने आए घटनाक्रम ने आपसी तालमेल को लेकर सवाल पैदा किए हैं।
बिहार की राजनीति में कांग्रेस और राजद के संबंध गठबंधन की रणनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण हैं। ऐसे में एमएलसी चुनाव को लेकर दोनों दलों के बीच मतभेद और उसके बीच आंदोलन के कार्यक्रम में सामने आया समय का अंतर राजनीतिक रूप से चर्चा का विषय बन गया है।
हालांकि, इस घटना के आधार पर यह निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी कि दोनों दलों के बीच आंदोलन को लेकर कोई औपचारिक विवाद हुआ। फिलहाल उपलब्ध जानकारी यह बताती है कि कांग्रेस निर्धारित समय पर शहीद स्मारक पहुंची, जबकि तेजस्वी यादव के नेतृत्व में विपक्षी मोर्चा उससे पहले ही मार्च निकाल चुका था।
‘ज्ञानेश हटाओ, लोकतंत्र बचाओ’ के तहत लोकभवन मार्च
गुरुवार को पटना में आयोजित मार्च का नाम ‘ज्ञानेश हटाओ, लोकतंत्र बचाओ’ रखा गया था। इसके तहत विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराने के लिए लोकभवन की ओर मार्च किया। तेजस्वी यादव के नेतृत्व में विपक्षी मोर्चा पहले रवाना हुआ और उसका शिष्टमंडल लोकभवन की ओर कूच कर गया।
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम के नेतृत्व में पार्टी के नेता निर्धारित समय पर शहीद स्मारक पहुंचे। लेकिन तब तक विपक्षी मोर्चा आगे बढ़ चुका था। इस घटनाक्रम के कारण मार्च के दौरान दोनों पक्षों की समय-सारणी में अंतर साफ दिखाई दिया।
आंदोलन का उद्देश्य चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दे पर विरोध दर्ज कराना था, लेकिन बिहार एमएलसी चुनाव को लेकर कांग्रेस और राजद के बीच जारी खींचतान ने इस कार्यक्रम को राजनीतिक चर्चा के केंद्र में ला दिया।
विपक्षी एकजुटता और समन्वय पर उठे सवाल
पटना में हुए इस घटनाक्रम ने विपक्षी गठबंधन के भीतर समन्वय की अहमियत को फिर सामने ला दिया है। एक ही आंदोलन में शामिल दलों के नेताओं के अलग-अलग समय पर पहुंचने और मार्च पहले ही निकल जाने से कार्यक्रम के संचालन को लेकर चर्चा हो रही है।
राजद की ओर से तेजस्वी यादव के नेतृत्व में विपक्षी मोर्चा पहले ही आगे बढ़ चुका था, जबकि कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम अपनी टीम के साथ निर्धारित समय पर शहीद स्मारक पहुंचे। इस स्थिति में दोनों दलों के बीच कार्यक्रम संबंधी तालमेल को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।
फिलहाल, उपलब्ध जानकारी में दोनों दलों की ओर से इस घटनाक्रम पर अलग-अलग विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। इसलिए मार्च के समय में अंतर को लेकर किसी खास मंशा का दावा नहीं किया जा सकता।
आगे क्या होगा?
बिहार एमएलसी चुनाव को लेकर कांग्रेस और राजद के बीच जारी खींचतान के बीच गुरुवार के लोकभवन मार्च का घटनाक्रम महत्वपूर्ण हो गया है। एक तरफ मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आंदोलन जारी है, वहीं दूसरी ओर गठबंधन के सहयोगी दलों के बीच समन्वय को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
तेजस्वी यादव के नेतृत्व में विपक्षी मोर्चा कांग्रेस के निर्धारित समय से करीब आधा घंटा पहले मार्च निकाल चुका था और उसका शिष्टमंडल लोकभवन की ओर बढ़ गया। बाद में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम के नेतृत्व में पार्टी के नेता शहीद स्मारक पहुंचे।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि एमएलसी चुनाव को लेकर दोनों दलों के बीच चल रही खींचतान का INDIA गठबंधन के साझा कार्यक्रमों पर आगे क्या असर पड़ता है। फिलहाल, पटना का यह घटनाक्रम विपक्षी आंदोलन के बीच कांग्रेस और राजद के तालमेल को लेकर चर्चा का विषय बना हुआ है।





