बिहार

पश्चिम चंपारण में बाढ़ का असर CM सम्राट चौधरी ने किया एरियल सर्वे

Ratna Netam
30 Sept 2026 7:03 PM IST
पश्चिम चंपारण में बाढ़ का असर CM सम्राट चौधरी ने किया एरियल सर्वे
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पटना। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बुधवार को पश्चिम चंपारण और सारण जिले के बाढ़ प्रभावित इलाकों का हवाई सर्वेक्षण कर स्थिति का जायजा लिया। मुख्यमंत्री ने पश्चिम चंपारण जिले के बगहा, बैरिया प्रखंड के बथना, योगापट्टी प्रखंड के मच्छरगांवा तथा नौतन प्रखंड के शिवराजपुर, बनकटवा और आसपास के प्रभावित क्षेत्रों को हेलीकॉप्टर से देखा। उन्होंने बाढ़ के पानी से घिरे गांवों, नदियों के बढ़े जलस्तर और प्रभावित इलाकों की स्थिति का आकलन किया।
मुख्यमंत्री ने सारण जिले के मकेर प्रखंड के हैजलपुर पंचायत क्षेत्र में टूटे तटबंध का भी हवाई निरीक्षण किया। पटना से पश्चिम चंपारण जाने के दौरान उन्होंने विभिन्न नदियों के जलस्तर और बाढ़ से प्रभावित क्षेत्रों को देखा। राज्य के कई इलाकों में लगातार बारिश और नदियों के बढ़े जलस्तर के कारण बाढ़ की स्थिति बनी हुई है। प्रशासन को राहत एवं बचाव कार्यों में किसी तरह की लापरवाही नहीं बरतने के निर्देश दिए गए हैं।
हवाई सर्वेक्षण के बाद मुख्यमंत्री बैरिया प्रखंड के बथना स्थित पीएम श्री राजकीयकृत प्लस टू उच्च विद्यालय परिसर में संचालित बाढ़ राहत शिविर पहुंचे। यहां उन्होंने बाढ़ पीड़ित परिवारों के लिए की गई व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से राहत शिविर में रहने वाले लोगों की संख्या, भोजन, स्वास्थ्य सेवाओं और अन्य बुनियादी सुविधाओं के बारे में जानकारी ली।
राहत शिविर में संचालित सामुदायिक रसोई का मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से जायजा लिया। उन्होंने खाना बनाने और बाढ़ प्रभावित लोगों को भोजन उपलब्ध कराने की व्यवस्था के बारे में अधिकारियों से जानकारी ली। इस दौरान मुख्यमंत्री स्वयं सामुदायिक रसोई में पहुंचे और वहां मौजूद लोगों को भोजन भी परोसा।
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि जब तक स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं हो जाती और बाढ़ प्रभावित परिवार सुरक्षित रूप से अपने घरों को नहीं लौट जाते, तब तक सामुदायिक रसोई का संचालन जारी रखा जाए। उन्होंने कहा कि प्रभावित लोगों को भोजन और जरूरी सुविधाओं की कमी नहीं होनी चाहिए।
इसके बाद मुख्यमंत्री ने राहत शिविर में बनाए गए मेडिकल कैंप का निरीक्षण किया। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों और चिकित्सा कर्मियों से उपलब्ध दवाओं तथा इलाज की व्यवस्था के बारे में जानकारी ली। बाढ़ के दौरान दूषित पानी और जलजमाव के कारण बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है, इसलिए प्रशासन को चिकित्सा व्यवस्था मजबूत रखने के निर्देश दिए गए।
मुख्यमंत्री ने स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता और शौचालय की व्यवस्था को भी देखा। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि राहत शिविर में रहने वाले प्रत्येक व्यक्ति को साफ पानी और स्वच्छता से जुड़ी जरूरी सुविधाएं मिलनी चाहिए। महिलाओं और पुरुषों के लिए अलग-अलग रहने की व्यवस्था का भी उन्होंने निरीक्षण किया।
बाढ़ प्रभावित इलाकों में केवल लोगों के लिए ही नहीं बल्कि पशुओं के लिए भी राहत की व्यवस्था की गई है। मुख्यमंत्री ने पशु राहत शिविर और पशु शेड का निरीक्षण किया। उन्होंने पशुओं के लिए चारा, सुरक्षित स्थान और चिकित्सा व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा। सरकार की ओर से प्रभावित क्षेत्रों में पशुओं के लिए कैंप और स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए गए हैं।
राहत शिविर में संचालित अस्थायी आंगनबाड़ी बाल शिविर का भी मुख्यमंत्री ने जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने वहां मौजूद बच्चों से बातचीत की और उनकी स्थिति के बारे में जानकारी ली। अधिकारियों को बच्चों, महिलाओं, बुजुर्गों और बीमार लोगों की जरूरतों पर विशेष ध्यान देने को कहा गया।
मुख्यमंत्री ने जिला प्रशासन को निर्देश दिया कि बाढ़ प्रभावित परिवारों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराई जाए। राहत सामग्री वितरण से लेकर सुरक्षित आवास और चिकित्सा सेवाओं तक सभी व्यवस्थाओं की लगातार निगरानी की जाए। उन्होंने अधिकारियों को प्रभावित इलाकों में सतर्क रहने और जरूरत पड़ने पर तत्काल राहत एवं बचाव कार्य शुरू करने को कहा।
पश्चिम चंपारण में गंडक नदी के बढ़े जलस्तर के कारण कई इलाकों में बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है। लगातार बारिश और नदी में अधिक पानी आने के कारण तटबंधों पर भी दबाव बढ़ा है। पश्चिम चंपारण में कई स्थानों पर तटबंधों को नुकसान पहुंचने की जानकारी सामने आई है और जल संसाधन विभाग मरम्मत एवं सुरक्षा कार्य में जुटा है।
मुख्यमंत्री ने बथना में अधिकारियों के साथ बाढ़ की स्थिति और राहत कार्यों की समीक्षा भी की। उन्होंने कहा कि प्रभावित इलाकों में प्रशासन पूरी तरह सक्रिय रहे और प्रत्येक जरूरतमंद परिवार तक सरकारी सहायता पहुंचाई जाए। अधिकारियों को जलस्तर, तटबंधों और संवेदनशील क्षेत्रों की लगातार निगरानी करने के निर्देश दिए गए।
सम्राट चौधरी ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के निरीक्षण के दौरान गंडक और कोसी नदी के तटबंधों को मजबूत करने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि तटबंधों को मजबूत और सुरक्षित बनाने के लिए सर्वे का काम किया जा रहा है, ताकि भविष्य में बाढ़ के दौरान नुकसान के खतरे को कम किया जा सके।
इससे पहले भी मुख्यमंत्री राज्य के कई बाढ़ प्रभावित जिलों का हवाई सर्वेक्षण कर चुके हैं। 28 सितंबर को उन्होंने वैशाली, सारण, पूर्वी चंपारण और गोपालगंज के प्रभावित क्षेत्रों का जायजा लिया था। लगातार बदल रही बाढ़ की स्थिति को देखते हुए राज्य सरकार राहत एवं बचाव कार्यों की निगरानी कर रही है।
बुधवार के दौरे में मुख्यमंत्री का मुख्य फोकस पश्चिम चंपारण के प्रभावित परिवारों तक राहत पहुंचाने और जमीनी स्तर पर चल रही व्यवस्थाओं की जांच पर रहा। उन्होंने प्रशासन को साफ निर्देश दिया कि जब तक बाढ़ का असर खत्म नहीं होता, राहत शिविरों, सामुदायिक रसोई, मेडिकल कैंप और पशु राहत केंद्रों का संचालन जरूरत के अनुसार जारी रखा जाए।
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