बिहार

दुर्गा पूजा मेले में गुंडागर्दी, 50 हजार की रंगदारी नहीं देने पर दुकानदार पर पिस्टल से हमला

Kavita2
20 Oct 2026 1:21 PM IST
दुर्गा पूजा मेले में गुंडागर्दी, 50 हजार की रंगदारी नहीं देने पर दुकानदार पर पिस्टल से हमला
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सीतामढ़ी। बिहार के सीतामढ़ी जिले में दुर्गा पूजा के उत्साह के बीच रंगदारी मांगने और दुकानदार पर जानलेवा हमला करने का मामला सामने आया है। रुन्नीसैदपुर प्रखंड के महिंदवारा थाना क्षेत्र अंतर्गत सिरखिरिया गांव में आयोजित दुर्गा पूजा मेले में बाइक सवार दो बदमाशों ने कथित तौर पर एक फास्ट फूड दुकानदार से 50 हजार रुपये की रंगदारी मांगी। दुकानदार ने रुपये देने से इनकार किया तो आरोपियों ने उसके साथ मारपीट की और दुकान में तोड़फोड़ कर गल्ले में रखी नकदी लूट ली। हमले में दुकानदार संतोष कुमार घायल हो गए। घटना के बाद मेला परिसर में अफरातफरी मच गई। पीड़ित ने आरोप लगाया है कि एक हमलावर ने पिस्टल की बट से उनके सिर पर वार किया, जिससे वह जख्मी हो गए।

दुर्गा पूजा मेले में फास्ट फूड की दुकान चला रहे थे संतोष

जानकारी के अनुसार, रुन्नीसैदपुर थाना क्षेत्र के तिलक ताजपुर गांव के वार्ड संख्या दो निवासी संतोष कुमार दुर्गा पूजा के अवसर पर सिरखिरिया गांव में आयोजित मेले में फास्ट फूड की दुकान चला रहे थे।

दुर्गा पूजा को लेकर मेले में श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों की आवाजाही बनी हुई थी। संतोष कुमार भी अपनी दुकान पर ग्राहकों को खाद्य सामग्री बेच रहे थे।

इसी दौरान बाइक पर सवार दो युवक उनकी दुकान के पास पहुंचे। आरोप है कि दोनों ने दुकानदार से 50 हजार रुपये रंगदारी की मांग शुरू कर दी।

अचानक इतनी बड़ी रकम मांगे जाने पर संतोष कुमार ने रुपये देने से इनकार कर दिया। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच विवाद शुरू हो गया।

रंगदारी नहीं देने पर पिस्टल की बट से किया हमला

पीड़ित संतोष कुमार के अनुसार, रकम देने से मना करने पर आरोपियों ने उनके साथ गाली-गलौज और मारपीट शुरू कर दी।

संतोष ने आरोप लगाया कि बरहेत्ता गांव निवासी मनोज कुमार ने पिस्टल की बट से उनके सिर पर हमला कर दिया। इससे उनके सिर में चोट आई और वह घायल हो गए।

हमले के बाद दुकान के आसपास मौजूद लोगों में अफरातफरी की स्थिति पैदा हो गई।

पिस्टल से हमला किए जाने के आरोप ने घटना को और गंभीर बना दिया है। हालांकि, आरोपियों के पास मौजूद हथियार और घटना की वास्तविक परिस्थितियों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

दुकान में तोड़फोड़ कर नकदी लूटने का आरोप

पीड़ित दुकानदार का आरोप है कि मारपीट के दौरान बदमाशों ने उनकी फास्ट फूड दुकान में तोड़फोड़ भी की।

दुकान में रखा सामान क्षतिग्रस्त कर दिया गया और गल्ले में मौजूद नकदी निकाल ली गई।

दुकानदार के अनुसार, आरोपियों ने रंगदारी देने से इनकार करने के बाद पूरी घटना को अंजाम दिया।

हालांकि, गल्ले से कितनी नकदी लूटी गई, इसकी सटीक राशि उपलब्ध विवरण में स्पष्ट नहीं है।

दुकान में हुए नुकसान का भी विस्तृत आकलन सामने नहीं आया है।

घटना के बाद संतोष कुमार को आर्थिक नुकसान के साथ शारीरिक चोट भी पहुंची है।

मेला परिसर में मची अफरातफरी

दुर्गा पूजा के अवसर पर आयोजित मेले में इस तरह की घटना सामने आने से स्थानीय लोगों में चिंता बढ़ गई।

धार्मिक आयोजनों के दौरान बड़ी संख्या में लोग परिवार और बच्चों के साथ मेला घूमने पहुंचते हैं। ऐसे स्थानों पर मारपीट और हथियारों के इस्तेमाल की घटनाएं गंभीर सुरक्षा जोखिम पैदा कर सकती हैं।

दुकानदार पर हमले और तोड़फोड़ की घटना ने आयोजन स्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था के महत्व को एक बार फिर सामने ला दिया है।

मेला परिसर में व्यापार करने वाले दुकानदारों के लिए भी इस प्रकार की घटनाएं चिंता का विषय हैं।

त्योहारी अवसरों पर अस्थायी दुकान लगाने वाले कारोबारी कमाई की उम्मीद से मेले में पहुंचते हैं। ऐसे में रंगदारी की मांग और हिंसा से उनकी आजीविका प्रभावित हो सकती है।

पीड़ित दुकानदार ने लगाए गंभीर आरोप

घायल संतोष कुमार ने आरोप लगाया है कि आरोपियों ने उनसे जबरन 50 हजार रुपये की मांग की थी।

उनके मुताबिक, रंगदारी नहीं देने पर मारपीट की गई और दुकान में नुकसान पहुंचाया गया।

पीड़ित ने बरहेत्ता गांव निवासी मनोज कुमार को हमले में शामिल बताया है। घटना में दूसरे युवक की भूमिका की भी जांच आवश्यक है।

हालांकि, पीड़ित के बयान में लगाए गए आरोपों को जांच से पहले प्रमाणित तथ्य नहीं माना जा सकता।

पुलिस के लिए यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि आरोपियों ने पहले भी दुकानदार से रुपये मांगे थे या यह मांग पहली बार मेले में की गई थी।

हथियार के इस्तेमाल से जुड़ी जांच महत्वपूर्ण

संतोष कुमार ने पिस्टल की बट से हमला किए जाने का आरोप लगाया है।

यदि जांच में हथियार के इस्तेमाल की पुष्टि होती है, तो मामला और गंभीर हो सकता है।

जांच में यह स्पष्ट करना जरूरी होगा कि हमलावर के पास वास्तविक आग्नेयास्त्र था या कोई अन्य वस्तु।

इसके अलावा घटना के समय मौजूद लोगों के बयान और आसपास लगे संभावित सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग भी महत्वपूर्ण साक्ष्य बन सकते हैं।

घटनास्थल से उपलब्ध अन्य प्रमाणों के आधार पर आरोपियों की भूमिका स्पष्ट की जा सकती है।

फिलहाल इस मामले में किसी गिरफ्तारी या हथियार की बरामदगी की पुष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं है।

त्योहारों में दुकानदारों की सुरक्षा जरूरी

दुर्गा पूजा, दशहरा और अन्य त्योहारों के दौरान ग्रामीण तथा शहरी क्षेत्रों में बड़ी संख्या में मेले आयोजित किए जाते हैं।

इन आयोजनों में स्थानीय दुकानदार अस्थायी स्टॉल लगाकर खिलौने, मिठाई, फास्ट फूड और अन्य सामान की बिक्री करते हैं।

ऐसे कारोबारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है, क्योंकि भीड़भाड़ वाले स्थानों पर विवाद होने की स्थिति में आम लोग भी प्रभावित हो सकते हैं।

मेला आयोजकों और स्थानीय प्रशासन के लिए सुरक्षा प्रबंधन, पर्याप्त रोशनी और आपात सहायता की व्यवस्था बनाए रखना आवश्यक है।

किसी दुकानदार से जबरन रुपये मांगना, धमकी देना और हिंसा करना गंभीर आपराधिक आरोप हैं।

घटना की निष्पक्ष जांच की जरूरत

सीतामढ़ी के सिरखिरिया गांव में हुई इस घटना के बाद कई सवाल सामने आए हैं।

सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि आरोपी किस उद्देश्य से दुकानदार के पास पहुंचे थे और क्या रंगदारी मांगने की घटना के पीछे पहले से कोई विवाद था।

इसके अलावा दुकान से नकदी लूटने और तोड़फोड़ किए जाने के आरोपों की पुष्टि भी जांच के माध्यम से होनी जरूरी है।

पीड़ित के बयान, चोट संबंधी चिकित्सकीय रिपोर्ट और प्रत्यक्षदर्शियों की जानकारी मामले की जांच में उपयोगी हो सकती है।

रंगदारी की घटना से व्यापारियों में चिंता

दुर्गा पूजा मेले में फास्ट फूड दुकानदार से 50 हजार रुपये मांगने और विरोध करने पर मारपीट किए जाने के आरोपों ने स्थानीय व्यापारियों की सुरक्षा को लेकर चिंता पैदा की है।

घायल संतोष कुमार ने दुकान में तोड़फोड़ और नकदी लूटने का भी आरोप लगाया है।

फिलहाल घटना के संबंध में पुलिस की विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया और आगे की कानूनी कार्रवाई की जानकारी सामने नहीं आई है।

ऐसे में मामले की निष्पक्ष जांच और आरोपों के आधार पर उचित कानूनी कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी।

यह घटना दर्शाती है कि धार्मिक आयोजनों में श्रद्धालुओं के साथ दुकानदारों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी जरूरी है, ताकि उत्सव के दौरान लोग बिना किसी भय के अपनी गतिविधियां संचालित कर सकें।

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