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फर्जी सर्टिफिकेट से विदेश भेजने का खेल
पटना: खाड़ी देशों में नौकरी पाने की चाह रखने वाले लोगों के लिए फर्जी अनुभव प्रमाणपत्र तैयार करने वाले एक गिरोह का पटना पुलिस ने खुलासा किया है। आरोप है कि जिन लोगों के पास तकनीकी काम का पर्याप्त अनुभव नहीं था, उन्हें महज दो-तीन दिन का प्रशिक्षण देकर प्रमाणपत्रों में पांच से छह साल का अनुभव दिखाया जाता था। इसके बाद इन दस्तावेजों का इस्तेमाल विदेश में नौकरी की प्रक्रिया में किया जाता था।
गांधी मैदान थाना पुलिस ने एग्जीबिशन रोड स्थित चांदी व्यापार भवन की पांचवीं मंजिल पर संचालित एक ट्रैवल कंसल्टेंसी के कार्यालय में छापेमारी की। यहां से पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान तनवीर आलम, शाहिद अनवर और तौसिफ आलम के रूप में बताई गई है। पुलिस ने तीनों को अदालत में पेश करने के बाद न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।
पुलिस की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि गिरोह खाड़ी देशों में प्लंबर, फिटर, इलेक्ट्रीशियन और अन्य तकनीकी पदों पर नौकरी दिलाने के लिए लोगों से संपर्क करता था।जिन अभ्यर्थियों के पास संबंधित काम का प्रशिक्षण या अनुभव नहीं होता था, उन्हें कुछ दिनों की ट्रेनिंग दी जाती थी। इसके बाद उनके नाम से पांच से छह साल का अनुभव दिखाने वाले कथित फर्जी प्रमाणपत्र तैयार किए जाते थे। आरोप है कि इन प्रमाणपत्रों को तैयार करने के लिए प्रतिष्ठित कंपनियों और संस्थानों के नाम का भी इस्तेमाल किया गया। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि प्रमाणपत्रों पर लगाए गए कथित फर्जी हस्ताक्षर और मुहरें कहां और किसके जरिए तैयार की जाती थीं।
छापेमारी के दौरान पुलिस को बड़ी संख्या में पासपोर्ट भी मिले हैं। अलग-अलग रिपोर्टों में इनकी संख्या 108 से 118 के बीच बताई गई है। ये पासपोर्ट बिहार के अलावा असम, उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों के लोगों के बताए जा रहे हैं। कार्यालय से विभिन्न संस्थानों के नाम पर बने अनुभव प्रमाणपत्र, पैथोलॉजी जांच से संबंधित बुकलेट और कथित फर्जी इंटरव्यू लेटर भी बरामद किए गए। इसके अलावा तीन लैपटॉप, एक सीपीयू, पांच मोबाइल फोन और करीब 1.44 लाख रुपये नकद मिले हैं। पुलिस को विदेशी मुद्रा भी मिली है, जिसमें यूएई दिरहम, ओमानी रियाल और सऊदी रियाल शामिल हैं।
पुलिस अब बरामद लैपटॉप और मोबाइल फोन की जांच कर रही है। इनके जरिए यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि गिरोह के संपर्क में कितने लोग थे और नेटवर्क में अन्य कौन-कौन शामिल हैं।
जांच में यह भी पता लगाया जा रहा है कि विदेश में नौकरी की तलाश कर रहे लोगों तक गिरोह के सदस्य कैसे पहुंचते थे। रिपोर्ट के मुताबिक इंटरनेट मीडिया और दूसरे माध्यमों से नौकरी का प्रचार कर इच्छुक लोगों को कार्यालय बुलाया जाता था। जरूरी दस्तावेज नहीं होने की स्थिति में उन्हें दस्तावेज तैयार कराने का भरोसा दिया जाता था और इसके लिए अलग-अलग मद में रकम ली जाती थी। पुलिस को संदेह है कि इस नेटवर्क में तीन गिरफ्तार आरोपियों के अलावा अन्य लोग भी शामिल हो सकते हैं। खास तौर पर कंपनियों के नाम से अनुभव प्रमाणपत्र तैयार करने, हस्ताक्षर और मुहर लगाने तथा दूसरे दस्तावेज बनाने वालों की भूमिका की जांच की जा रही है।
बरामद पासपोर्ट का भी सत्यापन कराया जा रहा है। संबंधित लोगों के नाम-पते की जांच के लिए पासपोर्ट कार्यालय और संबंधित राज्यों की पुलिस से जानकारी ली जा सकती है। फिलहाल तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है और पुलिस पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि कितने लोगों के लिए फर्जी दस्तावेज बनाए गए और इस नेटवर्क में कुल कितने लोग शामिल थे।
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