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भागलपुर में जलयान बने लाइफलाइन
भागलपुर: बिहार के भागलपुर में गंगा के बढ़े जलस्तर और बाढ़ से प्रभावित इलाकों में जलयान लोगों के लिए लाइफलाइन बन गए हैं। कई स्थानों पर सड़क संपर्क प्रभावित होने के कारण प्रशासन नाव और जलयान के जरिए लोगों तक जरूरी सुविधाएं पहुंचा रहा है। इसी क्रम में बियाडा गंगा घाट पर प्रसव पीड़ा से परेशान एक महिला को जलयान की मदद से सुरक्षित घाट तक पहुंचाया गया, जहां पहले से मौजूद एंबुलेंस के जरिए उसे अस्पताल भेजा गया।
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में प्रशासन की टीम लगातार जलमार्ग के जरिए राहत और सहायता पहुंचाने में जुटी है। सड़क मार्ग बाधित होने की स्थिति में नाव और अन्य जलयानों का इस्तेमाल लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के साथ जरूरी सामग्री की आपूर्ति के लिए किया जा रहा है। बियाडा गंगा घाट पर उस समय स्थिति संवेदनशील हो गई, जब बाढ़ प्रभावित इलाके की एक गर्भवती महिला को प्रसव पीड़ा शुरू हो गई। सड़क संपर्क प्रभावित होने के कारण उसे सामान्य तरीके से अस्पताल पहुंचाना मुश्किल था।
इसके बाद महिला को जलयान से बियाडा गंगा घाट तक लाया गया। घाट पर एंबुलेंस की व्यवस्था की गई थी। महिला के पहुंचते ही उसे एंबुलेंस में बैठाकर इलाज के लिए अस्पताल रवाना किया गया। बाढ़ जैसी परिस्थितियों में गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों, बच्चों और बीमार लोगों को अस्पताल तक पहुंचाना बड़ी चुनौती बन जाता है। ऐसे में जलयान प्रभावित इलाकों और मुख्य सड़क संपर्क के बीच महत्वपूर्ण कड़ी साबित हो रहे हैं।
प्रशासन की ओर से केवल लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने का काम ही नहीं किया जा रहा, बल्कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में जरूरत की सामग्री भी पहुंचाई जा रही है। राहत कार्यों के दौरान पशुओं के लिए भी भोजन और चारे की व्यवस्था की गई। बाढ़ के कारण कई इलाकों में पशुपालकों के सामने अपने मवेशियों के लिए चारा जुटाने की समस्या खड़ी हो जाती है। ऐसे क्षेत्रों में जलमार्ग से पशु आहार पहुंचाया जा रहा है।
गंगा के आसपास के निचले क्षेत्रों में पानी बढ़ने से सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ है। कई जगह लोगों को आवागमन के लिए नावों का सहारा लेना पड़ रहा है। ऐसे में प्रशासनिक जलयान लोगों की आवाजाही के साथ आपातकालीन जरूरतों में भी काम आ रहे हैं। विशेष रूप से चिकित्सा आपातकाल में जलयान और एंबुलेंस के बीच समन्वय महत्वपूर्ण साबित हो रहा है। बाढ़ प्रभावित इलाके से मरीज को पहले नाव या जलयान से घाट तक लाया जाता है और वहां से एंबुलेंस के जरिए अस्पताल पहुंचाया जाता है।
बियाडा गंगा घाट पर गर्भवती महिला को इसी व्यवस्था के जरिए अस्पताल तक पहुंचाया गया। इससे बाढ़ के बीच राहत और बचाव कार्यों में जलमार्ग की अहम भूमिका एक बार फिर सामने आई है। प्रशासन की टीम प्रभावित इलाकों में स्थिति पर नजर बनाए हुए है। जरूरत के मुताबिक लोगों को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने का काम जारी है।
बाढ़ के दौरान पशुधन की सुरक्षा भी बड़ी चुनौती होती है। ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी संख्या में परिवारों की आजीविका पशुपालन से जुड़ी होती है। इसलिए राहत कार्यों में पशुओं के लिए चारा और भोजन उपलब्ध कराना भी जरूरी माना जा रहा है। फिलहाल भागलपुर के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में जलयान राहत व्यवस्था का अहम हिस्सा बने हुए हैं। गर्भवती महिला को समय पर एंबुलेंस तक पहुंचाने से लेकर पशुओं के लिए भोजन पहुंचाने तक इनका इस्तेमाल किया जा रहा है।
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