
पटना। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के संस्थापक और प्रथम सरसंघचालक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार के जीवन और विचारों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए बड़ी घोषणा की है। उन्होंने कहा कि डॉ. हेडगेवार का जीवन संघर्ष, त्याग, अनुशासन, समर्पण और राष्ट्र निर्माण के प्रति प्रतिबद्धता का उदाहरण रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार में दो करोड़ से अधिक युवा हैं और विशेष रूप से जेन-जी यानी नई पीढ़ी को डॉ. हेडगेवार के जीवन तथा उनके विचारों से परिचित कराना आवश्यक है। इसके लिए राज्य सरकार पटना के बाद बिहार के अन्य जिलों में भी उनके जीवन पर आधारित महानाट्य का मंचन कराएगी।
मुख्यमंत्री शुक्रवार, 23 अक्टूबर को पटना के सम्राट अशोक कन्वेंशन केंद्र परिसर स्थित बापू सभागार में आयोजित महानाट्य 'संघ सृजन का आविष्कार : युगप्रवर्तक डॉ. हेडगेवार' के शुभारंभ समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस कार्यक्रम का आयोजन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर बिहार सरकार के कला एवं संस्कृति विभाग की ओर से किया गया।
मुख्यमंत्री ने दीप जलाकर किया महानाट्य का शुभारंभ
कार्यक्रम की शुरुआत मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने दीप प्रज्ज्वलित कर की। इसके बाद उन्होंने डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में उपस्थित कलाकारों द्वारा प्रस्तुत महानाट्य का अवलोकन भी किया।
इस नाट्य प्रस्तुति का निर्माण नागपुर की नादब्रह्म संस्था ने किया है। महानाट्य में डॉ. हेडगेवार के जीवन के विभिन्न पहलुओं, उनके संघर्ष, संगठन निर्माण और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना से संबंधित घटनाओं को प्रस्तुत किया गया।
मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर कहा कि नाटक के माध्यम से इतिहास और व्यक्तित्व से जुड़े विचारों को आम लोगों तक प्रभावशाली ढंग से पहुंचाया जा सकता है। उन्होंने प्रस्तुति को युवाओं के लिए महत्वपूर्ण बताया।
जेन-जी को हेडगेवार के विचारों से परिचित कराएगी सरकार
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि बिहार युवाओं की बड़ी आबादी वाला राज्य है। यहां दो करोड़ से अधिक युवा हैं, जिनकी भूमिका प्रदेश और देश के भविष्य के निर्माण में महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को केवल आधुनिक तकनीक और शिक्षा से ही नहीं, बल्कि देश के ऐतिहासिक व्यक्तित्वों और उनके विचारों से भी परिचित होना चाहिए।
मुख्यमंत्री के अनुसार, डॉ. हेडगेवार का जीवन राष्ट्र के प्रति समर्पण और संगठन निर्माण की भावना को दर्शाता है। उन्होंने विशेष रूप से जेन-जी का उल्लेख करते हुए कहा कि युवाओं को उनके जीवन, संघर्ष और विचारों के बारे में जानकारी देने के लिए सरकार प्रयास करेगी।
उन्होंने घोषणा की कि राज्य सरकार इस महानाट्य को पटना तक सीमित नहीं रखेगी, बल्कि दूसरे जिलों में भी मंचन कराएगी, जिससे अधिक संख्या में युवा इसे देख सकें।
बिहार के अन्य जिलों में भी होगा महानाट्य
मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद डॉ. हेडगेवार के जीवन पर आधारित महानाट्य को राज्य के विभिन्न जिलों तक पहुंचाने की योजना सामने आई है।
सरकार का उद्देश्य कला और नाट्य प्रस्तुति के माध्यम से अधिक से अधिक लोगों को डॉ. हेडगेवार के जीवन से परिचित कराना है।
इसी क्रम में 27 अक्टूबर को भागलपुर के टाउन हॉल में भी 'युगप्रवर्तक डॉ. हेडगेवार' महानाट्य का मंचन प्रस्तावित है। इसका आयोजन बिहार सरकार के कला एवं संस्कृति विभाग के सहयोग से किया जाएगा।
हालांकि, अन्य सभी जिलों में प्रस्तुति की तारीखों और आयोजन स्थलों का विस्तृत कार्यक्रम अभी सामने नहीं आया है।
राष्ट्रभक्ति, अनुशासन और समाज सेवा पर दिया जोर
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में राष्ट्रभक्ति, त्याग, अनुशासन और समाज सेवा को महत्वपूर्ण मूल्य बताया। उन्होंने कहा कि इन मूल्यों को समझने में डॉ. हेडगेवार के जीवन पर आधारित महानाट्य उपयोगी माध्यम साबित हो सकता है।
सम्राट चौधरी ने डॉ. हेडगेवार को स्वतंत्रता सेनानी, विचारक और कुशल संगठनकर्ता बताते हुए उनके योगदान का उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि हेडगेवार ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना के माध्यम से संगठन और राष्ट्रसेवा की एक परंपरा विकसित की। मुख्यमंत्री के अनुसार, संघ से जुड़े लोग अपनी शाखाओं के माध्यम से सामाजिक समरसता, राष्ट्रसेवा और सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण के क्षेत्र में काम करते रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में विकसित भारत के लक्ष्य को लेकर किए जा रहे प्रयासों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत को समृद्ध और विकसित राष्ट्र बनाने के लिए सभी वर्गों की भागीदारी महत्वपूर्ण है।
कौन थे डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार?
डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार का जन्म 1 अप्रैल 1889 को नागपुर में हुआ था। वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक और प्रथम सरसंघचालक थे।
उन्होंने वर्ष 1925 में विजयादशमी के अवसर पर नागपुर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना की थी। उनका उद्देश्य संगठन के माध्यम से हिंदू समाज को एकजुट करना और अनुशासन तथा सामाजिक संगठन की भावना विकसित करना था।
डॉ. हेडगेवार ने अपने जीवनकाल में संगठन के विस्तार पर काम किया। वर्ष 1940 में उनका निधन हो गया। इसके बाद माधव सदाशिव गोलवलकर संघ के दूसरे सरसंघचालक बने।
आज राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ देश के प्रमुख सामाजिक और वैचारिक संगठनों में शामिल है। संघ की विचारधारा और सामाजिक-राजनीतिक भूमिका को लेकर सार्वजनिक विमर्श में अलग-अलग दृष्टिकोण भी मौजूद रहे हैं।
कार्यक्रम में कई प्रमुख हस्तियां रहीं मौजूद
बापू सभागार में आयोजित कार्यक्रम में कला एवं संस्कृति मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के बिहार-झारखंड क्षेत्रीय कार्यवाह डॉ. मोहन सिंह ने भी अपने विचार रखे।
महानाट्य के निर्माता पद्माकर धानोरकर ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का पुष्पगुच्छ और स्मृति चिह्न देकर स्वागत किया।
इस अवसर पर सहकारिता मंत्री राम कृपाल यादव, पटना नगर निगम की महापौर सीता साहू, पूर्व राज्यपाल गंगा प्रसाद, बिहार भाजपा के संगठन महामंत्री भिखूभाई दलसानिया और कला एवं संस्कृति विभाग के सचिव प्रणव कुमार सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।
कार्यक्रम में स्कूली बच्चों ने राष्ट्रीय गीत और राष्ट्रगान प्रस्तुत किया। बड़ी संख्या में दर्शक भी महानाट्य देखने के लिए पहुंचे।
सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिए युवाओं तक पहुंचने की तैयारी
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की घोषणा से स्पष्ट है कि राज्य सरकार डॉ. हेडगेवार के जीवन और विचारों के प्रचार-प्रसार के लिए सांस्कृतिक कार्यक्रमों को माध्यम बनाने की योजना पर काम कर रही है।
नाटक, संगीत और अन्य कला विधाओं के माध्यम से ऐतिहासिक घटनाओं एवं व्यक्तित्वों को प्रस्तुत करना लोगों तक जानकारी पहुंचाने का एक माध्यम माना जाता है।
हालांकि, इस तरह के आयोजनों के विस्तार के लिए कार्यक्रम स्थलों, कलाकारों, बजट और जिला स्तर पर प्रशासनिक समन्वय की आवश्यकता होगी।
फिलहाल पटना में महानाट्य के सफल आयोजन के बाद सरकार अन्य जिलों में भी इसकी प्रस्तुति कराने की तैयारी कर रही है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि किन-किन जिलों में आयोजन होंगे और कितनी बड़ी संख्या में युवा इन कार्यक्रमों से जुड़ेंगे।





