
वैशाली। बिहार के राघोपुर प्रखंड में बाढ़ का पानी लोगों के लिए बड़ी परेशानी बन गया है। सड़कें और संपर्क मार्ग डूबने के बाद अब स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंचना भी लोगों के लिए चुनौती साबित हो रहा है। सोमवार को रामपुर श्यामचंद पंचायत में स्वास्थ्य व्यवस्था की बदहाली की ऐसी तस्वीर सामने आई, जिसने बाढ़ प्रभावित इलाकों की जमीनी हकीकत को उजागर कर दिया।
पंचायत निवासी राहुल कुमार की पत्नी गायत्री देवी ने सोमवार सुबह घर पर ही बच्चे को जन्म दिया। प्रसव के बाद परिवार नवजात को जरूरी टीका लगवाने के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र राघोपुर, फतेहपुर ले जाना चाहता था, लेकिन बाढ़ के पानी के कारण अस्पताल तक पहुंचना बेहद मुश्किल हो गया।
घर में हुआ प्रसव, अस्पताल पहुंचना बना चुनौती
जानकारी के अनुसार, रामपुर श्यामचंद पंचायत के कई इलाके इन दिनों बाढ़ की चपेट में हैं। पानी भर जाने के कारण सामान्य आवागमन प्रभावित हो गया है।
इसी बीच राहुल कुमार की पत्नी गायत्री देवी को प्रसव पीड़ा हुई। बाढ़ और खराब रास्तों के कारण समय पर स्वास्थ्य केंद्र पहुंचना संभव नहीं हो सका और महिला ने घर में ही बच्चे को जन्म दिया।
परिवार के लिए बच्चे का जन्म खुशी का पल था, लेकिन इसके तुरंत बाद नवजात के स्वास्थ्य और टीकाकरण को लेकर चिंता बढ़ गई।
नवजात को टीका दिलाने के लिए परिवार की कोशिश
प्रसव के बाद परिजन नवजात को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र राघोपुर, फतेहपुर ले जाना चाहते थे, ताकि बच्चे को समय पर टीका लगाया जा सके और स्वास्थ्य जांच कराई जा सके।
लेकिन बाढ़ के पानी ने उनके रास्ते रोक दिए। सड़कें और संपर्क मार्ग डूबे होने के कारण अस्पताल तक पहुंचने का साधन नहीं मिल पा रहा था।
परिवार को डर था कि कहीं समय पर टीकाकरण और जरूरी स्वास्थ्य जांच नहीं हो पाई तो बच्चे को परेशानी हो सकती है।
बाढ़ प्रभावित इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं की चुनौती
राघोपुर क्षेत्र में हर साल बाढ़ के दौरान लोगों को ऐसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। पानी भरने के बाद गांवों का संपर्क मुख्य मार्गों से टूट जाता है।
सबसे ज्यादा परेशानी गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और गंभीर मरीजों को होती है। सामान्य दिनों में कुछ दूरी पर मौजूद स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचना आसान होता है, लेकिन बाढ़ के दौरान वही दूरी कई गुना मुश्किल हो जाती है।
इस घटना ने एक बार फिर बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं की उपलब्धता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सड़कें डूबीं, नाव बनी सहारा
बाढ़ के कारण कई जगहों पर सड़क संपर्क बाधित हो गया है। ऐसे इलाकों में लोगों को नाव या अन्य वैकल्पिक साधनों का सहारा लेना पड़ रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि आपात स्थिति में सबसे बड़ी समस्या अस्पताल पहुंचने की होती है। समय पर इलाज नहीं मिलने से मरीजों की परेशानी बढ़ सकती है।
उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं के लिए विशेष व्यवस्था की जाए।
प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती
बाढ़ के दौरान राहत और बचाव कार्यों के साथ-साथ स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती होती है।
ग्रामीण इलाकों में मेडिकल टीम की पहुंच, दवाओं की उपलब्धता और आपातकालीन सेवाओं को बनाए रखना जरूरी होता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में मोबाइल मेडिकल टीम, नाव एंबुलेंस और अस्थायी स्वास्थ्य केंद्र जैसी व्यवस्थाएं काफी मददगार साबित हो सकती हैं।
ग्रामीणों ने उठाई बेहतर व्यवस्था की मांग
रामपुर श्यामचंद पंचायत के लोगों का कहना है कि बाढ़ आने से पहले ही प्रशासन को स्वास्थ्य सेवाओं की वैकल्पिक व्यवस्था करनी चाहिए।
ग्रामीणों ने मांग की है कि ऐसे समय में गर्भवती महिलाओं और नवजात बच्चों के लिए विशेष इंतजाम किए जाएं, ताकि उन्हें अस्पताल पहुंचाने में परेशानी न हो।
निष्कर्ष
राघोपुर में बाढ़ के कारण सामने आई यह घटना बताती है कि प्राकृतिक आपदा के समय स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच कितनी बड़ी चुनौती बन जाती है। घर में जन्मे नवजात को टीका लगवाने के लिए परिवार को जिस परेशानी का सामना करना पड़ा, वह बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की वास्तविक स्थिति को दिखाता है।
अब जरूरत है कि प्रशासन बाढ़ प्रभावित इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करे, ताकि किसी भी आपात स्थिति में लोगों को समय पर इलाज और जरूरी सेवाएं मिल सकें।





