बिहार

सारण में बाढ़ का कहर वायुसेना ने संभाला राहत का मोर्चा

Ratna Netam
3 Oct 2026 4:28 PM IST
सारण में बाढ़ का कहर वायुसेना ने संभाला राहत का मोर्चा
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पटना। बिहार के सारण जिले में बाढ़ से प्रभावित और सड़क संपर्क से कटे इलाकों तक राहत पहुंचाने के लिए बड़े स्तर पर अभियान चलाया जा रहा है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने शनिवार को आपदा प्रबंधन विभाग को निर्देश दिया कि दुर्गम और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में फंसे लोगों तक समय पर भोजन और दूसरी आवश्यक सामग्री पहुंचाई जाए। इसके लिए गृह मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय के समन्वय से भारतीय वायु सेना के हेलीकॉप्टरों की मदद ली जा रही है।
मुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार, भारतीय वायु सेना के हेलीकॉप्टरों ने राहत अभियान के तहत 15 चक्कर लगाकर सारण के प्रभावित इलाकों में 28 टन से अधिक खाद्य सामग्री पहुंचाई है। इस दौरान 5,600 से ज्यादा सूखे राशन के पैकेट एयर-ड्रॉप किए गए। सड़क मार्ग से पहुंचने में मुश्किल वाले इलाकों को प्राथमिकता देते हुए हेलीकॉप्टर के जरिए राहत सामग्री पहुंचाई जा रही है।
सारण में गंडक नदी के बढ़े जलस्तर और तटबंधों को हुए नुकसान के कारण कई गांवों में पानी फैल गया है। कुछ इलाकों में सड़क संपर्क प्रभावित होने से सामान्य तरीके से राहत सामग्री पहुंचाना मुश्किल हो गया है। इसी वजह से प्रशासन ने वायु सेना की मदद से एयर-ड्रॉपिंग अभियान तेज किया है। हाल के दिनों में गंडक बेसिन से जुड़े कई जिलों को प्रशासन ने निगरानी में रखा है।
आपदा प्रबंधन विभाग की ओर से तैयार किए जा रहे राहत पैकेट में ऐसी खाद्य सामग्री रखी जा रही है, जिसे बाढ़ प्रभावित परिवार तत्काल इस्तेमाल कर सकें। शुरुआती एयर-ड्रॉप में चना, सत्तू, चूड़ा, चीनी, ओआरएस, माचिस और मोमबत्ती जैसी जरूरी वस्तुओं वाले पैकेट प्रभावित लोगों तक पहुंचाए गए थे।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि बाढ़ से घिरे किसी भी इलाके में राहत सामग्री की कमी नहीं होनी चाहिए। जिन स्थानों तक नाव या सड़क मार्ग से पहुंचना संभव नहीं है, वहां हवाई मार्ग का इस्तेमाल कर आवश्यक वस्तुएं उपलब्ध कराई जाएं। राज्य सरकार का जोर प्रभावित लोगों को भोजन, पेयजल और दूसरी बुनियादी सुविधाएं समय पर उपलब्ध कराने पर है।
सारण में राहत और बचाव अभियान के लिए केवल वायु सेना की मदद ही नहीं ली जा रही, बल्कि एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें भी तैनात की गई हैं। रिपोर्ट के अनुसार, जिले में एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की कुल 19 टीमें राहत एवं बचाव कार्यों में लगाई गई हैं। प्रभावित क्षेत्रों से लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने और जरूरी सहायता उपलब्ध कराने का काम जारी है।
बाढ़ के कारण कई इलाकों में लोगों की दैनिक जिंदगी प्रभावित हुई है। खेतों में पानी भरने से खरीफ फसलों को भी नुकसान पहुंचा है। एक अक्टूबर तक सामने आई जानकारी के मुताबिक, उत्तर बिहार के कई जिलों में गंडक का पानी फैलने से 200 से अधिक गांव प्रभावित हुए थे और धान समेत दूसरी खड़ी फसलों को नुकसान पहुंचा था।
सारण उन जिलों में शामिल है जहां बाढ़ की स्थिति को देखते हुए प्रशासन लगातार राहत व्यवस्था बढ़ा रहा है। प्रभावित गांवों तक नावों से राहत पहुंचाने के साथ उन स्थानों की पहचान भी की जा रही है, जहां हेलीकॉप्टर से खाद्य सामग्री पहुंचाना जरूरी है। प्रशासन का प्रयास है कि सड़क संपर्क टूटने की स्थिति में भी लोगों तक सहायता पहुंचती रहे।
हालांकि एयर-ड्रॉपिंग अभियान के दौरान एक दुखद हादसा भी सामने आया है। सारण के अमनौर थाना क्षेत्र के परशुरामपुर गांव में वायु सेना के हेलीकॉप्टर से गिराया गया राशन का एक पैकेट एक व्यक्ति के ऊपर गिर गया, जिससे उसकी मौत हो गई। स्थानीय रिपोर्टों में मृतक की पहचान अनिल कुमार सिंह उर्फ अप्पू सिंह के रूप में की गई है।
इस घटना के बावजूद बाढ़ से कटे इलाकों तक राहत पहुंचाने के लिए हवाई अभियान जारी है। ऐसे अभियानों में अब राहत सामग्री पहुंचाने के साथ जमीन पर मौजूद लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी महत्वपूर्ण चुनौती है। प्रशासन के सामने बड़ी जिम्मेदारी यह है कि सहायता तेजी से पहुंचे और वितरण के दौरान किसी तरह की दुर्घटना न हो।
बिहार में सितंबर से ही कई क्षेत्रों में बाढ़ का असर देखने को मिल रहा है। 16 सितंबर को केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के साथ राज्य के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का जायजा लिया था। उस दौरान वैशाली, मुंगेर और भागलपुर सहित प्रभावित इलाकों में स्थिति की समीक्षा की गई थी।
हाल के दिनों में गंडक नदी के कारण सारण में हालात और चुनौतीपूर्ण हुए हैं। नए क्षेत्रों में पानी प्रवेश करने के बाद राहत एजेंसियों ने अपनी गतिविधियां बढ़ाई हैं। भारतीय वायु सेना के हेलीकॉप्टरों की मदद से उन परिवारों तक खाद्य सामग्री पहुंचाने की कोशिश की जा रही है, जिन तक जमीन के रास्ते पहुंचना मुश्किल है।
राज्य सरकार ने आपदा प्रबंधन विभाग को केंद्र की एजेंसियों के साथ लगातार समन्वय बनाए रखने को कहा है। गृह मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय के सहयोग से चल रहे अभियान में जरूरत के अनुसार आगे भी हेलीकॉप्टरों की सहायता ली जा सकती है। प्रभावित क्षेत्रों में पानी की स्थिति और सड़क संपर्क को देखते हुए राहत व्यवस्था में बदलाव किए जा रहे हैं।
अब तक 15 हेलीकॉप्टर चक्करों के जरिए 28 टन से ज्यादा खाद्य सामग्री और 5,600 से अधिक सूखे राशन पैकेट पहुंचाया जाना राहत अभियान के बड़े पैमाने को दर्शाता है। मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद प्रशासन का मुख्य लक्ष्य बाढ़ में फंसे प्रत्येक जरूरतमंद परिवार तक समय पर आवश्यक सामग्री पहुंचाना और हालात सामान्य होने तक राहत एवं बचाव कार्यों को लगातार जारी रखना है।
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