
मुजफ्फरपुर। बिहार में उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। अब विश्वविद्यालयों की लाइब्रेरी देर रात तक खोलने की तैयारी की जा रही है। इस पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों को पढ़ाई, प्रतियोगी परीक्षाओं और शोध कार्यों के लिए अधिक समय उपलब्ध कराना है। बिहार के राज्यपाल एवं विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन ने मंगलवार को मुजफ्फरपुर में इस प्रस्ताव की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों की मांग को ध्यान में रखते हुए विश्वविद्यालयों के पुस्तकालयों को रात 11 बजे तक खोलने की दिशा में पहल की जा रही है।
राज्यपाल ने बताया कि लोकभवन की ओर से उच्च शिक्षा की व्यवस्था को बेहतर बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं। विश्वविद्यालयों में अध्ययन के अनुकूल वातावरण तैयार करना प्राथमिकताओं में शामिल है। इसी क्रम में पुस्तकालयों की सुविधाओं का विस्तार करने और लाइब्रेरियन के रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।
बिहार के विश्वविद्यालयों में पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों की लंबे समय से मांग रही है कि पुस्तकालयों को शाम के बाद भी खुला रखा जाए। कई छात्र दिन में कॉलेज की कक्षाओं, प्रयोगशाला के कार्यों और अन्य शैक्षणिक गतिविधियों में व्यस्त रहते हैं। ऐसे में उन्हें नियमित अध्ययन और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल पाता।
यदि विश्वविद्यालयों के पुस्तकालय रात 11 बजे तक खुलने लगते हैं, तो ऐसे विद्यार्थियों को काफी सुविधा मिल सकती है। खासकर स्नातकोत्तर, पीएचडी और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों के लिए यह व्यवस्था उपयोगी साबित हो सकती है।
विश्वविद्यालयों में शोध कार्य करने वाले विद्यार्थियों को विभिन्न पुस्तकों, शोध पत्रों, पत्रिकाओं और संदर्भ सामग्री की आवश्यकता होती है। कई बार उन्हें एक ही विषय पर लंबे समय तक अध्ययन करना पड़ता है। पुस्तकालयों का समय सीमित होने के कारण उनका अध्ययन प्रभावित होता है। देर रात तक पुस्तकालय खुले रहने से विद्यार्थियों को शोध सामग्री का बेहतर उपयोग करने का अवसर मिलेगा।
राज्यपाल सैयद अता हसनैन इससे पहले भी बिहार की उच्च शिक्षा व्यवस्था में सुधार की जरूरत पर जोर दे चुके हैं। अक्टूबर में उच्च शिक्षा में बदलाव को लेकर आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने विश्वविद्यालयों के पुस्तकालय रात 10 बजे तक खोलने और उनमें आधुनिक अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराने की सिफारिश की थी। अब सामने आए नए प्रस्ताव में समय रात 11 बजे तक बढ़ाने की बात कही गई है। हालांकि, सभी विश्वविद्यालयों में इसे लागू करने संबंधी अंतिम आदेश और शुरुआत की तारीख की आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है।
राज्यपाल की इस पहल का एक महत्वपूर्ण पहलू पुस्तकालयों में कर्मचारियों की उपलब्धता भी है। विश्वविद्यालयों में लाइब्रेरियन के पद रिक्त होने से पुस्तकालय संचालन प्रभावित हो सकता है। ऐसे में केवल समय बढ़ाना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि नियमित संचालन के लिए प्रशिक्षित कर्मचारियों की भी आवश्यकता होगी।
बताया गया है कि लाइब्रेरियन की नियुक्ति प्रक्रिया पर काम किया जा रहा है। राज्यपाल ने अगस्त 2026 में भी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में लाइब्रेरियन के रिक्त पदों को भरने के लिए पहल करने का आश्वासन दिया था। इससे स्पष्ट होता है कि पुस्तकालय व्यवस्था में सुधार उच्च शिक्षा से जुड़े व्यापक प्रयासों का हिस्सा है।
बिहार के विश्वविद्यालयों में बड़ी संख्या में ऐसे विद्यार्थी अध्ययन करते हैं, जो ग्रामीण क्षेत्रों और सामान्य आर्थिक पृष्ठभूमि से आते हैं। कई छात्रों के पास घर पर पढ़ाई के लिए अलग कमरा, शांत वातावरण या पर्याप्त पुस्तकें उपलब्ध नहीं होतीं। ऐसे विद्यार्थियों के लिए विश्वविद्यालय का पुस्तकालय महत्वपूर्ण अध्ययन केंद्र बन सकता है।
पुस्तकालयों का समय बढ़ने से छात्र शाम को अपनी कक्षाएं समाप्त होने के बाद भी वहां बैठकर पढ़ाई कर सकेंगे। इससे उन्हें महंगी निजी लाइब्रेरी या अन्य अध्ययन केंद्रों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।
हालांकि, रात 11 बजे तक पुस्तकालय खोलने की व्यवस्था लागू करने के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन को कई व्यावहारिक पहलुओं पर भी ध्यान देना होगा। इनमें पर्याप्त रोशनी, पेयजल, शौचालय, बिजली, सुरक्षा व्यवस्था और कर्मचारियों की उपलब्धता शामिल हैं।
विशेष रूप से छात्राओं की सुरक्षा और देर रात विश्वविद्यालय परिसर से घर या छात्रावास तक पहुंचने की व्यवस्था महत्वपूर्ण होगी। यदि विश्वविद्यालयों में पुस्तकालयों का समय बढ़ाया जाता है, तो उनके सुरक्षित संचालन के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश निर्धारित करने की जरूरत पड़ेगी।
इसके अलावा विश्वविद्यालयों में पुस्तकों और डिजिटल संसाधनों की उपलब्धता भी बढ़ानी होगी। आज उच्च शिक्षा केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित नहीं है। विद्यार्थियों को ई-पुस्तकों, ऑनलाइन शोध पत्रिकाओं, डिजिटल डेटाबेस और अन्य शैक्षणिक संसाधनों की भी जरूरत होती है।
पुस्तकालयों के समय में विस्तार के साथ यदि आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं, तो यह व्यवस्था विद्यार्थियों के लिए अधिक उपयोगी हो सकती है। खासकर विज्ञान, सामाजिक विज्ञान, साहित्य और अन्य विषयों में शोध करने वाले विद्यार्थियों को इसका लाभ मिलेगा।
बिहार में उच्च शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन की जवाबदेही बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है। राज्यपाल ने पूर्व में कुलपतियों को विद्यार्थियों की समस्याओं का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करने और उनसे नियमित संवाद बनाए रखने के निर्देश दिए थे। परीक्षा, परिणाम और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में सुधार को भी प्राथमिकता दी गई है।
शिक्षा से जुड़े जानकारों का मानना है कि विश्वविद्यालय केवल कक्षाओं में पढ़ाई कराने तक सीमित नहीं रहने चाहिए। पुस्तकालय, प्रयोगशालाएं और अध्ययन केंद्र भी शिक्षा की गुणवत्ता तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
यदि विद्यार्थियों को सुविधाजनक वातावरण और पर्याप्त समय मिले, तो वे अपनी शैक्षणिक क्षमता को बेहतर बना सकते हैं। इससे विश्वविद्यालयों में शोध गतिविधियों को प्रोत्साहन मिलने की भी संभावना है।
फिलहाल राज्यपाल की ओर से पुस्तकालयों का समय बढ़ाने की पहल विद्यार्थियों के लिए सकारात्मक संकेत है। अब छात्रों की नजर इस बात पर रहेगी कि विश्वविद्यालयों में नई व्यवस्था कब से लागू होती है और लाइब्रेरियन की नियुक्ति प्रक्रिया कितनी जल्दी पूरी होती है।
यदि प्रस्तावित व्यवस्था प्रभावी ढंग से लागू होती है, तो बिहार के विश्वविद्यालयों में देर रात तक अध्ययन करने वाले विद्यार्थियों के लिए नई संभावनाएं खुल सकती हैं। इससे उच्च शिक्षा के साथ प्रतियोगी परीक्षाओं और शोध की तैयारी करने वाले हजारों छात्रों को लाभ मिलने की उम्मीद है।





