
मुजफ्फरपुर। खाद की कालाबाजारी और वितरण में देरी को रोकने के लिए कृषि विभाग ने सख्त कदम उठाया है। किसानों को समय पर उर्वरक उपलब्ध कराने और ग्रामीण क्षेत्रों तक खाद की पहुंच सुनिश्चित करने के लिए अब फास्फेटिक और पोटाश उर्वरकों को सीधे खुदरा बिक्री केंद्रों तक पहुंचाना अनिवार्य कर दिया गया है।
कृषि विभाग ने परिवहन भाड़ा आधार पर खाद को सीधे दुकानों तक पहुंचाने के निर्देश जारी किए हैं। नए आदेश के तहत कंपनियां अब केवल रेलवे माल गोदाम या जिला मुख्यालय तक खाद पहुंचाकर अपनी जिम्मेदारी पूरी नहीं मान सकेंगी।
खुदरा केंद्रों तक पहुंचाना होगा उर्वरक
कृषि विभाग के आधिकारिक आदेश के अनुसार, डीएपी, एनपीके, एमओपी और एसएसपी जैसे प्रमुख उर्वरकों की उपलब्धता बेहतर बनाने के लिए यह व्यवस्था लागू की गई है।
पहले कई बार देखा गया था कि खाद जिला स्तर या बड़े भंडारण केंद्रों तक पहुंचने के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में समय पर नहीं पहुंच पाती थी। इससे किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ता था और कई जगहों पर कालाबाजारी की शिकायतें भी सामने आती थीं।
नई व्यवस्था के तहत कंपनियों को अब यह सुनिश्चित करना होगा कि खाद अंतिम बिक्री केंद्र यानी खुदरा दुकानों तक समय पर पहुंचे।
मुख्यालय पर डंपिंग व्यवस्था पर रोक
कृषि विभाग ने स्पष्ट किया है कि कंपनियां अब केवल रेलवे माल गोदाम या जिला मुख्यालय को गंतव्य बताकर अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकेंगी।
विभाग का मानना है कि खाद की उपलब्धता तभी बेहतर होगी, जब उसका वितरण गांव और ग्रामीण क्षेत्रों तक सही समय पर हो। केवल बड़े केंद्रों पर खाद जमा होने से किसानों तक पहुंचने में देरी होती है।
इसलिए अब परिवहन व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाया जा रहा है, ताकि खाद सीधे उन स्थानों तक पहुंचे जहां किसानों को इसकी जरूरत है।
बिचौलियों पर लगेगी लगाम
कृषि विभाग के इस फैसले का उद्देश्य खाद वितरण व्यवस्था में पारदर्शिता लाना भी है। विभाग का मानना है कि सीधे खुदरा केंद्रों तक आपूर्ति होने से बिचौलियों की भूमिका कम होगी और किसानों को निर्धारित दर पर खाद मिल सकेगी।
कई बार मांग बढ़ने के दौरान खाद की कमी और वितरण में देरी की शिकायतें सामने आती हैं। इसके बाद कुछ लोग इसका फायदा उठाकर अधिक कीमत पर खाद बेचने की कोशिश करते हैं।
नई व्यवस्था से ऐसी गतिविधियों पर रोक लगाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
किसानों को समय पर मिलेगी खाद
खेती के मौसम में उर्वरकों की मांग तेजी से बढ़ जाती है। विशेष रूप से डीएपी और एनपीके जैसे उर्वरकों की जरूरत फसल की बुआई के समय अधिक होती है।
कृषि विभाग का कहना है कि समय पर खाद उपलब्ध होने से किसानों को परेशानी नहीं होगी और खेती का काम प्रभावित नहीं होगा।
ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले किसानों को अब जिला मुख्यालय या बड़े केंद्रों तक जाने की जरूरत कम पड़ेगी, क्योंकि खाद सीधे स्थानीय बिक्री केंद्रों तक पहुंचाई जाएगी।
कंपनियों की जिम्मेदारी तय
नए निर्देशों के तहत उर्वरक कंपनियों की जिम्मेदारी भी तय की गई है। कंपनियों को आपूर्ति व्यवस्था की निगरानी करनी होगी और यह सुनिश्चित करना होगा कि खाद निर्धारित स्थानों तक पहुंचे।
विभाग की ओर से वितरण व्यवस्था पर नजर रखने के लिए अधिकारियों को भी जिम्मेदारी दी जा सकती है।
यदि किसी क्षेत्र में खाद की उपलब्धता को लेकर शिकायत आती है तो संबंधित स्तर पर इसकी जांच की जाएगी।
कृषि क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण फैसला
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, खाद वितरण प्रणाली में सुधार से किसानों को सीधा लाभ मिल सकता है। खेती के लिए जरूरी इनपुट समय पर उपलब्ध होना उत्पादन के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है।
ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर आपूर्ति व्यवस्था होने से किसानों का समय और खर्च दोनों बचेंगे।
आगे और सख्ती की तैयारी
कृषि विभाग ने संकेत दिए हैं कि खाद की उपलब्धता और वितरण व्यवस्था को लेकर लगातार निगरानी की जाएगी। कालाबाजारी या अनियमितता पाए जाने पर संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
नए आदेश के बाद अब उर्वरक कंपनियों और वितरण एजेंसियों को अपनी व्यवस्था में बदलाव करना होगा। सरकार का लक्ष्य है कि किसानों को जरूरत के समय आसानी से खाद उपलब्ध हो और वितरण प्रणाली में पारदर्शिता बनी रहे।





