
गोपालगंज: जिले के सभी सरकारी प्राथमिक, मध्य, माध्यमिक और उच्च माध्यमिक विद्यालयों में 1 जुलाई से नई समय-सारिणी लागू कर दी जाएगी। शिक्षा विभाग के निर्देश के अनुसार अब सभी स्कूल सुबह 9:30 बजे से शाम 4:00 बजे तक संचालित होंगे। जिला शिक्षा विभाग ने सभी विद्यालयों को इस नए समय का सख्ती से पालन करने का आदेश जारी किया है। शिक्षा विभाग द्वारा जारी निर्देश के बाद जिले के सभी स्कूलों में पढ़ाई का पूरा शेड्यूल बदल जाएगा। नई व्यवस्था के तहत अब शिक्षण कार्य के साथ-साथ चेतना सत्र, मध्याह्न भोजन, खेलकूद और अन्य सह-शैक्षणिक गतिविधियां निर्धारित समय के अनुसार संचालित की जाएंगी।
सुबह 9:30 बजे विद्यालय की शुरुआत चेतना सत्र से होगी, जिसमें प्रार्थना, योग, समाचार वाचन और प्रेरणादायी गतिविधियां कराई जाएंगी। इसके बाद नियमित कक्षाएं शुरू होंगी। मध्याह्न भोजन तय समय पर दिया जाएगा और भोजनावकाश के बाद फिर से पढ़ाई जारी रहेगी। दिन के अंतिम चरण में खेलकूद और सांस्कृतिक गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा, जिसके बाद शाम 4:00 बजे विद्यालय की छुट्टी होगी। जिला शिक्षा पदाधिकारी योगेश कुमार ने सभी प्रधानाध्यापकों और शिक्षकों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे समय पर विद्यालय पहुंचें और पूरे कार्यकाल में गुणवत्तापूर्ण शिक्षण कार्य सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि नई समय-सारिणी का हर हाल में पालन करना अनिवार्य होगा और किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
डीईओ ने यह भी स्पष्ट किया है कि समय से पहले छुट्टी करना, देर से पहुंचना या शिक्षण कार्य में ढिलाई बिल्कुल स्वीकार नहीं होगी। सभी विद्यालयों में अनुशासन और शिक्षा की गुणवत्ता बनाए रखने पर विशेष जोर दिया गया है। नई व्यवस्था के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए जिला और प्रखंड स्तर के अधिकारी नियमित रूप से विद्यालयों का निरीक्षण करेंगे। यदि किसी भी विद्यालय में समय-सारिणी का उल्लंघन पाया गया या शैक्षणिक कार्य में लापरवाही मिली, तो संबंधित शिक्षक या प्रधानाध्यापक के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
शिक्षा विभाग ने अभिभावकों से भी अपील की है कि वे अपने बच्चों को समय पर विद्यालय भेजें और पढ़ाई के प्रति जागरूक रहें। विभाग का मानना है कि इस नई समय-सारिणी से बच्चों की पढ़ाई का समय बढ़ेगा, शिक्षण व्यवस्था बेहतर होगी और स्कूलों में अनुशासन मजबूत होगा। कुल मिलाकर यह बदलाव जिले की शिक्षा व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित और प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे छात्रों को बेहतर शैक्षणिक माहौल मिलने की उम्मीद है।





