
बेगूसराय। केंद्रीय मंत्री एवं बिहार के बेगूसराय से सांसद गिरिराज सिंह ने वोट चोरी और ईवीएम (EVM) को लेकर विपक्ष की ओर से लगाए जा रहे आरोपों पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि चुनाव में वोट की चोरी नहीं हो रही है, बल्कि जनता ने चोरों को वोट देना बंद कर दिया है। गिरिराज सिंह ने कहा कि अगर विपक्ष को वास्तव में लगता है कि चुनाव में किसी तरह की गड़बड़ी हुई है, तो उसे केवल राजनीतिक बयानबाजी करने के बजाय ठोस सबूत चुनाव आयोग के सामने रखने चाहिए।
शनिवार को बेगूसराय के रिफाइनरी स्थित दिनकर गेस्ट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान केंद्रीय मंत्री ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR), ईवीएम, वोट चोरी और रिजीम चेंज जैसे मुद्दों पर अपनी राय रखी। उन्होंने कांग्रेस और विपक्षी दलों के चुनावी आरोपों पर सवाल उठाते हुए कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में चुनाव परिणामों को स्वीकार करना चाहिए। यदि किसी राजनीतिक दल को चुनाव प्रक्रिया में गड़बड़ी की शिकायत है, तो उसके समाधान के लिए संवैधानिक संस्थाएं और निर्धारित प्रक्रियाएं मौजूद हैं।
राहुल गांधी के वोट चोरी के आरोपों पर पलटवार
गिरिराज सिंह ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि विपक्ष चुनाव में हार मिलने के बाद वोट चोरी और ईवीएम में गड़बड़ी जैसे मुद्दे उठाने लगता है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि वास्तविकता यह है कि जनता अब ऐसे राजनीतिक दलों को समर्थन नहीं दे रही है।
केंद्रीय मंत्री ने अपने बयान में कहा कि वोट की चोरी नहीं हो रही है, बल्कि जनता ने चोरों को वोट देना बंद कर दिया है। उनके इस बयान को कांग्रेस और राहुल गांधी की ओर से चुनावी प्रक्रिया पर उठाए जा रहे सवालों के जवाब के तौर पर देखा जा रहा है।
गिरिराज सिंह का कहना था कि जनता अपने मताधिकार का इस्तेमाल करती है और चुनाव में किसे समर्थन देना है, इसका फैसला मतदाता स्वयं करते हैं। ऐसे में राजनीतिक दलों को जनता के फैसले का सम्मान करना चाहिए।
विपक्ष के पास सबूत हैं तो चुनाव आयोग जाए
ईवीएम और चुनावी गड़बड़ियों के आरोपों पर केंद्रीय मंत्री ने विपक्ष को चुनौती देते हुए कहा कि यदि उसके पास कोई ठोस प्रमाण है, तो उसे चुनाव आयोग के समक्ष प्रस्तुत करना चाहिए। केवल प्रेस कॉन्फ्रेंस, रैलियों और सोशल मीडिया के माध्यम से आरोप लगाने से चुनाव प्रक्रिया पर सवालों का समाधान नहीं हो सकता।
उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है और चुनाव से संबंधित शिकायतों के लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए। यदि विपक्ष के पास किसी निर्वाचन क्षेत्र में वोटों की हेराफेरी, मतदाता सूची में गड़बड़ी या ईवीएम से संबंधित कोई प्रमाण है, तो उसे संबंधित अधिकारियों को उपलब्ध कराना चाहिए।
दरअसल, पिछले कुछ समय से राहुल गांधी और कांग्रेस लगातार मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) तथा चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर सवाल उठा रहे हैं। कांग्रेस का आरोप है कि मतदाता सूची में बदलाव और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े कुछ फैसले मतदाताओं के अधिकारों को प्रभावित कर सकते हैं। वहीं भाजपा इन आरोपों को राजनीतिक बयानबाजी बताकर खारिज करती रही है।
SIR को लेकर भी विपक्ष पर साधा निशाना
पत्रकारों से बातचीत में गिरिराज सिंह ने विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने विपक्ष की ओर से इस प्रक्रिया को लेकर जताई जा रही आपत्तियों पर सवाल किया। उनका रुख रहा कि मतदाता सूची को सही और व्यवस्थित बनाने की प्रक्रिया का विरोध करने के बजाय राजनीतिक दलों को अपने आरोप प्रमाणों के साथ सामने रखने चाहिए।
SIR के तहत मतदाता सूची की जांच और पुनरीक्षण किया जाता है। इसमें पात्र मतदाताओं के नाम सुनिश्चित करने के साथ अपात्र या नियमों के अनुसार अयोग्य प्रविष्टियों की पहचान करने का उद्देश्य शामिल होता है।
हालांकि, इस प्रक्रिया को लेकर विपक्ष की अपनी चिंताएं हैं। विपक्षी दलों का कहना है कि मतदाता सूची में किसी भी तरह की गलती से योग्य मतदाताओं का मतदान का अधिकार प्रभावित नहीं होना चाहिए। इसलिए पूरी प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए और शिकायतों के निपटारे की पर्याप्त व्यवस्था होनी चाहिए।
EVM पर बहस के बीच फिर गरमाई राजनीति
ईवीएम का मुद्दा देश की राजनीति में लंबे समय से चर्चा का विषय बना हुआ है। चुनाव में हार के बाद विपक्षी दलों के कुछ नेता मशीनों की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते रहे हैं, जबकि भाजपा और चुनाव आयोग ईवीएम के माध्यम से होने वाले मतदान का बचाव करते रहे हैं।
गिरिराज सिंह ने भी इसी राजनीतिक बहस के बीच कांग्रेस और राहुल गांधी को निशाने पर लिया। उनका कहना है कि चुनाव परिणामों को अपनी सुविधा के अनुसार स्वीकार करना और हार मिलने पर पूरी व्यवस्था पर सवाल उठाना उचित नहीं है।
इससे पहले भी केंद्रीय मंत्री ईवीएम और वोट चोरी के मुद्दे पर राहुल गांधी की आलोचना कर चुके हैं। उन्होंने 28 अक्टूबर को दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में भी कहा था कि ईवीएम की शुरुआत कांग्रेस शासनकाल में हुई थी और चुनाव में हार के बाद इस पर सवाल उठाना उचित नहीं है।
रिजीम चेंज के मुद्दे पर भी रखी अपनी बात
दिनकर गेस्ट हाउस में बातचीत के दौरान केंद्रीय मंत्री ने रिजीम चेंज यानी सत्ता और शासन व्यवस्था में बदलाव से जुड़े मुद्दे पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने विपक्ष की राजनीतिक रणनीति और सरकार को लेकर उठाए जा रहे सवालों पर टिप्पणी की। हालांकि, उपलब्ध शुरुआती विवरण में इस मुद्दे पर उनके विस्तृत बयान का उल्लेख नहीं है।
गिरिराज सिंह ने बातचीत के दौरान विपक्ष की राजनीति पर निशाना साधते हुए कहा कि लोकतंत्र में जनता का निर्णय सर्वोपरि होता है। राजनीतिक दलों को जनता के फैसले को स्वीकार करना चाहिए और अपनी कमियों का आकलन करना चाहिए।
बिहार से राष्ट्रीय राजनीति तक गरमाया वोट चोरी का मुद्दा
वोट चोरी और ईवीएम का मुद्दा अब केवल किसी एक राज्य तक सीमित नहीं रह गया है। कांग्रेस सहित कई विपक्षी दल इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था और निष्पक्ष चुनाव से जोड़कर उठा रहे हैं। वहीं भाजपा नेताओं का कहना है कि विपक्ष चुनावी हार के बाद इस तरह के आरोप लगाकर राजनीतिक माहौल बनाने की कोशिश करता है।
बेगूसराय में गिरिराज सिंह का ताजा बयान भी इसी राजनीतिक टकराव का हिस्सा माना जा रहा है। उनके बयान से साफ है कि भाजपा इस मुद्दे पर कांग्रेस को घेरने की रणनीति अपना रही है।
फिलहाल वोट चोरी, SIR और ईवीएम को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं। अब देखना होगा कि विपक्ष अपने आरोपों के समर्थन में कौन से तथ्य और दस्तावेज सामने रखता है तथा चुनाव आयोग इन शिकायतों पर क्या रुख अपनाता है।





