
जमुई। बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय चंद्रशेखर सिंह की 41वीं पुण्यतिथि गुरुवार को जमुई के मलयपुर स्थित आंजन नदी के तट पर श्रद्धापूर्वक मनाई गई। इस अवसर पर नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों ने उन्हें याद करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की। कार्यक्रम के दौरान उनके योगदान को याद किया गया, लेकिन साथ ही उनके समाधि स्थल की बदहाली को लेकर लोगों ने गहरी नाराजगी और चिंता भी व्यक्त की। कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने स्वर्गीय चंद्रशेखर सिंह के तैलचित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि दी और उनके बताए रास्ते पर चलने का संकल्प लिया। इस मौके पर वक्ताओं ने कहा कि चंद्रशेखर सिंह ने बिहार के विकास और प्रशासनिक सुधारों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उन्होंने राज्य की राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाई और जनहित से जुड़े कई कार्यों को आगे बढ़ाया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला कांग्रेस के संयोजक और वरिष्ठ नेता डॉ. राजीव कुमार सिंह ने की। उन्होंने कहा कि चंद्रशेखर सिंह जैसे नेताओं की विरासत को संभालना समाज और सरकार दोनों की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने प्रदेश के विकास में अपना जीवन समर्पित किया, उनके स्मारकों और समाधि स्थलों का उचित रखरखाव होना चाहिए। पुण्यतिथि कार्यक्रम के दौरान नेताओं और स्थानीय लोगों ने मलयपुर स्थित समाधि स्थल की स्थिति पर चिंता जाहिर की। लोगों का कहना था कि जिस स्थान पर बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री की स्मृति जुड़ी हुई है, वहां बेहतर व्यवस्था और संरक्षण की आवश्यकता है। उन्होंने प्रशासन से समाधि स्थल के सौंदर्यीकरण और रखरखाव की मांग की।
स्थानीय लोगों ने कहा कि चंद्रशेखर सिंह जमुई की धरती के गौरव थे और उन्होंने राज्य के विकास में अहम योगदान दिया। ऐसे महान व्यक्तित्व की यादों को सुरक्षित रखना आने वाली पीढ़ियों के लिए जरूरी है। लोगों ने कहा कि समाधि स्थल को एक प्रेरणा स्थल के रूप में विकसित किया जाना चाहिए, ताकि युवा उनके विचारों और कार्यों से प्रेरणा ले सकें। कार्यक्रम में शामिल नेताओं ने कहा कि चंद्रशेखर सिंह ने अपने राजनीतिक जीवन में सादगी, ईमानदारी और जनसेवा को प्राथमिकता दी। उनके कार्यकाल में बिहार के विकास को लेकर कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए थे। वक्ताओं ने उनके व्यक्तित्व और योगदान को याद करते हुए कहा कि उनके विचार आज भी प्रासंगिक हैं।
इस दौरान मौजूद लोगों ने स्वर्गीय चंद्रशेखर सिंह के आदर्शों को अपनाने और समाज हित में काम करने का संकल्प लिया। नेताओं ने कहा कि उनके योगदान को भुलाया नहीं जा सकता और उनकी स्मृतियों को सम्मान देना सभी की जिम्मेदारी है। पुण्यतिथि कार्यक्रम में स्थानीय लोगों की बड़ी संख्या में मौजूदगी रही। सभी ने पूर्व मुख्यमंत्री को श्रद्धांजलि देते हुए उनकी विरासत को आगे बढ़ाने की बात कही। हालांकि, समाधि स्थल की बदहाली का मुद्दा कार्यक्रम में प्रमुख रूप से उठता रहा और लोगों ने उम्मीद जताई कि जल्द ही प्रशासन इस दिशा में ठोस कदम उठाएगा।





