
भागलपुर। बिहार में गंगा नदी के जलस्तर में गिरावट शुरू होने से बाढ़ प्रभावित लोगों को राहत मिलने की उम्मीद जगी है। प्रयागराज से फरक्का तक नदी का जलस्तर अब घटने की प्रवृत्ति में बताया जा रहा है। इसका सकारात्मक असर राज्य के अलग-अलग गेज स्थलों पर दिखाई देने लगा है। जल संसाधन विभाग के अधिकारियों का अनुमान है कि यदि ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों में दोबारा भारी बारिश नहीं हुई और जलस्तर में कमी का मौजूदा रुझान जारी रहा तो सप्ताह के अंत तक बाढ़ की स्थिति में बड़ा सुधार हो सकता है।
सुल्तानगंज, भागलपुर और कहलगांव में पिछले चार दिनों से गंगा के पानी में लगातार कमी दर्ज की जा रही है। बाढ़ नियंत्रण से जुड़े अभियंताओं के अनुसार, शनिवार रात तक प्रयागराज और वाराणसी में गंगा का जलस्तर करीब आधा मीटर नीचे आया। ऊपरी हिस्से में पानी घटने का असर कुछ समय के अंतराल के बाद बिहार में दिखाई देता है। इसी कारण राज्य के गंगा तटीय क्षेत्रों में नदी का दबाव धीरे-धीरे कम होने लगा है।
बाढ़ की स्थिति में सुधार के पीछे फरक्का बराज क्षेत्र में जलस्तर का गिरना भी अहम कारण माना जा रहा है। फरक्का के पास पानी का दबाव कम होने से गंगा के प्रवाह में पैदा होने वाला अवरोध घटता है। इससे बिहार की ओर से आने वाले पानी को आगे निकलने में सुविधा होती है। जल संसाधन विभाग का मानना है कि फरक्का के ऊपरी और निचले हिस्से में जलस्तर कम रहने पर भागलपुर तथा कहलगांव क्षेत्र में पानी तेजी से नीचे जा सकता है।
गंगा के जलस्तर में कमी उन लाखों लोगों के लिए राहत का संकेत है, जो पिछले कई दिनों से बाढ़ का सामना कर रहे हैं। नदी का पानी गांवों, खेतों, संपर्क मार्गों और निचले शहरी इलाकों में फैल गया था। कई परिवारों को ऊंचे स्थानों, सड़कों, तटबंधों और राहत शिविरों में शरण लेनी पड़ी। पशुओं के चारे, पीने के पानी, भोजन और चिकित्सा सुविधा की समस्या भी बनी हुई है। पानी कम होने के बाद प्रभावित परिवारों के घर लौटने का रास्ता खुल सकता है, लेकिन सामान्य स्थिति बहाल होने में अभी समय लगने की संभावना है।
अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि नदी का जलस्तर कम होना राहत का संकेत जरूर है, लेकिन खतरा पूरी तरह टला नहीं है। कई स्थानों पर गंगा अब भी खतरे के निशान के आसपास या उससे ऊपर बह सकती है। निचले इलाकों से पानी निकलने में समय लगेगा। खेतों, गांवों और सड़कों पर जमा पानी नदी के घटने के बाद धीरे-धीरे वापस जाएगा। ऐसे में लोगों को बिना प्रशासनिक अनुमति के तेज बहाव वाले रास्तों अथवा डूबे हुए क्षेत्रों से गुजरने से बचने की सलाह दी गई है।
जलस्तर घटने के साथ गंगा किनारे कटाव का खतरा भी बढ़ सकता है। नदी जब उफान पर होती है तो पानी का दबाव किनारों पर बना रहता है। पानी उतरने के दौरान मिट्टी ढीली होने और धारा का रुख बदलने से तटों का हिस्सा तेजी से कट सकता है। भागलपुर, कहलगांव, पीरपैंती, सबौर, नाथनगर और सुल्तानगंज के कई तटीय क्षेत्रों में कटाव की आशंका बनी रहती है। विभागीय अभियंताओं को संवेदनशील स्थलों की लगातार निगरानी करने के निर्देश दिए गए हैं।
बाढ़ नियंत्रण विभाग की टीमें तटबंधों, स्पर और अन्य सुरक्षात्मक संरचनाओं की स्थिति पर नजर रख रही हैं। जहां कटाव का दबाव बढ़ने की आशंका है, वहां बालू से भरे बोरे, जियो बैग और अन्य बचाव सामग्री तैयार रखी जा रही है। स्थानीय प्रशासन को भी नदी किनारे बसे लोगों के संपर्क में रहने और किसी तरह की असामान्य स्थिति सामने आने पर तत्काल सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने को कहा गया है।
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में सबसे बड़ी चिंता अब संक्रामक बीमारियों और दूषित पेयजल को लेकर है। पानी उतरने के बाद जगह-जगह कीचड़, गंदगी और मृत पशुओं के अवशेष मिलने से बीमारी फैलने का खतरा बढ़ जाता है। स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय निकायों को प्रभावित गांवों में ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव, पेयजल की जांच तथा आवश्यक दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करनी होगी। लोगों को उबला या स्वच्छ पानी पीने और बाढ़ के पानी में भीगे खाद्य पदार्थों का इस्तेमाल नहीं करने की सलाह दी जा रही है।
खेतों से पानी निकलने के बाद फसलों को हुए नुकसान का वास्तविक आकलन भी शुरू हो सकेगा। धान, मक्का, सब्जियों और पशु चारे की खेती वाले बड़े इलाके बाढ़ के पानी में डूबे हैं। लंबे समय तक पानी जमा रहने से फसल पूरी तरह खराब होने की आशंका है। कृषि विभाग की टीमें पानी उतरने के बाद प्रभावित क्षेत्र का सर्वे कर सकती हैं। इसके आधार पर किसानों को सहायता अथवा मुआवजा देने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
हालांकि मौसम और नदी के प्रवाह में अचानक बदलाव की संभावना को देखते हुए विभाग स्थिति पर नजर बनाए हुए है। ऊपरी क्षेत्रों में दोबारा भारी बारिश होने पर गंगा का जलस्तर फिर बढ़ सकता है। इसलिए अभी बाढ़ प्रभावित इलाकों से निगरानी और राहत व्यवस्था हटाने की स्थिति नहीं है। प्रशासन ने लोगों से जल संसाधन विभाग और केंद्रीय जल आयोग के आधिकारिक बुलेटिन पर भरोसा करने की अपील की है।
प्रयागराज में गंगा और यमुना के जलस्तर में 24 घंटे के दौरान 32 से 38 सेंटीमीटर तक कमी आने की पुष्टि में हुई है। वहीं प्रयागराज से फरक्का तक गंगा के घटते रुझान और बिहार में राहत की संभावना की जानकारी सामने आई है। मौजूदा रुझान राहत देने वाला है, लेकिन जलस्तर सामान्य होने और गांवों से पानी पूरी तरह निकलने तक सावधानी आवश्यक रहेगी।





