
पटना : बिहार में साइबर अपराध के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए साइबर अपराध एवं सुरक्षा इकाई (सीसीएसयू) ने ऐसे गिरोह का खुलासा किया है, जो साइबर ठगी से हासिल रकम को क्रिप्टोकरेंसी में बदलकर विदेश भेजने का काम करता था। जांच में सामने आया है कि इस गिरोह ने देशभर में 14.67 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी की है। पुलिस को इस मामले में चीन के साइबर अपराधियों से भी गिरोह के कनेक्शन के संकेत मिले हैं।
सीसीएसयू ने पटना साइबर थाने के सहयोग से कार्रवाई करते हुए गिरोह के चार सदस्यों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपितों में पटना के कंकड़बाग क्षेत्र के तीन लोग और नालंदा जिले के हिलसा का एक व्यक्ति शामिल है। पुलिस अब गिरफ्तार आरोपितों से पूछताछ के आधार पर गिरोह से जुड़े अन्य सदस्यों की तलाश में जुटी है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह गिरोह साइबर ठगी से प्राप्त धनराशि को सीधे इस्तेमाल करने के बजाय उसे अलग-अलग खातों के माध्यम से घुमाकर डिजिटल मुद्रा यानी क्रिप्टोकरेंसी में परिवर्तित करता था। इसके बाद इस रकम को विदेश भेजा जाता था। जांच एजेंसियों का मानना है कि इस तरीके का इस्तेमाल साइबर अपराधी अपनी पहचान छिपाने और अवैध धन के स्रोत को छिपाने के लिए करते हैं।
प्रारंभिक जांच में पता चला है कि गिरोह के सदस्य देश के अलग-अलग हिस्सों में साइबर ठगी की घटनाओं को अंजाम देने वाले अपराधियों के संपर्क में थे। ठगी की रकम मिलने के बाद यह गिरोह उसे कई बैंक खातों और डिजिटल माध्यमों से ट्रांसफर करता था। इसके बाद क्रिप्टोकरेंसी के जरिए विदेशों में मौजूद नेटवर्क तक पहुंचाया जाता था।
सीसीएसयू के अधिकारियों ने बताया कि इस मामले की जांच के दौरान कई बैंक खातों, मोबाइल नंबरों, डिजिटल लेन-देन और अन्य तकनीकी साक्ष्यों का विश्लेषण किया गया। इसी आधार पर संदिग्धों की पहचान की गई और फिर पटना के कंकड़बाग तथा नालंदा के हिलसा में कार्रवाई कर आरोपितों को गिरफ्तार किया गया।
पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपितों से पूछताछ में साइबर ठगी के बड़े नेटवर्क से जुड़े कई महत्वपूर्ण सुराग मिले हैं। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि गिरोह में कितने लोग शामिल हैं, किन-किन राज्यों में इसका नेटवर्क फैला हुआ है और विदेश में किन लोगों के साथ इनका संपर्क था।
जांच में चीन से जुड़े साइबर अपराधियों के साथ संपर्क की बात सामने आने के बाद सुरक्षा एजेंसियां भी सतर्क हो गई हैं। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि क्या यह गिरोह किसी अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराध नेटवर्क के लिए काम कर रहा था या स्थानीय स्तर पर ठगी की रकम को विदेश भेजने का माध्यम बना हुआ था।
अधिकारियों का कहना है कि साइबर अपराधी अब ठगी की रकम को छिपाने के लिए नए-नए तरीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं। क्रिप्टोकरेंसी के माध्यम से धन का हस्तांतरण अपराधियों के लिए चुनौतीपूर्ण जांच प्रक्रिया पैदा करता है, क्योंकि इसमें पारंपरिक बैंकिंग प्रणाली से अलग डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल किया जाता है। ऐसे मामलों में तकनीकी जांच, डिजिटल फॉरेंसिक और वित्तीय लेन-देन की निगरानी बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।
पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे साइबर ठगी से बचने के लिए सतर्क रहें। किसी भी अनजान व्यक्ति के कहने पर बैंक खाते की जानकारी, ओटीपी, पासवर्ड या अन्य संवेदनशील जानकारी साझा न करें। इसके अलावा निवेश, नौकरी, ऑनलाइन खरीदारी या किसी अन्य बहाने से आने वाले संदिग्ध लिंक और कॉल से भी सावधान रहने की सलाह दी गई है।
सीसीएसयू और साइबर थाना की संयुक्त कार्रवाई को साइबर अपराध के खिलाफ बड़ी सफलता माना जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि राज्य में साइबर अपराधों पर रोक लगाने के लिए तकनीकी निगरानी और जांच प्रणाली को लगातार मजबूत किया जा रहा है। साइबर अपराधियों और उनके नेटवर्क पर नजर रखने के लिए विशेष टीमें भी काम कर रही हैं।
पुलिस अब गिरफ्तार आरोपितों से मिली जानकारी के आधार पर गिरोह के अन्य सदस्यों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि 14.67 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी में किन-किन मामलों का संबंध इस गिरोह से है और पीड़ितों की रकम किस तरीके से ठिकाने लगाई गई।
अधिकारियों को उम्मीद है कि आगे की जांच में साइबर ठगी के इस नेटवर्क से जुड़े कई और महत्वपूर्ण खुलासे हो सकते हैं। पुलिस का कहना है कि साइबर अपराध के खिलाफ कार्रवाई लगातार जारी रहेगी और डिजिटल माध्यमों का दुरुपयोग करने वाले अपराधियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे।





