
समस्तीपुर। बच्चों के पैर जन्म से टेढ़े-मेढ़े होने की समस्या से जूझ रहे परिवारों के लिए राहत की खबर है। अब ऐसे बच्चों को इलाज के लिए दूसरे शहरों या निजी अस्पतालों का रुख नहीं करना पड़ेगा। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के तहत समस्तीपुर सदर अस्पताल के ओपीडी में क्लब फुट क्लीनिक की स्थापना की गई है। यहां क्लब फुट से पीड़ित बच्चों की जांच, उपचार और आवश्यक परामर्श की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।
स्वास्थ्य विभाग की इस पहल का उद्देश्य बच्चों में जन्मजात पैर की विकृति की समय रहते पहचान कर उनका उपचार शुरू करना है। चिकित्सकों के अनुसार, क्लब फुट का इलाज जितनी जल्दी शुरू किया जाए, बच्चे के सामान्य रूप से चलने-फिरने की संभावना उतनी ही बेहतर होती है। इसी को ध्यान में रखते हुए सदर अस्पताल में विशेष क्लीनिक की शुरुआत की गई है।
तीन साल में 43 बच्चे मिले
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, समस्तीपुर जिले में पिछले तीन वर्षों के दौरान कुल 43 बच्चे क्लब फुट से पीड़ित पाए गए हैं। इन बच्चों की पहचान के बाद उन्हें उपचार की जरूरत के अनुसार संबंधित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है।
क्लब फुट एक ऐसी स्थिति है जिसमें बच्चे के पैर का आकार या स्थिति सामान्य से अलग होती है। कई मामलों में पैर अंदर की ओर मुड़ा हुआ दिखाई देता है। यदि समय पर उपचार न मिले तो आगे चलकर बच्चे को चलने में परेशानी हो सकती है। ऐसे मामलों की जल्द पहचान और उपचार के लिए स्वास्थ्य विभाग ने अब सदर अस्पताल में विशेष व्यवस्था की है।
आर्थोपेडिक चिकित्सक की तैनाती
क्लब फुट क्लीनिक के संचालन के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सरायरंजन के आर्थोपेडिक चिकित्सक की भी तैनाती की गई है। विशेषज्ञ चिकित्सक बच्चों की जांच कर उनकी स्थिति का आकलन करेंगे और जरूरत के अनुसार उपचार की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।
विशेषज्ञ की उपलब्धता से बच्चों के अभिभावकों को इलाज के लिए अलग-अलग अस्पतालों के चक्कर लगाने की जरूरत कम होगी। साथ ही बच्चों को उनकी समस्या के अनुरूप चिकित्सकीय सलाह और उपचार मिल सकेगा।
अभिभावकों की काउंसलिंग भी होगी
क्लीनिक में केवल चिकित्सा सुविधा ही नहीं, बल्कि अभिभावकों के लिए काउंसलिंग की व्यवस्था भी की जाएगी। क्लीनिक में काउंसलर की तैनाती होगी, जो माता-पिता को बच्चे की समस्या, उपचार प्रक्रिया और सावधानियों के बारे में आवश्यक जानकारी देंगे।
अक्सर जन्मजात विकृति को लेकर अभिभावकों में चिंता और भ्रम की स्थिति रहती है। कई परिवार सामाजिक संकोच या जानकारी के अभाव में बच्चे का समय पर इलाज नहीं करा पाते। ऐसे में काउंसलिंग के माध्यम से उन्हें बीमारी और उपचार के बारे में समझाया जाएगा।
गांव स्तर पर होगी क्लब फुट की पहचान
स्वास्थ्य विभाग ने क्लब फुट के मामलों की पहचान को लेकर जमीनी स्तर पर भी तैयारी शुरू की है। आशा कार्यकर्ताओं, आंगनबाड़ी सेविकाओं और आरबीएसके टीम को क्लब फुट के मामलों की पहचान और रेफरल के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा।
इन स्वास्थ्य कर्मियों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी, क्योंकि वे गांव और दूर-दराज के क्षेत्रों में परिवारों के संपर्क में रहते हैं। यदि किसी बच्चे में क्लब फुट के लक्षण दिखाई देते हैं तो उसकी पहचान कर उसे उचित स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचाने में ये कार्यकर्ता मदद करेंगे।
समय पर इलाज पहुंचाना लक्ष्य
स्वास्थ्य विभाग का लक्ष्य अधिक से अधिक बच्चों की समय पर पहचान कर उन्हें उपचार उपलब्ध कराना है। शुरुआती अवस्था में समस्या की पहचान होने पर चिकित्सकीय हस्तक्षेप अधिक प्रभावी हो सकता है। इसलिए स्वास्थ्य कर्मियों को प्रशिक्षण देकर स्क्रीनिंग और रेफरल व्यवस्था मजबूत करने की योजना बनाई गई है।
आरबीएसके टीम भी बच्चों के स्वास्थ्य की नियमित जांच के दौरान क्लब फुट के मामलों पर नजर रखेगी। संदिग्ध मामलों को विशेषज्ञ चिकित्सक के पास भेजा जाएगा, ताकि बच्चे का इलाज जल्द शुरू हो सके।
परिवारों को नहीं करना पड़ेगा अतिरिक्त खर्च
सदर अस्पताल में क्लीनिक की स्थापना से आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को विशेष लाभ मिलने की उम्मीद है। क्लब फुट जैसी समस्या के उपचार के लिए निजी अस्पतालों में जाने पर परिवारों को आर्थिक बोझ उठाना पड़ सकता है। सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था के तहत सुविधा उपलब्ध होने से जरूरतमंद बच्चों को कम खर्च में उपचार का अवसर मिलेगा।
इसके अलावा अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सक और काउंसलिंग की सुविधा एक ही स्थान पर मिलने से अभिभावकों के लिए उपचार प्रक्रिया को समझना भी आसान होगा।
जागरूकता बढ़ाने की जरूरत
स्वास्थ्य विभाग के सामने क्लब फुट को लेकर जागरूकता बढ़ाना भी एक बड़ी चुनौती है। ग्रामीण क्षेत्रों में कई परिवार जन्मजात पैर की विकृति को लेकर पर्याप्त जानकारी नहीं रखते। कुछ मामलों में इसे सामान्य समस्या मानकर उपचार में देरी कर दी जाती है।
स्वास्थ्य कर्मियों को प्रशिक्षण देकर घर-घर तक जानकारी पहुंचाने की योजना इसी समस्या को दूर करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। आशा और आंगनबाड़ी सेविकाएं परिवारों को समझाएंगी कि बच्चे के पैर में जन्म से किसी तरह की विकृति दिखाई देने पर चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।
समय पर उपचार से सामान्य जीवन की उम्मीद
क्लब फुट से प्रभावित बच्चों के लिए समय पर उपचार बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। चिकित्सकीय देखरेख में उपचार मिलने से बच्चों की पैर संबंधी समस्या को काफी हद तक ठीक किया जा सकता है और उन्हें सामान्य रूप से चलने-फिरने में मदद मिल सकती है।
सदर अस्पताल में क्लब फुट क्लीनिक की स्थापना से अब जिले के बच्चों को स्थानीय स्तर पर विशेषज्ञ उपचार की सुविधा मिलने की उम्मीद है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से विशेषज्ञ चिकित्सक, काउंसलर और प्रशिक्षित स्वास्थ्य कर्मियों की मदद से पूरी व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है।
समस्तीपुर में पिछले तीन वर्षों में 43 क्लब फुट से पीड़ित बच्चों की पहचान यह बताती है कि समस्या की समय पर पहचान और उपचार की जरूरत है। ऐसे में सदर अस्पताल में शुरू की गई विशेष क्लीनिक व्यवस्था बच्चों और उनके परिवारों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। स्वास्थ्य विभाग का लक्ष्य है कि किसी भी बच्चे को जन्मजात पैर की विकृति के कारण भविष्य में चलने-फिरने में परेशानी न हो और हर बच्चे को समय पर उचित उपचार उपलब्ध कराया जा सके।





